फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Charkhi Dadri News ›   jamabandi from september

राहत : सितंबर में तैयार होगी जिले की नई जमाबंदी

Thu, 27 Mar 2025 01:45 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी Updated Thu, 27 Mar 2025 01:45 AM IST
विज्ञापन
jamabandi from september
अमर उजाला एक्सकलूसिव
विज्ञापन


फोटो 01
जमीन के कार्य के लिए शहर स्थित पटवारी कार्यालय में पहुंचे लोग। संवाद

- नई जमाबंदी बनने से त्रुटियां होंगी दूर, भूमालिकों को मिलेगी बड़ी राहत, तहसील और पटवारी के दफ्तर के नहीं काटने पड़ेंगे चक्कर
- पिछले 5 साल में 4500 लोग दूर करवा चुके जमीन जमाबदी की त्रुटियां, जेब ढीली करने के साथ करनी पड़ी भाग-दौड़


चरखी दादरी। अब राजस्व विभाग सितंबर माह में जिले की नई जमाबंदी तैयार करेगा। इससे जमाबंदी में व्याप्त त्रुटियां दूर हो जाएंगी और भूमालिकों को आएदिन तहसील व पटवारियों के कार्यालय के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। वैसे भी पांच साल में जमाबंदी को अपडेट करना होता है। जिले की जमाबंदी में खामियां होने से भूमालिक लंबे से परेशानियां झेलने के लिए विवश हैं।
वर्ष 2019 में जब से जमीन का रिकार्ड ऑनलाइन किया गया है। तब से लेकर अब तक जिले में करीब 4500 लोगों को अपनी जमीन की जमाबंदी में त्रुटियां ठीक करवानी पड़ी हैं। रिकॉर्ड ऑनलाइन करते समय वर्ष 2019 तक का पुराना ऑफलाइन रिकाॅर्ड ही अपलोड कर दिया गया। उसके बाद के रिकाॅर्ड को अपडेट नहीं किया गया। जबकि, पुराना रिकाॅर्ड उठाने की वजह से जमाबंदी में हजारों त्रुटियां एवं खामियां रह गईं।
विज्ञापन

वहीं, इन खामियों की वजह से किसी की जमीन का रकबा कम तो किसी का ज्यादा दिखाया जा रहा है। लोगों को आए दिन संशोधन यानी बदर लिखवाकर खामियों को दूर करवाना पड़ रहा है। पटवारी से बदर लिखवाने के लिए फीस भी वहन करनी पड़ती है। संवाद
विज्ञापन
विज्ञापन

- त्रुटियां ठीक कराना टेढ़ी खीर
अब तक 4500 लोग जमीन की जमाबंदी संबंधी त्रुटियां ठीक कराने के लिए अपनी जेब ढीली कर चुके हैं। इतना ही नहीं आए दिन पटवारियों के चक्कर भी लगाने पड़ते हैं। उसके बाद तहसीलदार के बदर पर हस्ताक्षर होते हैं। फिर ये ऑनलाइन अपलोड होती है। इसके बाद जमाबंदी का रिकाॅर्ड ठीक हो पाता है। ऐसे में जमीन की जमाबंदी संबंधी त्रुटियां ठीक कराना टेढ़ी खीर है।

- तहसील कार्यालय में प्रतिदिन होती हैं 25 रजिस्ट्री
तहसीलदार कार्यालय में प्रतिदिन करीब 25 जमीन एवं मकानों की रजिस्ट्री होती हैं। रजिस्ट्री बनवाने से पहले जमीन का पूरा रिकाॅर्ड तैयार करवाना होता है। ऐसे में रकबा कम या ज्यादा मिलने पर उसे ठीक करवाना पड़ता है। काफी संख्या में तो ऐसे मामले हैं जो वास्तविक मालिक होते हुए भी राजस्व विभाग के रिकाॅर्ड में नहीं हैं।

- सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में आ रहीं दिक्कतें
सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए उम्मीदवार को दस्तावेज के रूप में मकान या प्लॉट की रजिस्ट्री, इंतकाल व जमाबंदी भी जमा करवानी होती है। नगर परिषद से मकान के ऋण व अन्य सुविधाओं का लाभ लेने के लिए जमाबंदी की फर्द अवश्य जमा करवानी होती है। तब जाकर इन सुविधाओं का लाभ मिल पाता है।

- खामियों से विभाग व प्रशासन भी तंग
किसान सम्मान निधि योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, जमीन की रजिस्ट्री बनवाने व खरीद-फरोख्त में बेहद कठिनाइयां आ रही हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत ऋण आदि के लिए जमाबंदी का होना जरूरी है। जमाबंदी में खामियों के चलते विभाग व प्रशासन भी तंग आ चुका है क्योंकि ऑनलाइन रिकाॅर्ड में डाटा फीड करने में दिक्कतें आती हैं।
- 12 गांवों में चकबंदी नहीं, पुराना रिकॉर्ड है उर्दू में
जिले में करीब 12 ऐसे गांव हैं, जिनमें आजादी के दशक के बाद से ही चकबंदी ही नहीं हुई है। पुराना रिकाॅर्ड उर्दू में होने की वजह से नए पटवारी व गिरदावर को भी इसे समझने में दिक्कतें आ रही हैं। किसानों को आए दिन कृषि व राजस्व विभाग कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ते हैं।

वर्सन
सितंबर माह में नई जमाबंदी तैयार कर ली जाएगी। इससे सारी खामियां दूर हो जाएंगी। फिलहाल, जिस व्यक्ति को भी परेशानी आती है, वह विभाग के अधिकारियों से मिले। जल्द ही जमाबंदी की सारी खामियां दूर कर दी जाएंगी।
-सज्जन कुमार, तहसीलदार, जिला राजस्व विभाग
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed