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Charkhi Dadri News: 80 प्रतिशत किसानों को सरसों की करनी पड़ी दो से तीन बिजाई

Tue, 12 Nov 2024 02:39 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी Updated Tue, 12 Nov 2024 02:39 AM IST
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Farmers had to get mustard two to three bijai
चरखी दादरी। ज्यादा तापमान की वजह से 80 प्रतिशत किसानों को प्रमुख नकदी सरसों की दोबारा बिजाई करनी पड़ गई। सरसों के लिए अधिकतम तापमान 28-30 के बीच डिग्री चाहिए जबकि इस समय 33 डिग्री बना हुआ है।
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ज्यादा तापमान से ताजा अंकुरित पौधे नष्ट हो गए। इससे किसानों को अतिरिक्त लागत खर्च झेलना पड़ा है। जिले में सबसे ज्यादा बिजाई का क्षेत्र सरसाें का ही होता है। हर साल औसतन 55,000 हेक्टेयर क्षेत्र में सरसों की बिजाई होती है।
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जलवायु परिवर्तन की वजह से खेती की समयसारिणी भी गड़बड़ हो गई है। बिजाई व पकाव के समय में करीब 25 दिन का अंतर आ गया है। आने वाले समय में हालात और विकट हो सकते हैं। सरसों खासकर दक्षिणी हरियाणा की प्रमुख नकदी फसल मानी जाती है।
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आजकल किसान गेहूं की अपेक्षा सरसों की ज्यादा क्षेत्र में बिजाई करते हैं। गेहूं पर लागत खर्च ज्यादा आता है। इसमें सिंचाई की भी ज्यादा जरूरत नहीं होती है। सरसों में एक सिंचाई से भी काम चल जाता है। लावारिस पशुओं से भी सरसों के खेत की रखवाली करने की जरूरत नहीं होती है जबकि गेहूं की दिन-रात रखवाली करनी पड़ती है, तब जाकर फसल तैयार हो पाती है।

पिछले कुछ सालों से मौसम में आ रहे बदलाव की वजह से फसल चक्र भी प्रभावित हो रहा है। आज से एक दशक पहले जो फसल अक्तूबर में बोई जाती थी। वह नवंबर में बोई जाने लगी है। कारण यह कि इस अवधि में तापमान संतुलित नहीं होता है। यही वजह है कि इस बार रबी सीजन में किसानों ने 20 अक्तूबर के बाद सरसों की बिजाई शुरू कर दी थी। जैसे बीज अंकुरित हुआ छोटे पौधे ज्यादा तापमान में झुलसने से नष्ट हो गए। ऐसे में किसानों को दोबारा से बिजाई करनी पड़ी है।
- किसान बोले : बार-बार बिजाई करने से बढ़ रहा लागत खर्च
किसान सुंदर फोगाट, बल्लूराम, चंद्र सिंह, रामबीर, चांद सिंह व धर्मबीर सिंह ने बताया कि उन्होंने अक्तूबर के अंतिम सप्ताह मेें सरसों की बिजाई की थी जो ज्यादा तापमान की वजह से नष्ट हो गई। अब उन्हें दोबारा बिजाई करनी पड़ी है। इससे लागत खर्च और बढ़ गया। इनका कहना है कि ज्यादा तापमान की वजह से ताजा अंकुरित पौधे नष्ट हो गए। उन्होंने बताया कि बरानी क्षेत्र में सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। नहरों के आसपास तराई क्षेत्र में थोड़ा बचाव रह गया। उन्होंने बताया कि कई किसानों को तो तीसरी बार बिजाई करनी पड़ी है।





यह सब जलवायु परिवर्तन की वजह से है। किसान कृषि विशेषज्ञों से सलाह लेकर बिजाई करें। बिजाई से पूर्व तापमान का विशेष ध्यान रखें। सरसों की बिजाई के लिए तापमान 30 डिग्री से नीचे होना चाहिए।

-कृष्ण कुमार, एसडीओ, कृषि विभाग, चरखी दादरी।
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