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Charkhi Dadri News: जिले के भूजल का हर माह होगा आकलन, 35 स्थानों पर लगाए जाएंगे पिजियोमेट्रिक पी-ट्यूब सेंसर
Mon, 31 Jul 2023 12:04 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Mon, 31 Jul 2023 12:04 AM IST
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गांव डोहका हरिया डार्क जोन एरिया का जायजा लेते हुए भू- जल विशेषज्ञ।
संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। भूमिगत जलस्तर का नियमित आकलन करने के लिए सिंचाई विभाग की भूजल शाखा की ओर से जिले में 35 स्थानों पर बोरवेल कर उनमें पिजियोमेट्रिक पी- ट्यूब सेंसर लगाए जाएंगे। पी-ट्यूब सेंसर के माध्यम से हर माह जिले की भूजल स्तर की रिपोर्ट मुख्य कार्यालय जाएगी। विभाग की ओर से योजना के तहत जिले में 13 स्थानों पर यह बोरवेल करके पिजियोमेट्रिक पी-ट्यूब सेंसर लगाए जा चुके हैं।
विभाग की इस योजना के अनुसार हर माह भूजल स्तर की स्थिति का जायजा लिया जाएगा। इसके माध्यम से जिले के जिन भागों में भूजल स्तर के हालात खराब हैं वहां के जल स्तर के सुधार में पर्याप्त प्रयास भी हो पाएंगे। जिले का पिचौपा कलां ऐसा गांव है जिसका भूमिगत जलस्तर जिले में सबसे अधिक 92.15 मीटर गहराई में है। साथ अनेक गांव ऐसे भी हैं जिनमें भूमिगत जलस्तर 290 फुट नीचे तक पहुंच चुका है। ऐसे में किसानों को अपने खेतों की सिंचाई के लिए 15 हार्स पावर की मोटर का प्रयोग कर पानी का उठान करना पड़ रहा है। इतना ही नहीं जिले का भूजल स्तर साल दर साल गहराई में जा रहा है। अनेक गांवों में स्थिति और भी खराब है। किसानों का मानना है कि 1995 के बाद से पर्याप्त मात्रा में बारिश नहीं होने की वजह से जलस्तर लगातार गिर रहा है।
बाढड़ा खंड का अधिकांश क्षेत्र है रेतीला
जिले में तीन खंड दादरी, बाढड़ा और बौंदकलां हैं। बाढड़ा खंड में अधिकांश क्षेत्र रेतीला है। इस क्षेत्र में कपास, ज्वार, बाजरा, गेहूं, चना, मूंग, जौ, ग्वार, सरसों आदि की खेती की जाती है। रेतीले क्षेत्र में किसान ट्यूबवेल के जरिए ही सिंचाई करते हैं। बाढड़ा क्षेत्र में जलस्तर लगातार गिरता जा रहा है। इस क्षेत्र के गांवों में जलस्तर 300 फुट तक गहराई में पहुंच चुका है। इस क्षेत्र के गांवों में किसान बिजली ट्यूबवेल के जरिए सिंचाई करते हैं। अब तो कई किसान सोलर सिस्टम का भी सहारा लेने लगे हैं।
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भू-जल विशेषज्ञों का मानना है कि जमीनी वाटर रिचार्ज नहीं हो पा रहा है। पानी का संकट बढ़ने पर आने वाले समय में खेती पर संकट छा जाएगा। रेतीले क्षेत्र में बारिश के अलावा सिंचाई का और कोई विकल्प भी नहीं है। जल का लगातार दोहन भी हो रहा है। जिला में बाढ़ड़ा का ज्यादातर एरिया डार्क न में शामिल है। ऐसे में आने वाले कुछ समय में यहां पीने के लिए भी पानी नहीं बचेगा। लोगों का जीवन कठिन हो जाएगा। इसके लिए हर साल अच्छी मात्रा में बारिश का होना या फिर पर्याप्त मात्रा में क्षेत्र को नहरी पानी उपलब्ध कराना ही विकल्प बचा है।
जल शक्ति मंत्रालय की ओर से जल संचयन की दिशा में लगातार काम हो रहा है। भूजल स्तर को बनाए रखने के लिए प्रदेश सरकार की ओर से तालाबों का भी सुंदरीकरण किया जा रहा है। जिले में 35 स्थानों पर विभाग की ओर से पिजियोमेट्रिक पी-ट्यूबर सेंसर लगाने का काम शुरू कर दिया गया है ताकि प्रतिमाह जलस्तर का आंकलन किया जा सके और इसके लिए समय रहते वैकल्पिक व्यवस्था पर ध्यान दिया जा सके। जिला के गांव सरूपगढ़ में भूमिगत जलस्तर सबसे ऊपर है। इस गांव का वाटर लेवल महज 0.85 मीटर है।
अब तक 13 स्थानों पर बोरवेल किए जा चुके हैं। शेष पर काम जारी है। डार्क जोन एरिया पर विभाग का ज्यादा फोकस है। क्षेत्र को ज्यादा से ज्यादा संख्या में पौधरोपण कर हरा-भरा बनाएं ताकि मानसून की बारिश ज्यादा मात्रा में हो। जल संरक्षण के लिए जागरूकता अभियान भी चला रखे हैं।
