फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Charkhi Dadri News ›   Farmers are alert against white rust disease in mustard at this time

Charkhi Dadri News: सरसों में इस समय सफेद रतवा रोग के प्रति सतर्क रहे किसान

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 15 Jan 2023 11:54 PM IST
विज्ञापन
Farmers are alert against white rust disease in mustard at this time
चरखी दादरी के खेतों में खड़ी सरसों की फसल। - फोटो : CharkhiDadri
चरखी दादरी। किसानों को ठंड के मौसम में सरसों की फसल में व्हाइट ट्रस्ट (सफेद रतवा) रोग के प्रति सतर्क रहने की जरूरत है। इस समय सरसों की फसल पकाने की अवस्था में है। प्रथम चरण में ही इस रोग का उपचार कारगर माना गया है। अगर पौधा दूसरी और तीसरी स्टेज में पहुंच गया तो रोगग्रस्त पौधे को उखाड़कर मिट्टी में ही दबाना पड़ता है।
विज्ञापन

किसानों ने अक्तूबर नवंबर माह में सरसों की अगेती बिजाई कर दी थी। अगेती बीजी गई सरसों के पौधे पर अब फली आने लगी है। इसके लिए साथ ही किसानों को फसल पर रोग लगने की भी चिंता सताने लगी है। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार मौसम एवं तापमान असंतुलित बने रहने पर सरसों की फसल में रोग लगने की आशंका ज्यादा होती हैं। सरसों में व्हाइट ट्रस्ट यानी सफेद रतवा रोग बढ़ जाता है। इस रोग में प्रथम स्टेज के दौरान अगर पत्तियों पर सफेेद रंग का चूर्ण बना दिखाई देता है तो कीटनाशक का स्प्रे कर देना चाहिए। इससे ही इसका बचाव संभव है। दूसरी स्टेज में यह रोग पौधे के तने तक पहुंच जाता है ौर तीसरी स्टेज में पौधे का पूरी तरह से विकास एवं वृद्धि रुक जाती है। ऐसी स्थिति में रोगग्रस्त पौधों को जड़ से उखाड़कर मिट्टी में दबा देना चाहिए। प्रथम स्टेज में दवा के तौर पर कॉरबिंडाजिम, एंडोफिल कीटनाशक दवा का छिड़काव किया जा सकता है। 200 एमएल दवा 400 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव किया जा सकता है।
विज्ञापन

एफिड रोग का भी खतरा
इसी प्रकार इस मौसम में एफिड यानी चेपा की शिकायत भी सरसों में बढ़ रही है। इसमें हरे रंग का जीव पौधे के पत्तों एवं फलियों पर बैठकर नुकसान पहुंचाता है। कीड़ा पत्तों में छेद कर देता है और पत्तियों के रस को खत्म कर देता है। इस कीड़े से बचाव के लिए रोगोर दवा का छिड़काव किया जा सकता है। कृषि वैज्ञानिकों की किसानों को सलाह है कि जब भी आसमान में बादल छाए हो फसलों में स्प्रे आदि न करें। पछेती फसलों में यह रोग ज्यादा लगने की संभावना होती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

किसान रामौतार, धारे सिंह, सुरेंद्र आदि का कहना है कि प्रदेश में सरसों का रकबा बढ़ रहा है। पिछले दो साल से सरसों के भाव बढ़िया मिल रहा है। इस वजह से किसानों का रुझान इस फसल के प्रति काफी बढ़ा है। इस फसल में एक ही सिंचाई से पूर्ति हो जाती है। पानी की खपत ज्यादा खपत नहीं होती है। लागत खर्च भी इतना नहीं आता है ऐसे में सरसों का रकबा गेहूं की अपेक्षा बढ़ा है। इस फसल की रखवाली भी नहीं करनी पड़ती है। जबकि गेहूं की फसल रात के समय बेसहारा पशुओं से रखवाली भी करनी पड़ती है। सरसों अब किसानों के लिए फायदेमंद साबित हो रही है।

वर्जन
किसान सरसों की पत्तियां, फलियां व टहनी आदि की अच्छी तरह से परख करें। रोग की शिकायत होने पर विशेषज्ञों की सलाह से दवा का छिड़काव करें। कृषि अधिकारियों से सलाह लेते रहे। अब फसल पकाव की अवस्था में है ऐसे में इसकी नियमित निगरानी रखना जरूरी हो गया है।
-डॉ. जितेंद्र सिंह, कृषि विशेषज्ञ
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed