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Charkhi Dadri News: मुआवजे की मांग के लिए किसानों का धरना जारी
Sat, 21 Feb 2026 01:31 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Sat, 21 Feb 2026 01:31 AM IST
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बाढड़ा। बाढड़ा के जुई रोड स्थित अनाज मंडी में मुआवजा की मांग के लिए किसानों का धरना शुक्रवार को भी जारी रहा। किसानों ने वर्ष 2023 रबी व खरीफ सीजन के बकाया मुआवजे की मांग के लिए 218वें दिन धरना दिया। किसानों ने जल्द सुनवाई नहीं करने पर बड़ा आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी है।
किसान नेता सतप्रकाश व धर्मपाल ने धरने की अध्यक्षता की। सतप्रकाश ने कहा कि कृषि क्षेत्र को विदेशी कंपनियों के हाथों गिरवी रखने का काम किया जा रहा है जो भारत जैसे कृषि निर्भर देश के भविष्य के लिए शुभ संकेत नहीं है। अमेरिका जैसे देशों को भारत की कृषि व्यापार का मालिक बनाना न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने कहा कि किसानों के हक व बाढड़ा के आत्म स्वाभिमान की रक्षा के लिए संघर्ष को कमजोर नहीं होने दिया जाएगा।
किसान नेता धर्मपाल ने कहा कि किसान को खाद, बीज, फसल बिक्री या मुआवजे के लिए धरना- प्रदर्शन करना पड़ रहा है। पूंजीपतियों के करोड़ों रुपये एक कलम से माफ कर दिए जाते हैं। उन्होंने कहा कि किसान अपने हितों के लिए सड़कों पर आंदोलन करने को मजबूर है।
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अन्नदाता अपने हक के लिए अंतिम सांस तक लड़ऩे के लिए तैयार है। वक्ताओं ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुनी हुई सरकारें जब कर्तव्य पथ से भटक जाती हैं तो किसान, नौजवान, कर्मचारी व्यापारी को अपने हकों के लिए सड़कों पर उतरना पड़ता है। आज कृषि व्यवस्था पर काॅरपोरेट घरानों का वर्चस्व बढ़ रहा है।
इस मौके पर राजकुमार हड़ौदी, रघबीर काकड़ौली, भूप सिंह दलाल, नरेश कादयान, ब्रह्मपाल बाढड़ा, नसीब सिंह कारीमोद, कामरेड रामपाल धारणी, जयबीर लुहाच आदि मौजूद रहे।
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किसान नेता सतप्रकाश व धर्मपाल ने धरने की अध्यक्षता की। सतप्रकाश ने कहा कि कृषि क्षेत्र को विदेशी कंपनियों के हाथों गिरवी रखने का काम किया जा रहा है जो भारत जैसे कृषि निर्भर देश के भविष्य के लिए शुभ संकेत नहीं है। अमेरिका जैसे देशों को भारत की कृषि व्यापार का मालिक बनाना न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने कहा कि किसानों के हक व बाढड़ा के आत्म स्वाभिमान की रक्षा के लिए संघर्ष को कमजोर नहीं होने दिया जाएगा।
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किसान नेता धर्मपाल ने कहा कि किसान को खाद, बीज, फसल बिक्री या मुआवजे के लिए धरना- प्रदर्शन करना पड़ रहा है। पूंजीपतियों के करोड़ों रुपये एक कलम से माफ कर दिए जाते हैं। उन्होंने कहा कि किसान अपने हितों के लिए सड़कों पर आंदोलन करने को मजबूर है।
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अन्नदाता अपने हक के लिए अंतिम सांस तक लड़ऩे के लिए तैयार है। वक्ताओं ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुनी हुई सरकारें जब कर्तव्य पथ से भटक जाती हैं तो किसान, नौजवान, कर्मचारी व्यापारी को अपने हकों के लिए सड़कों पर उतरना पड़ता है। आज कृषि व्यवस्था पर काॅरपोरेट घरानों का वर्चस्व बढ़ रहा है।
इस मौके पर राजकुमार हड़ौदी, रघबीर काकड़ौली, भूप सिंह दलाल, नरेश कादयान, ब्रह्मपाल बाढड़ा, नसीब सिंह कारीमोद, कामरेड रामपाल धारणी, जयबीर लुहाच आदि मौजूद रहे।