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Charkhi Dadri News: सारे अधिकारियां धोरै जा आए, पाणी खातर फैर बी हांडा सा भांडे ठाए
Thu, 03 Oct 2024 05:38 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Thu, 03 Oct 2024 05:38 AM IST
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रबिन वर्मा
चरखी दादरी। जिला मुख्यालय से 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित बलकरा गांव में 10 साल बाद भी पेयजल संकट बरकरार है। आलम यह है कि ग्रामीण चंडीगढ़ तक की भागदौड़ कर चुके हैं, लेकिन नतीजा सिफर है।
फिलहाल ग्रामीण अपने स्तर पर ही पानी का प्रबंध करने को विवश हैं। चुनावी माहौल में ग्रामीण अपनी टीस खुलकर बयां कर रहे हैं। हरियाणवी लहजे में ग्रामीणों ने कहा कि- हाम तो सारै अधिकारियां धौरे जा आए, पाणी खातर फैर भी भांडे ठाए हांडा सै।
दरअसल चार हजार की आबादी वाले बलकरा गांव में पीने के पानी किल्लत लंबे समय से मची हुई है। ग्रामीण समस्या के समाधान के लिए अधिकारियों से कई बार गुहार लगा चुके हैं। ग्रामीण पवन, संदीप, सुनील, जगदीप, सुखबीर, उदल, सोनू व नवरत्न ने बताया कि ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध करवाने के लिए गांव में दो करोड़ के बजट से चार एकड़ जमीन पर जलघर का निर्माण किया गया था। इसमें नहरी पानी का कनेक्शन ही नहीं हो पाया है और बिना देखभाल के जलघर भी जर्जर हो चुका है।
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ग्रामीणों ने कहा कि फिलहाल वो गांव के कुओं से पीने का पानी सिर पर ढोने को विवश हैं। अब कुएं के पानी की गुणवत्ता भी अच्छी नहीं रही। ऐसे में अब यह विकल्प भी सहारा नहीं रहा। वहीं, पेयजल समस्या का अब तक समाधान न होने से ग्रामीणों में रोष है। ग्रामीणों ने बताया कि गांव में भी जो प्रत्याशी आता है उसके सामने सबसे पहले यह सामूहिक समस्या रखी जाती है। संवाद
अधिकारियों से मिला कोरा आश्वासन, हालात जस के तस
ग्रामीण उदल, सुखबीर व सोनू ने बताया कि दस साल से दादरी और चंडीगढ़ के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन समस्याओं का अभी तक समाधान नहीं हुआ है। अधिकारियों से केवल आश्वासन मिला है जबकि जनप्रतिनिधि भी समस्या से निजात नहीं दिला पाया। इस चुनाव में प्रत्याशी का चुनाव सोच-समझकर व परखकर करेंगे।
बलकरा गांव में ये भी हैं समस्याएं
- गांव की फिरनी कच्ची है।
- गलियों का पुनर्निर्माण नहीं हुआ।
- गांव के प्रमुख तथ्य
आबादी - 4,000
मतदाता- 2,150
महिला मतदाता - 1,024
पुरुष मतदाता - 1,126
साक्षरता - 80 फीसदी
ग्रामीण बोले: पेयजल संकट सबसे बड़ा मुद्दा
गांव में पेयजल समस्या सबसे बड़ा मुद्दा है। इसके लिए ग्रामीण अपने तौर पर प्रयास कर चुके हैं, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ है।
प्रदीप शर्मा, ग्रामीण
गांव की गलियां भी कंडम हो चुकी हैं और इनके पुनर्निर्माण की आवश्यकता है। जर्जर गलियों से आवागमन में ग्रामीणों को समस्या आ रही है।
उदय सिंह, नंबरदार
गांव को दूसरे गांवों से जोड़ने वाली फिरनियां कच्ची पड़ी हैं। बरसात के समय इनमें पानी भरने से समस्या का सामना करन पड़ता है।
मनीष कुमार, ग्रामीण
पंचायत की ओर से गांव सुविधाएं कराने के लिए पूरा प्रयास है। लेकिन पिछले दस साल से पंचायत पानी के लिए अधिकारियों को लिखित पत्र देकर थक चुकी है और अब भी गांव की स्थिति दस साल पहले जैसी है। शिव कुमार, सरपंच प्रतिनिधि, बलकरा
