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जिले में पांच साल बाद भी नहीं हुआ जेल का निर्माण
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जिला कोर्ट कॉम्पलेक्स।
- फोटो : CharkhiDadri
चरखी दादरी। दादरी के जिला बनने के पांच साल बाद भी जिला कारगार का निर्माण नहीं हुआ है। इससे एकतरफ बंदियों और उनके परिजनों को परेशानी झेलनी पड़ रही है तो दूसरी ओर अन्य जिलों की जेलों से कैदियों को लाने पर सरकार का खर्चा भी काफी होता है। इसके बावजूद जिला कारगार की फाइल आगे नहीं बढ़ पा रही है। बार एसोसिएशन ने भी जेल निर्माण की मांग का समर्थन करते हुए प्रशासन व सरकार से इसे जल्द सिरे चढ़ाने की मांग की है।
जिले में इस समय आठ कोर्ट हैं जिनमें प्रतिमाह करीब 500 मामलों की सुनवाई होती है। इन अदालत में सुनारिया, झज्जर व भिवानी जेलों से प्रतिमाह करीब 450 सजायाफ्ता व हवालाती पेशी एवं सेशन ट्रायल पर आते हैं। इसके अलावा जिला में छह पुलिस थाना व सात चौकी भी हैं जिनमें प्रतिमाह 100 से 125 मामले दर्ज होते हैं। जेल की सुविधा नहीं होने से आरोपियों के परिजनों को अदालत का वकालतनामा लेकर दूसरे जिलों में जाना पड़ता है। बाढड़ा उपमंडल में भी कोर्ट शुरू नहीं हो सकी है। बाढड़ा में केवल तहसीलदार व एसडीएम की कोर्ट में राजस्व आदि मामलों का निपटान होता है।
जिले में दो एडीजे और सेशन कोर्ट वर्किंग में
शहर में विभिन्न मामलों से संबंधित आठ कोर्ट वकिंग में हैं, जिनमें दो एडीजे कोर्ट भी शामिल है। जिला सेशन कोर्ट भी शुरू हो चुकी है। जिला स्तर की कोर्ट दादरी में शुरू हुई उस समय करीब तीन हजार केस भिवानी कोर्ट से दादरी स्थानांतरित हुए थे ऐसे में दादरी कोर्ट में अब कामकाज काफी बढ़ा है।
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बार एसोसिएशन की मांग : सरकार जल्द से सकारात्मक निर्णय
जिला बार एसोसिएशन ने सरकार से जिला में जेल के निर्माण की मांग उठाई है ताकि सरकार के पैसे की बचत हो और लोगों को भी सुविधा हो सके। बार एसोसिएशन पदाधिकारियों का मानना है कि इस समय जेल का निर्माण जरूरी हो गया है। सरकार को इस पर जल्दी सकारात्मक निर्णय लेना चाहिए। सुरक्षा की दृष्टि से जेल का होना जरूरी हो गया है। जेलों में बंद कैदी व ट्रायल पर चल रहे आरोपियों से समय समय पर मिलने जुलने में उनके परिजनों को भी सुविधा हो सकेगी।
जिले में जेल बनने से सरकार के पैसे की भी बचत होगी। लोगों को भी सुविधा होगी। सरकार को जेल के निर्माण पर जल्दी विचार करना चाहिए। जिले का दायरा बढ़ता ही जा रहा है। मामलों की संख्या भी पिछले सालों में काफी बढ़ी है।
सुरेंद्र मैहड़ा, प्रधान, चरखी दादरी बार एसोसिएशन
जिला स्तर के प्रोजेक्ट को सिरे चढ़ाने के लिए प्रशासन प्रयासरत है। लघु सचिवालय निर्माण का रास्ता साफ हो चुका है और जल्द ही जिला कारगार समेत अन्य प्रोजेक्ट सिरे चढ़ा दिए जाएंगे। - प्रदीप गोदारा, डीसी
फोटो 02
जिला कोर्ट कॉम्पलेक्स।
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जिले में इस समय आठ कोर्ट हैं जिनमें प्रतिमाह करीब 500 मामलों की सुनवाई होती है। इन अदालत में सुनारिया, झज्जर व भिवानी जेलों से प्रतिमाह करीब 450 सजायाफ्ता व हवालाती पेशी एवं सेशन ट्रायल पर आते हैं। इसके अलावा जिला में छह पुलिस थाना व सात चौकी भी हैं जिनमें प्रतिमाह 100 से 125 मामले दर्ज होते हैं। जेल की सुविधा नहीं होने से आरोपियों के परिजनों को अदालत का वकालतनामा लेकर दूसरे जिलों में जाना पड़ता है। बाढड़ा उपमंडल में भी कोर्ट शुरू नहीं हो सकी है। बाढड़ा में केवल तहसीलदार व एसडीएम की कोर्ट में राजस्व आदि मामलों का निपटान होता है।
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जिले में दो एडीजे और सेशन कोर्ट वर्किंग में
शहर में विभिन्न मामलों से संबंधित आठ कोर्ट वकिंग में हैं, जिनमें दो एडीजे कोर्ट भी शामिल है। जिला सेशन कोर्ट भी शुरू हो चुकी है। जिला स्तर की कोर्ट दादरी में शुरू हुई उस समय करीब तीन हजार केस भिवानी कोर्ट से दादरी स्थानांतरित हुए थे ऐसे में दादरी कोर्ट में अब कामकाज काफी बढ़ा है।
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बार एसोसिएशन की मांग : सरकार जल्द से सकारात्मक निर्णय
जिला बार एसोसिएशन ने सरकार से जिला में जेल के निर्माण की मांग उठाई है ताकि सरकार के पैसे की बचत हो और लोगों को भी सुविधा हो सके। बार एसोसिएशन पदाधिकारियों का मानना है कि इस समय जेल का निर्माण जरूरी हो गया है। सरकार को इस पर जल्दी सकारात्मक निर्णय लेना चाहिए। सुरक्षा की दृष्टि से जेल का होना जरूरी हो गया है। जेलों में बंद कैदी व ट्रायल पर चल रहे आरोपियों से समय समय पर मिलने जुलने में उनके परिजनों को भी सुविधा हो सकेगी।
जिले में जेल बनने से सरकार के पैसे की भी बचत होगी। लोगों को भी सुविधा होगी। सरकार को जेल के निर्माण पर जल्दी विचार करना चाहिए। जिले का दायरा बढ़ता ही जा रहा है। मामलों की संख्या भी पिछले सालों में काफी बढ़ी है।
सुरेंद्र मैहड़ा, प्रधान, चरखी दादरी बार एसोसिएशन
जिला स्तर के प्रोजेक्ट को सिरे चढ़ाने के लिए प्रशासन प्रयासरत है। लघु सचिवालय निर्माण का रास्ता साफ हो चुका है और जल्द ही जिला कारगार समेत अन्य प्रोजेक्ट सिरे चढ़ा दिए जाएंगे। - प्रदीप गोदारा, डीसी
फोटो 02
जिला कोर्ट कॉम्पलेक्स।