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नौकरी से हटाने के विरोध में कोविड स्टाफ ने शुरू किया अनिश्चिकालीन धरना
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सिविल अस्पताल में धरना देते हुए हटाया गया कोविड स्टाफ।
- फोटो : CharkhiDadri
चरखी दादरी। नौकरी से हटाने के विरोध में कोविड स्टाफ ने शनिवार से सिविल अस्पताल में अनिश्चिकालीन धरना शुरू कर दिया है। धरनारत कर्मचारियों का कहना है कि सरकार को तुरंत प्रभाव से उन्हें बहाल करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब तक मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक धरना जारी रहेगा।
धरने की अध्यक्षता सर्व कर्मचारी संघ के जिला प्रधान राजकुमार घिकाड़ा व किसान सभा के जिला प्रधान रणधीर कुंगड़ ने संयुक्त रूप से की। सरकारी नौकरी से निकाले गए कोविड स्टाफ की जिला प्रधान मनीषा ने कहा कि गठबंधन सरकार ने कोरोना योद्धाओं को हटाकर अपनी कर्मचारी विरोधी होने का प्रमाण दिया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश भर में हटाए गए 2200 कोविड कर्मचारियों का शनिवार से जिला मुख्यालयों पर धरना शुरू हो गया है। उन्होंने कहा कि जब तक उनकी बहाली नहीं हो जाती तब तक धरना प्रदर्शन चलते रहेंगे।
चौधरी सुरेंद्र सिंह संगठन के संयोजक कृष्ण फौगाट ने धरनास्थल पर पहुंचकर कोरोना योद्धाओं को अपना समर्थन दिया। उन्होंने कहा कि सरकार प्राइवेट अस्पतालों को बढ़ावा देने पर उतारू है। पहले से ही अस्पतालों में डॉक्टरों की भारी कमी के कारण मरीजों को सही और समय पर इलाज नहीं मिल रहा। अब स्टाफ को हटाकर सरकार कैसे स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाएगी, ये एक विचारणीय प्रश्न है। इस मौके पर कैशियर संजय, मोनिका, प्रदीप व नरेश पहलवान आदि उपस्थित रहे।
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जिले से हटाए गए 36 कर्मचारी
स्वास्थ्य विभाग ने जो 36 कर्मचारी हटाए हैं उनमें छह एलटी हैं। इसके अलावा 10 स्वीपर, पांच वार्ड सर्वेंट, तीन फार्मासिस्ट, पांच चालक और सात नर्स शामिल हैं। इन कर्मचारियों को हटाने से कोविड जांच लैब के अलावा मरीजों की केयर और स्वास्थ्य विभाग की गाड़ियों को चलाने में दिक्कतें आ रही हैं।
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धरने की अध्यक्षता सर्व कर्मचारी संघ के जिला प्रधान राजकुमार घिकाड़ा व किसान सभा के जिला प्रधान रणधीर कुंगड़ ने संयुक्त रूप से की। सरकारी नौकरी से निकाले गए कोविड स्टाफ की जिला प्रधान मनीषा ने कहा कि गठबंधन सरकार ने कोरोना योद्धाओं को हटाकर अपनी कर्मचारी विरोधी होने का प्रमाण दिया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश भर में हटाए गए 2200 कोविड कर्मचारियों का शनिवार से जिला मुख्यालयों पर धरना शुरू हो गया है। उन्होंने कहा कि जब तक उनकी बहाली नहीं हो जाती तब तक धरना प्रदर्शन चलते रहेंगे।
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चौधरी सुरेंद्र सिंह संगठन के संयोजक कृष्ण फौगाट ने धरनास्थल पर पहुंचकर कोरोना योद्धाओं को अपना समर्थन दिया। उन्होंने कहा कि सरकार प्राइवेट अस्पतालों को बढ़ावा देने पर उतारू है। पहले से ही अस्पतालों में डॉक्टरों की भारी कमी के कारण मरीजों को सही और समय पर इलाज नहीं मिल रहा। अब स्टाफ को हटाकर सरकार कैसे स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाएगी, ये एक विचारणीय प्रश्न है। इस मौके पर कैशियर संजय, मोनिका, प्रदीप व नरेश पहलवान आदि उपस्थित रहे।
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जिले से हटाए गए 36 कर्मचारी
स्वास्थ्य विभाग ने जो 36 कर्मचारी हटाए हैं उनमें छह एलटी हैं। इसके अलावा 10 स्वीपर, पांच वार्ड सर्वेंट, तीन फार्मासिस्ट, पांच चालक और सात नर्स शामिल हैं। इन कर्मचारियों को हटाने से कोविड जांच लैब के अलावा मरीजों की केयर और स्वास्थ्य विभाग की गाड़ियों को चलाने में दिक्कतें आ रही हैं।