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बच्चों के जीवन निर्माण की नींव है एफएलएन : संदीप
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सीआरपी वर्कशॉप में मौजूद दादरी और बौंद खंड के प्राथमिक शिक्षक।
चरखी दादरी। निपुण हरियाणा मिशन के एफएलएन कार्यक्रम को गति देने के उद्देश्य से खंड बौंद और दादरी में सीआरपी कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें दोनों खंडों के सभी एबीआरसी, और प्रत्येक प्राथमिक विद्यालय से एक-एक प्रतिनिधि अध्यापक ने सहभागिता की। कार्यक्रम का उद्देश्य बाल वाटिका में कक्षा से तीसरी से पांचवीं तक एफएलएन लक्ष्यों की गहराई से समझ और विद्यालय स्तर पर प्रभावी क्रियांवयन की रणनीति तैयार करना रहा।
कार्यशाला की शुरुआत जिला एफएलएन कोऑर्डिनेटर संदीप कुमार के नेतृत्व में हुई। उन्होंने प्रतिभागियों को एफएलएन की मूल भावना और उसके उद्देश्यों से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि एफएलएन केवल शिक्षण नहीं बल्कि बच्चों के जीवन निर्माण की नींव है। कार्यक्रम में स्टेट टीम से एफएलएन विशेषज्ञ अभिषेक की भी उपस्थिति रही।
उन्होंने उपस्थित शिक्षकों और समन्वयकों को नवीनतम पठन-पाठन तकनीकों, मूल्यांकन विधियों और बच्चों में सीखने की रूचि उत्पन्न करने वाली गतिविधियों की जानकारी दी। कार्यक्रम की अवधि 15 अप्रैल से 24 मई तक निर्धारित की गई है। इसमें नियमित फील्ड विजिट, असेसमेंट, शिक्षकों के साथ फीडबैक सेशन और प्रगति का निरंतर मूल्यांकन किया जाएगा। इसके उपरांत 25 मई को इस पूरे अभियान का समापन मूल्यांकन के साथ होगा, जिसमें अब तक हुए प्रयासों की समीक्षा और आगे की योजना बनाई जाएगी।
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कार्यशाला में ये रहे मुख्य बिंदू
- बच्चों के सीखने के स्तर का नियमित आकलन
- एफएलएन कॉर्नर और निपुण दीवार जैसी अवधारणाओं की स्थापना
- डिजिटल टूल्स जैसे एफएलएन एप का अधिकतम उपयोग
- शिक्षकों का नवाचार को बढ़ावा देना
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कार्यशाला की शुरुआत जिला एफएलएन कोऑर्डिनेटर संदीप कुमार के नेतृत्व में हुई। उन्होंने प्रतिभागियों को एफएलएन की मूल भावना और उसके उद्देश्यों से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि एफएलएन केवल शिक्षण नहीं बल्कि बच्चों के जीवन निर्माण की नींव है। कार्यक्रम में स्टेट टीम से एफएलएन विशेषज्ञ अभिषेक की भी उपस्थिति रही।
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उन्होंने उपस्थित शिक्षकों और समन्वयकों को नवीनतम पठन-पाठन तकनीकों, मूल्यांकन विधियों और बच्चों में सीखने की रूचि उत्पन्न करने वाली गतिविधियों की जानकारी दी। कार्यक्रम की अवधि 15 अप्रैल से 24 मई तक निर्धारित की गई है। इसमें नियमित फील्ड विजिट, असेसमेंट, शिक्षकों के साथ फीडबैक सेशन और प्रगति का निरंतर मूल्यांकन किया जाएगा। इसके उपरांत 25 मई को इस पूरे अभियान का समापन मूल्यांकन के साथ होगा, जिसमें अब तक हुए प्रयासों की समीक्षा और आगे की योजना बनाई जाएगी।
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कार्यशाला में ये रहे मुख्य बिंदू
- बच्चों के सीखने के स्तर का नियमित आकलन
- एफएलएन कॉर्नर और निपुण दीवार जैसी अवधारणाओं की स्थापना
- डिजिटल टूल्स जैसे एफएलएन एप का अधिकतम उपयोग
- शिक्षकों का नवाचार को बढ़ावा देना