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Charkhi Dadri News: जलसंरक्षण के लिए जागरूक करेगा विभाग, 28 प्रशिक्षण शिविर किए जाएंगे आयोजित
Sun, 11 Feb 2024 10:58 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Sun, 11 Feb 2024 10:58 PM IST
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गांव जेवली में लगा जीपीएस मैप कैमरा दिखाते हुए विभाग कर्मचारी। स्रोत: विभाग
संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। जल शक्ति विभाग ने गिरते भूजल स्तर के लिए अब ग्राम पंचायत लेवल क्षमता संवर्धन प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया है। इसके तहत वर्ष में 28 प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए जाएंगे। इनमें किसानों को जल संबंधी छह मॉड्यूल की जानकारी दी जाएगी। विभाग का प्रयास है कि गांव स्तर पर जागरूकता लाकर भूजल के स्तर में सुधार किया जा सके। इसके तहत विभाग एक गांव में छह शिविर आयोजित करेगा।
बता दें कि विभाग ने जिला के 34 गांवों में बिल बोर्ड, सन बोर्ड, पीजियो गेट मीटर व वाटर लेवल इंडिगेटर लगा दिए हैं। 47 गांवों में बिल बोर्ड व सन बोर्ड लगाए हैं, ताकि गांव के जलस्तर का डाटा किसान को मिलता रहे। जिले में गिरता भू-जल स्तर चिंता का विषय है। बाढड़ा ब्लॉक के 47 गांवों में वाटर लेवल काफी नीचे बना हुआ है। जिससे आने वाले डेढ़ दशक में पेयजल व सिंचाई का संकट गहराने के आसार बनने लगे हैं। जल शक्ति विभाग ने अपने स्तर पर प्रयास शुरू कर रखे हैंं। अब इसमें किसान को शामिल किया गया है। इस योजना के तहत विभाग ने युवा मित्रा एनजीओ के सहयोग से यह मुहिम शुरू की है। एक प्रशिक्षण शिविर में 25 से 40 प्रतिभागी शामिल किए जाएंगे। शिविर का समय तीन घंटे रखा गया है। प्रोजेक्टर के माध्यम से किसानों को बिल बोर्ड, सन बोर्ड, पीजियो मीटर, रेन गेज मीटर, वाटर लेवल संकेतक की जानकारी दी जाएगी। बिल बोर्ड में गांव के जलस्तर की पूरी सूचनाएं अंकित हैं और सन बोर्ड में जल का डाटा है। जिरे के बाढड़ा क्षेत्र में जलस्तर की भयावह स्थिति बनी हुई है। यहां जलस्तर 400 फीट नीचे तक है। किसान को दो बिजली मोटर लगाकर पानी का उठान करना पड़ता है, तब जाकर सिंचाई हो पाती है। अब किसानों को सोलर सिस्टम की मदद से मोटर के जरिये पानी का उठान करना पड़ रहा है। जिलेे के 36 गांव ऐसे हैं जिनमें जलस्तर डार्क श्रेणी में बना हुआ है। इन गांवों के लिए विभाग अलग से योजना पर काम कर रहा है ताकि जैसे-जैसे जलस्तर को बरकरार रखा जा सके। इसके लिए वाटर रिचार्ज सिस्टम भी बना रखे हैं।
विभाग साल में अब 282 प्रशिक्षण शिविर लगाए जाएंगे। विभाग अब इस योजना में किसान को भी जोड़ रहा है। किसान को भी जल स्तर का समय-समय पर डाटा उपलब्ध करवाया जा रहा है, ताकि वह सचेत रहे और जल संरक्षण की दिशा में काम करता रहे। किसान को अब जागरूक होने की जरूरत है। - खुर्शीद अहमद, भूजल विशेषज्ञ
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चरखी दादरी। जल शक्ति विभाग ने गिरते भूजल स्तर के लिए अब ग्राम पंचायत लेवल क्षमता संवर्धन प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया है। इसके तहत वर्ष में 28 प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए जाएंगे। इनमें किसानों को जल संबंधी छह मॉड्यूल की जानकारी दी जाएगी। विभाग का प्रयास है कि गांव स्तर पर जागरूकता लाकर भूजल के स्तर में सुधार किया जा सके। इसके तहत विभाग एक गांव में छह शिविर आयोजित करेगा।
बता दें कि विभाग ने जिला के 34 गांवों में बिल बोर्ड, सन बोर्ड, पीजियो गेट मीटर व वाटर लेवल इंडिगेटर लगा दिए हैं। 47 गांवों में बिल बोर्ड व सन बोर्ड लगाए हैं, ताकि गांव के जलस्तर का डाटा किसान को मिलता रहे। जिले में गिरता भू-जल स्तर चिंता का विषय है। बाढड़ा ब्लॉक के 47 गांवों में वाटर लेवल काफी नीचे बना हुआ है। जिससे आने वाले डेढ़ दशक में पेयजल व सिंचाई का संकट गहराने के आसार बनने लगे हैं। जल शक्ति विभाग ने अपने स्तर पर प्रयास शुरू कर रखे हैंं। अब इसमें किसान को शामिल किया गया है। इस योजना के तहत विभाग ने युवा मित्रा एनजीओ के सहयोग से यह मुहिम शुरू की है। एक प्रशिक्षण शिविर में 25 से 40 प्रतिभागी शामिल किए जाएंगे। शिविर का समय तीन घंटे रखा गया है। प्रोजेक्टर के माध्यम से किसानों को बिल बोर्ड, सन बोर्ड, पीजियो मीटर, रेन गेज मीटर, वाटर लेवल संकेतक की जानकारी दी जाएगी। बिल बोर्ड में गांव के जलस्तर की पूरी सूचनाएं अंकित हैं और सन बोर्ड में जल का डाटा है। जिरे के बाढड़ा क्षेत्र में जलस्तर की भयावह स्थिति बनी हुई है। यहां जलस्तर 400 फीट नीचे तक है। किसान को दो बिजली मोटर लगाकर पानी का उठान करना पड़ता है, तब जाकर सिंचाई हो पाती है। अब किसानों को सोलर सिस्टम की मदद से मोटर के जरिये पानी का उठान करना पड़ रहा है। जिलेे के 36 गांव ऐसे हैं जिनमें जलस्तर डार्क श्रेणी में बना हुआ है। इन गांवों के लिए विभाग अलग से योजना पर काम कर रहा है ताकि जैसे-जैसे जलस्तर को बरकरार रखा जा सके। इसके लिए वाटर रिचार्ज सिस्टम भी बना रखे हैं।
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विभाग साल में अब 282 प्रशिक्षण शिविर लगाए जाएंगे। विभाग अब इस योजना में किसान को भी जोड़ रहा है। किसान को भी जल स्तर का समय-समय पर डाटा उपलब्ध करवाया जा रहा है, ताकि वह सचेत रहे और जल संरक्षण की दिशा में काम करता रहे। किसान को अब जागरूक होने की जरूरत है। - खुर्शीद अहमद, भूजल विशेषज्ञ
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