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चरखी दादरी। जिला मुख्यालय से 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित बलकरा गांव में 10 साल बाद भी पेयजल संकट बरकरार है। आलम यह है कि ग्रामीण चंडीगढ़ तक की भागदौड़ कर चुके हैं, लेकिन नतीजा सिफर है।
फिलहाल ग्रामीण अपने स्तर पर ही पानी का प्रबंध करने को विवश हैं। चुनावी माहौल में ग्रामीण अपनी टीस खुलकर बयां कर रहे हैं। हरियाणवी लहजे में ग्रामीणों ने कहा कि- हाम तो सारै अधिकारियां धौरे जा आए, पाणी खातर फैर भी भांडे ठाए हांडा सै।
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दरअसल चार हजार की आबादी वाले बलकरा गांव में पीने के पानी किल्लत लंबे समय से मची हुई है। ग्रामीण समस्या के समाधान के लिए अधिकारियों से कई बार गुहार लगा चुके हैं। ग्रामीण पवन, संदीप, सुनील, जगदीप, सुखबीर, उदल, सोनू व नवरत्न ने बताया कि ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध करवाने के लिए गांव में दो करोड़ के बजट से चार एकड़ जमीन पर जलघर का निर्माण किया गया था। इसमें नहरी पानी का कनेक्शन ही नहीं हो पाया है और बिना देखभाल के जलघर भी जर्जर हो चुका है।
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ग्रामीणों ने कहा कि फिलहाल वो गांव के कुओं से पीने का पानी सिर पर ढोने को विवश हैं। अब कुएं के पानी की गुणवत्ता भी अच्छी नहीं रही। ऐसे में अब यह विकल्प भी सहारा नहीं रहा। वहीं, पेयजल समस्या का अब तक समाधान न होने से ग्रामीणों में रोष है। ग्रामीणों ने बताया कि गांव में भी जो प्रत्याशी आता है उसके सामने सबसे पहले यह सामूहिक समस्या रखी जाती है। संवाद
अधिकारियों से मिला कोरा आश्वासन, हालात जस के तस
ग्रामीण उदल, सुखबीर व सोनू ने बताया कि दस साल से दादरी और चंडीगढ़ के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन समस्याओं का अभी तक समाधान नहीं हुआ है। अधिकारियों से केवल आश्वासन मिला है जबकि जनप्रतिनिधि भी समस्या से निजात नहीं दिला पाया। इस चुनाव में प्रत्याशी का चुनाव सोच-समझकर व परखकर करेंगे।
बलकरा गांव में ये भी हैं समस्याएं
- गांव की फिरनी कच्ची है।
- गलियों का पुनर्निर्माण नहीं हुआ।
- गांव के प्रमुख तथ्य
आबादी - 4,000
मतदाता- 2,150
महिला मतदाता - 1,024
पुरुष मतदाता - 1,126
साक्षरता - 80 फीसदी
ग्रामीण बोले: पेयजल संकट सबसे बड़ा मुद्दा
गांव में पेयजल समस्या सबसे बड़ा मुद्दा है। इसके लिए ग्रामीण अपने तौर पर प्रयास कर चुके हैं, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ है।
प्रदीप शर्मा, ग्रामीण
गांव की गलियां भी कंडम हो चुकी हैं और इनके पुनर्निर्माण की आवश्यकता है। जर्जर गलियों से आवागमन में ग्रामीणों को समस्या आ रही है।
उदय सिंह, नंबरदार
गांव को दूसरे गांवों से जोड़ने वाली फिरनियां कच्ची पड़ी हैं। बरसात के समय इनमें पानी भरने से समस्या का सामना करन पड़ता है।
मनीष कुमार, ग्रामीण
पंचायत की ओर से गांव सुविधाएं कराने के लिए पूरा प्रयास है। लेकिन पिछले दस साल से पंचायत पानी के लिए अधिकारियों को लिखित पत्र देकर थक चुकी है और अब भी गांव की स्थिति दस साल पहले जैसी है। शिव कुमार, सरपंच प्रतिनिधि, बलकरा