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Charkhi Dadri News: सर्वे करने में बीमा कंपनियों के छूट रहे पसीने
Sat, 06 Apr 2024 02:32 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Sat, 06 Apr 2024 02:32 AM IST
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चरखी दादरी। जिले के कई गांवों में दो मार्च को ओलावृष्टि से हुए नुकसान की भरपाई के लिए करीब 20 हजार किसानों ने फसल बीमा क्लेम के लिए आवेदन किया है। क्लेम का सत्यापन करने के लिए बीमा कंपनियों ने सर्वे का कार्य शुरू कर दिया है। लेकिन सर्वे कार्य में बीमा कंपनियों के सामने किसानों द्वारा ओवर इंश्योरेंस करवाए जाने की वजह से इस काम में काफी परेशानियां आ रही हैं। जमीन की खतौनी एक होने की वजह से एक एकड़ में कंपनी को 50 पॉलिसी तक तैयार करनी पड़ रही हैं।
बता दें कि बीमा कंपनी की योजना है कि प्रत्येक किसान की जमीन का हिस्सा ऑनलाइन शामिल किया जाए। बीमा कंपनी के सामने अब दिक्कत यह आ रही है कि खेत की एक ही खतौनी होने और उसमें कई हिस्सेदार होने से यह परेशानी बनी है। अब हिस्सेदारों ने जमीन बांटने का कार्य अपने स्तर पर ही किया हुआ लेकिन कागजों में अलग-अलग बोल रही है। जिसके कारण यह परेशानी ज्यादा बढ़ी है। वहीं कंपनी चाहती है कि वास्तविक किसान को ही बीमा का लाभ मिले, इसके लिए इस योजना पर काम किया जा रहा है।
आमतौर पर शिकायतें रहती थी कि एक भाई ने पूरे खेत का बीमा करवा दिया जबकि उस खेत के नंबर में हिस्सेदार कई और भी मिलते हैं। अब इस दुविधा को लेकर कृषि विभाग बीमा कंपनियों की ओर से जल्द ही उच्चाधिकारियों की बैठक होने वाली है। जिसमें कोई अंतिम फैसला लिया जाएगा ताकि सभी पात्र किसानों को उचित मुआवजा मिल सके।
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बता दें कि जिले में ओलावृष्टि से करीब 65 हजार एकड़ से ज्यादा क्षेत्र में सरसों, गेहूं व अन्य फसलों में नुकसान का आकलन उस समय कृषि विभाग ने किया था। विभाग ने उस समय 25 से 50 प्रतिशत तक नुकसान का आकलन किया था। किसी एरिया में नुकसान का यह आंकड़ा 75 प्रतिशत भी रहा है। संवाद
गेहूं और सरसों में हुआ था काफी नुकसान
जिले में करीब 25 गांवों में दो मार्च को ओलावृष्टि से रबी की फसलों में काफी नुकसान हुआ था। जिले में इस रबी सीजन में एक लाख 60 हजार एकड़ में सरसों व एक लाख एकड़ में गेहूं की फसल है। किसी गांव में 20 मिनट तो कही आधा घंटे तक ओले गिरे थे। गांव रासीवास, छपार, डोहकी, बरसाना, नरसिंहवास, बौंदकलां, बौंद खुर्द, रणकौली, नीमड़ी, मालकोष, सांजरवास, रानीला, ऊण आदि में ओलावृष्टि से फसलों में काफी नुकसान हुआ था। सरसों की फसल तो उस समय पकाव की अवस्था में थी। तेज हवा व ओलावृष्टि से फसलें खेतों में बिछ गई थी।
क्या है ओवर इंश्योरेंस
अति-बीमा को अतिरिक्त बीमा कवरेज/पॉलिसी के रूप में वर्णित किया जा सकता है जो समान जोखिम को कवर करती है या बीमाधारक को संभावित नुकसान के मूल्य से अधिक (से अधिक) बीमा कवर होता है। यानि एक ही जमीन में कई हिस्सेदार होने से सभी ने पॉलिसी करवा ली, लेकिन जमीन की खतौनी एक ही है। इसके कारण परिवार बढ़ता गया और जमीन बंटती गई, लेकिन कागजों में खतौनी अलग-अलग नहीं हुई। ऐसे में मिलने वाला मुआवजा का असली हकदार कौन हो इसके लिए बीमा कंपनी सर्वे कार्य कर रही है।
बीमा कंपनी ने सर्वे शुरू कर दी है। उसमें कुछ परेशानी आ रही हैं। काफी संख्या में किसानों की जमीन की खतौनी इकट्ठी होने की वजह से दिक्कत आ रही है। आपस में भाइयों ने तो बिजाई के लिए जमीन अपने स्तर पर बांट रखी है जबकि रिकॉर्ड में सभी भाई हिस्सेदार हैं, ऐसे में एक ही खतौनी नंबर की 50 तक पॉलिसियां तैयार की जा रही हैं। जल्द ही इस बारे में उचित फैसला लिया जा सकेगा। सरकार प्रत्येक वास्तविक किसान को मुआवजा देना चाहती है।
-डॉ. जितेंद्र सिहाग, सहायक कृषि तकनीकी अधिकारी
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बता दें कि बीमा कंपनी की योजना है कि प्रत्येक किसान की जमीन का हिस्सा ऑनलाइन शामिल किया जाए। बीमा कंपनी के सामने अब दिक्कत यह आ रही है कि खेत की एक ही खतौनी होने और उसमें कई हिस्सेदार होने से यह परेशानी बनी है। अब हिस्सेदारों ने जमीन बांटने का कार्य अपने स्तर पर ही किया हुआ लेकिन कागजों में अलग-अलग बोल रही है। जिसके कारण यह परेशानी ज्यादा बढ़ी है। वहीं कंपनी चाहती है कि वास्तविक किसान को ही बीमा का लाभ मिले, इसके लिए इस योजना पर काम किया जा रहा है।
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आमतौर पर शिकायतें रहती थी कि एक भाई ने पूरे खेत का बीमा करवा दिया जबकि उस खेत के नंबर में हिस्सेदार कई और भी मिलते हैं। अब इस दुविधा को लेकर कृषि विभाग बीमा कंपनियों की ओर से जल्द ही उच्चाधिकारियों की बैठक होने वाली है। जिसमें कोई अंतिम फैसला लिया जाएगा ताकि सभी पात्र किसानों को उचित मुआवजा मिल सके।
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बता दें कि जिले में ओलावृष्टि से करीब 65 हजार एकड़ से ज्यादा क्षेत्र में सरसों, गेहूं व अन्य फसलों में नुकसान का आकलन उस समय कृषि विभाग ने किया था। विभाग ने उस समय 25 से 50 प्रतिशत तक नुकसान का आकलन किया था। किसी एरिया में नुकसान का यह आंकड़ा 75 प्रतिशत भी रहा है। संवाद
गेहूं और सरसों में हुआ था काफी नुकसान
जिले में करीब 25 गांवों में दो मार्च को ओलावृष्टि से रबी की फसलों में काफी नुकसान हुआ था। जिले में इस रबी सीजन में एक लाख 60 हजार एकड़ में सरसों व एक लाख एकड़ में गेहूं की फसल है। किसी गांव में 20 मिनट तो कही आधा घंटे तक ओले गिरे थे। गांव रासीवास, छपार, डोहकी, बरसाना, नरसिंहवास, बौंदकलां, बौंद खुर्द, रणकौली, नीमड़ी, मालकोष, सांजरवास, रानीला, ऊण आदि में ओलावृष्टि से फसलों में काफी नुकसान हुआ था। सरसों की फसल तो उस समय पकाव की अवस्था में थी। तेज हवा व ओलावृष्टि से फसलें खेतों में बिछ गई थी।
क्या है ओवर इंश्योरेंस
अति-बीमा को अतिरिक्त बीमा कवरेज/पॉलिसी के रूप में वर्णित किया जा सकता है जो समान जोखिम को कवर करती है या बीमाधारक को संभावित नुकसान के मूल्य से अधिक (से अधिक) बीमा कवर होता है। यानि एक ही जमीन में कई हिस्सेदार होने से सभी ने पॉलिसी करवा ली, लेकिन जमीन की खतौनी एक ही है। इसके कारण परिवार बढ़ता गया और जमीन बंटती गई, लेकिन कागजों में खतौनी अलग-अलग नहीं हुई। ऐसे में मिलने वाला मुआवजा का असली हकदार कौन हो इसके लिए बीमा कंपनी सर्वे कार्य कर रही है।
बीमा कंपनी ने सर्वे शुरू कर दी है। उसमें कुछ परेशानी आ रही हैं। काफी संख्या में किसानों की जमीन की खतौनी इकट्ठी होने की वजह से दिक्कत आ रही है। आपस में भाइयों ने तो बिजाई के लिए जमीन अपने स्तर पर बांट रखी है जबकि रिकॉर्ड में सभी भाई हिस्सेदार हैं, ऐसे में एक ही खतौनी नंबर की 50 तक पॉलिसियां तैयार की जा रही हैं। जल्द ही इस बारे में उचित फैसला लिया जा सकेगा। सरकार प्रत्येक वास्तविक किसान को मुआवजा देना चाहती है।
-डॉ. जितेंद्र सिहाग, सहायक कृषि तकनीकी अधिकारी