-खुर्शीद अहमद ,सूचना शिक्षा संचार विशेषज्ञ
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चरखी दादरी। भूमिगत जलस्तर का नियमित आकलन करने के लिए सिंचाई विभाग की भूजल शाखा की ओर से जिले में 35 स्थानों पर बोरवेल कर उनमें पिजियोमेट्रिक पी- ट्यूब सेंसर लगाए जाएंगे। पी-ट्यूब सेंसर के माध्यम से हर माह जिले की भूजल स्तर की रिपोर्ट मुख्य कार्यालय जाएगी। विभाग की ओर से योजना के तहत जिले में 13 स्थानों पर यह बोरवेल करके पिजियोमेट्रिक पी-ट्यूब सेंसर लगाए जा चुके हैं।
विभाग की इस योजना के अनुसार हर माह भूजल स्तर की स्थिति का जायजा लिया जाएगा। इसके माध्यम से जिले के जिन भागों में भूजल स्तर के हालात खराब हैं वहां के जल स्तर के सुधार में पर्याप्त प्रयास भी हो पाएंगे। जिले का पिचौपा कलां ऐसा गांव है जिसका भूमिगत जलस्तर जिले में सबसे अधिक 92.15 मीटर गहराई में है। साथ अनेक गांव ऐसे भी हैं जिनमें भूमिगत जलस्तर 290 फुट नीचे तक पहुंच चुका है। ऐसे में किसानों को अपने खेतों की सिंचाई के लिए 15 हार्स पावर की मोटर का प्रयोग कर पानी का उठान करना पड़ रहा है। इतना ही नहीं जिले का भूजल स्तर साल दर साल गहराई में जा रहा है। अनेक गांवों में स्थिति और भी खराब है। किसानों का मानना है कि 1995 के बाद से पर्याप्त मात्रा में बारिश नहीं होने की वजह से जलस्तर लगातार गिर रहा है।
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बाढड़ा खंड का अधिकांश क्षेत्र है रेतीला
जिले में तीन खंड दादरी, बाढड़ा और बौंदकलां हैं। बाढड़ा खंड में अधिकांश क्षेत्र रेतीला है। इस क्षेत्र में कपास, ज्वार, बाजरा, गेहूं, चना, मूंग, जौ, ग्वार, सरसों आदि की खेती की जाती है। रेतीले क्षेत्र में किसान ट्यूबवेल के जरिए ही सिंचाई करते हैं। बाढड़ा क्षेत्र में जलस्तर लगातार गिरता जा रहा है। इस क्षेत्र के गांवों में जलस्तर 300 फुट तक गहराई में पहुंच चुका है। इस क्षेत्र के गांवों में किसान बिजली ट्यूबवेल के जरिए सिंचाई करते हैं। अब तो कई किसान सोलर सिस्टम का भी सहारा लेने लगे हैं।
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भू-जल विशेषज्ञों का मानना है कि जमीनी वाटर रिचार्ज नहीं हो पा रहा है। पानी का संकट बढ़ने पर आने वाले समय में खेती पर संकट छा जाएगा। रेतीले क्षेत्र में बारिश के अलावा सिंचाई का और कोई विकल्प भी नहीं है। जल का लगातार दोहन भी हो रहा है। जिला में बाढ़ड़ा का ज्यादातर एरिया डार्क न में शामिल है। ऐसे में आने वाले कुछ समय में यहां पीने के लिए भी पानी नहीं बचेगा। लोगों का जीवन कठिन हो जाएगा। इसके लिए हर साल अच्छी मात्रा में बारिश का होना या फिर पर्याप्त मात्रा में क्षेत्र को नहरी पानी उपलब्ध कराना ही विकल्प बचा है।
जल शक्ति मंत्रालय की ओर से जल संचयन की दिशा में लगातार काम हो रहा है। भूजल स्तर को बनाए रखने के लिए प्रदेश सरकार की ओर से तालाबों का भी सुंदरीकरण किया जा रहा है। जिले में 35 स्थानों पर विभाग की ओर से पिजियोमेट्रिक पी-ट्यूबर सेंसर लगाने का काम शुरू कर दिया गया है ताकि प्रतिमाह जलस्तर का आंकलन किया जा सके और इसके लिए समय रहते वैकल्पिक व्यवस्था पर ध्यान दिया जा सके। जिला के गांव सरूपगढ़ में भूमिगत जलस्तर सबसे ऊपर है। इस गांव का वाटर लेवल महज 0.85 मीटर है।
अब तक 13 स्थानों पर बोरवेल किए जा चुके हैं। शेष पर काम जारी है। डार्क जोन एरिया पर विभाग का ज्यादा फोकस है। क्षेत्र को ज्यादा से ज्यादा संख्या में पौधरोपण कर हरा-भरा बनाएं ताकि मानसून की बारिश ज्यादा मात्रा में हो। जल संरक्षण के लिए जागरूकता अभियान भी चला रखे हैं।
-खुर्शीद अहमद ,सूचना शिक्षा संचार विशेषज्ञ