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Charkhi Dadri News: फानों की आग से झुलस रही हरियाली, बचाव को वन विभाग ने बनाई संयुक्त टीम

Wed, 13 May 2026 12:29 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी Updated Wed, 13 May 2026 12:29 AM IST
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Forest department forms joint team to save greenery scorched by fan fire
न विभाग कार्यालय में वन अधिकारियों की बैठक को संबोधित करते वन राजिक अधिकारी।  - फोटो : 1
चरखी दादरी। जिले में फानों में आग लगने की बढ़ती घटनाओं से झुलस रही हरियाली को बचाने के लिए वन विभाग की ओर से संयुक्त टीम का गठन किया गया है। वहीं टीम संबंधित वन खंड अधिकारी को साथ लेकर ग्रामीणों को आग से होने वाले प्राकृतिक नुकसान के बारे में जागरूकता अभियान चलाएगी। वन अधिकारी का कहना है कि खेतों में लगी फानों की आग से हजारों पौधे झुलस गए हैं सैकड़ों हरे पेड़ जलने की संभावना है जिससे वातावरण पर विपरीत असर पड़ रहा है।
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गौरतलब है कि खेतों में फाने जलाने के अधिक मामले सामने आ रहे है जिससे वन विभाग की ओर से लगाए गए पेड़ व पौधों को भारी नुकसान हो रहा है। खेतों में आगजनी की बढ़ती घटनाओं से परेशान विभाग के वन राजिक अधिकारी ने खंड कर्मचारियों की बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में आग की चपेट में झुलस रहे पौधों व हरे पेड़ों को बचाने के बारे में गंभीरता से विचार किया गया। इस दौरान बैठक में ग्रामीणों को फाने जलाने से रोकने के लिए उप वन राजिक अधिकारी मंजीत कुमार के नेतृत्व में संयुक्त टीम बनाई गई। वन विभाग की टीमें खंड अनुसार गावों में पहुंच फाने जलाने से नष्ट हो रही उपजाऊ भूमि की मिट्टी के बारे में विस्तार पूर्वक जानकारी देंगे। बता दें, आगजनी की चपेट में आने से 5 हजार से अधिक पौधे झुलस गए है उनके पनपने की संभावना काफी कम है। वहीं 100 से अधिक सूखे व हरे पेड़ जल कर राख हो गए है।
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पर्यावरण को होती है क्षति
खेतों में आग लगने से मिट्टी के पोषक तत्व और सूक्ष्म जीव नष्ट हो जाते है जिससे भूमि बंजर होने की संभावना बनी रहती है। वहीं जलते हुए पेड़ भारी मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड और जहरीली गैस छोड़ते है। जो तापमान बढ़ाने में कारगर सिद्ध होते है। कई प्रकार की वनस्पतियां और वन्यजीव आग की भेंट चढ़ जाते है, जिससे पारिस्थितिक संतुलन बिगड़त जाता है।
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मिट्टी की उर्वरता में आती है कमी
जिला कृषि अधिकारी डॉ. कृष्ण कुमार ने बताया कि खेतों में फाने जलाने से मिट्टी की ऊपरी परत पर गर्मी बढ़ जाती है, जिससे पोषक तत्व लगभग एक टन नरवाई में 5.5 किलो नाइट्रोजन , 2.3 किलो फॉस्फोरस व 25 किलो पोटाश नष्ट हो जाता है।

आंख व सांस के गंभीर रोग पनपने की बनती है संभावना
पेड़-पौधे जलने से होने वाले प्रदूषण के कारण कार्बन डाई ऑक्साइड, मीथेन जैसी जहरीली गैस निकलती है, जो वायु प्रदूषण की मात्रा को बढ़ाती है। जिससे सांस व आंखों से संबंधित गंभीर रोग पनपने की संभावना अधिक बढ़ जाती है।


वर्सन:
हमारे विभाग की टीमें वन खंड से जुड़े गांवों में पहुंच कर किसानों और ग्रामीणों को फाने जलाने से होने वाले प्राकृतिक नुकसानों के बारे में जागरूक करेंगी। वहीं पौधों व पेड़ों के जलने से स्वास्थ्य व उपजाऊ मिट्टी की घटती उर्वरता के बारे में जानकारी देंगी। ताकि आगजनी से होने वाली क्षति के बारे में लोग जागरूक हो सके।
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