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हमारी कामयाबी में शिक्षकों का अहम योगदान, विद्यार्थी और युवा हमेशा करें गुरुजनों का सम्मान

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 04 Sep 2022 10:48 PM IST
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Important contribution of teachers in our success, students and youth should always respect the teachers
चरखी दादरी। हमारे देश में गुरु का दर्जा माता-पिता से भी ऊपर है। ऐसे असंख्य केस हैं, जिनकी सफलता में गुरु की भूमिका अहम रही है। ऐसी दो शख्सियत चरखी दादरी जिले में भी हैं जो आज उच्च प्रशासनिक पदों पर आसीन होकर जनसेवा में लगे हैं। हम बात कर रहे हैं चरखी दादरी डीसी आईएएस प्रीति और एसपी आईपीएस दीपक गहलावत की। शिक्षक दिवस पर इन दोनों अधिकारियों ने संवाददाता से विशेष बातचीत की। दोनों का कहना है कि उन्हें यहां तक पहुंचाने में उनके गुरुजनों का अहम योगदान है। उन्होंने जिले के युवाओं से गुरुजनों का सदैव सम्मान करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि सफलता के मूलमंत्र की यह पहली सीढ़ी है। डीसी और एसपी की जिंदगी में उनके शिक्षकों के योगदान पर पढ़िए एक विशेष रिपोर्ट....
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बतौर एडीसी ज्वाइन करते ही सीनियर अधिकारी को माना गुरु, आज भी उनसे सीख रही: डीसी
चरखी दादरी की पहली महिला डीसी आईएएस प्रीति ने संवाददाता को बातचीत में बताया कि उनका शुरुआत से ही शिक्षकों से लगाव रहा है। आईएएस बनने के बाद 2016 में ट्रेनिंग के तौर पर पोस्टिंग करनाल में बतौर एडीसी हुई थी। उस दौरान 2005 के सीनियर आईएएस अधिकारी मनदीप बराड़ की कार्यप्रणाली और जिंदादिली से वो बेहद प्रभावित हुईं और उन्हें अपना गुरु मान लिया। आज भी उनसे काफी कुछ सीख रही हूं। डीसी ने बताया कि हर विद्यार्थी व युवा के जीवन में शिक्षक का अहम रोल होता है। शिक्षक भटके हुए को भी रास्ता दिखाने की काबिलियत रखता है। शिक्षा और शिक्षक के बिना आज के समय जीवन अधूरा है। मेरी युवाओं से अपील है कि मन लगाकर पढ़ाई करें और अपने गुरुजनों का सदैव सम्मान करें।
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मेरे आईपीएस बनने में माता-पिता की प्रेरणा और शिक्षकों का मार्गदर्शन अहम: दीपक गहलावत
चरखी दादरी एसपी एवं 2012 बैच के आईपीएस अधिकारी दीपक गहलावत का कहना है कि गुरु हमें किसी भी रिश्ते में मिल सकता है। मेरे माता-पिता ने भी जीवन में गुरु की भूमिका निभाई है। आज मैं इस मुकाम पर हूं, उसमें माता-पिता की प्रेरणा और शिक्षकों का मार्गदर्शन है। उनके दिखाए मार्ग को चुना और मंजिला हासिल करने के लिए अपना हरसंभव प्रयास किया। नतीजा यह रहा कि आईपीएस अधिकारी बन गया। एसपी दीपक गहलावत का कहना है कि पिता कुलबीर सिंह गहलावत पुलिस विभाग में थे और माता-पिता दोनों चाहते थें कि मैं आईपीएस अफसर बनूं। उनका सपना पूरा करने के लिए शिद्दत से मेहनत की और आज खुशी है कि अपने पहले गुरु का सपना पूरा करने में सफल रहा।
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