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Charkhi Dadri News: नदी पार करते समय पत्थर पर फिसला पैर, काकडोली हुक्मी के जवान नवीन बलिदान
Wed, 30 Apr 2025 12:37 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Wed, 30 Apr 2025 12:37 AM IST
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चरखी दादरी के गांव काकड़ोली हुक्मी निवासी जवान नवीन श्योराण।
चरखी दादरी। गांव काकड़ोली हुक्मी निवासी जवान नवीन श्योराण लेह-लद्दाख में रविवार को नदी पार करते समय बलिदान हो गए। मंगलवार को देर रात उनका पार्थिव शरीर गांव पहुंचा।
बता दें कि नवीन श्योराण (25) चार साल पहले भारतीय वायुसेना में भर्ती हुए थे। वर्तमान में उनकी तैनाती लेह-लद्दाख के कठिन और दुर्गम इलाके में थी। रविवार को नवीन का जन्मदिन था और इसी दिन वे लेह में नदी पार कर रहे थे और पत्थर पर पैर फिसलने के कारण नदी में गिर गए। नदी में दलदल के कारण वे बाहर नहीं निकल पाए और शरीर में पानी भर गया। सूचना मिलने के बाद एनडीआरएफ टीम ने तलाशी अभियान चलाया और नवीन का पता लगाया। करीब 24 घंटे की जांच के बाद नदी से नवीन का शव बरामद हुआ। सोमवार को परिजनों को सूचना दी तो घर के मौजिज लोग व ग्रामीण पार्थिव शरीर लेने के लिए रवाना हुए। वहीं, रात 8 बजे तक पार्थिव शरीर गांव नहीं पहुंचा था।
नवीन श्योराण के पिता सतीश श्योराण की गांव में ही बीज भंडार की दुकान है। नवीन दो भाइयों में छोटे थे। नवीन को बचपन से ही देश सेवा का चाव था और इसकी प्रेरणा उन्हें अपने दादा से मिली। उनके दादा धर्मसिंह भी भारतीय सेना में सेवाएं दे चुके हैं। नवीन श्योराण के बड़े भाई नितिन श्योराण कानून की पढ़ाई कर रहे हैं। दोनों भाइयों की दो माह पहले ही सगाई हुई थी और अगस्त में शादी की तैयारी थी। घटना से घर व गांव में दुख का माहौल है।
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बता दें कि नवीन श्योराण (25) चार साल पहले भारतीय वायुसेना में भर्ती हुए थे। वर्तमान में उनकी तैनाती लेह-लद्दाख के कठिन और दुर्गम इलाके में थी। रविवार को नवीन का जन्मदिन था और इसी दिन वे लेह में नदी पार कर रहे थे और पत्थर पर पैर फिसलने के कारण नदी में गिर गए। नदी में दलदल के कारण वे बाहर नहीं निकल पाए और शरीर में पानी भर गया। सूचना मिलने के बाद एनडीआरएफ टीम ने तलाशी अभियान चलाया और नवीन का पता लगाया। करीब 24 घंटे की जांच के बाद नदी से नवीन का शव बरामद हुआ। सोमवार को परिजनों को सूचना दी तो घर के मौजिज लोग व ग्रामीण पार्थिव शरीर लेने के लिए रवाना हुए। वहीं, रात 8 बजे तक पार्थिव शरीर गांव नहीं पहुंचा था।
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नवीन श्योराण के पिता सतीश श्योराण की गांव में ही बीज भंडार की दुकान है। नवीन दो भाइयों में छोटे थे। नवीन को बचपन से ही देश सेवा का चाव था और इसकी प्रेरणा उन्हें अपने दादा से मिली। उनके दादा धर्मसिंह भी भारतीय सेना में सेवाएं दे चुके हैं। नवीन श्योराण के बड़े भाई नितिन श्योराण कानून की पढ़ाई कर रहे हैं। दोनों भाइयों की दो माह पहले ही सगाई हुई थी और अगस्त में शादी की तैयारी थी। घटना से घर व गांव में दुख का माहौल है।
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