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Charkhi Dadri News: वार्षिक बजट तय करने के लिए शहरी सरकार की बैठक 46 साल में पहली बार स्थगित

Mon, 27 Mar 2023 11:45 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी Updated Mon, 27 Mar 2023 11:45 PM IST
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City government meeting to decide annual budget postponed for the first time in 46 years
बैठक का बहिष्कार करने वाले पार्षद
चरखी दादरी। वार्षिक बजट तय करने के लिए शहरी सरकार की बैठक 46 साल में पहली बार स्थगित हुई है। सोमवार को बुलाई गई बैठक से 12 पार्षदों के किनारा करने से यह इतिहास बना। दूसरी ओर बैठक से दूरी बनाने वाले पार्षदों ने वार्षिक बजट एजेंडे में भ्रष्टाचार की बू आने की बात कही और सीधे तौर पर इसके लिए चेयरमैन बक्शीराम सैनी को जिम्मेदार ठहराया। अब यह बैठक 29 मार्च को दोबारा होगी। दूसरी ओर पार्षदों ने चेतावनी दी है कि नगर परिषद की ओर से जो भी विकास कार्य करवाए जाएंगे उनकी विजिलेंस जांच करवाएंगे।
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दरअसल, नगर परिषद की वार्षिक आय और वार्षिक खर्च का आकलन कर एजेंडे को सदन में रखा जाता है और इसके लिए बैठक बुलाई जाती है। इस साल वार्षिक बजट तय करने के लिए बैठक सोमवार को बुलाई गई। बैठक के एजेंडे के अनुसार एक मार्च 2023 तक नगर परिषद के पास 8,61,35,809 रुपये का शेष है। वर्ष 2023-24 में 30 करोड़ 41 लाख की आय होने की उम्मीद है और इसके बाद नगर परिषद के पास 39 करोड़ दो लाख रुपये होंगे। वर्ष 2023-24 का अनुमानित खर्च 29 करोड़ 14 लाख रुपये दर्शाया गया है।
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इस एजेंडे के साथ खर्च के ब्योरा की कॉपी भी सभी 21 पार्षदों और चेयरमैन के पास अधिकारियों की ओर से भेजी गई। खर्च का ब्योरा देखकर 12 पार्षद भड़क उठे और उन्होंने बैठक का बहिष्कार कर डाला। चेयरमैन बक्शीराम सैनी के अनुसार बैठक में 9 पार्षद ही पहुंचे और इसके चलते कोरम पूरा नहीं हो पाया। उन्होंने बताया कि 48 घंटे बाद दोबारा बैठक होगी और उसमें कोरम पूरा करने के लिए आठ पार्षद उपस्थित रहना जरूरी है। उन्होंने पार्षदों द्वारा लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए कहा कि शहरी विकास में अड़चन डालने के मंसूबे से कुछ पार्षद ऐसा कर रहे हैं।
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- 1987 में चुना गया था चेयरमैन
नगर परिषद कार्यालय में मौजूद इन्कंबेंसी बोर्ड की बात करे तो 1987 में दादरी नगर पालिका थी और उस दौरान चौधरी श्योराम श्योराण को पहला प्रधान चुना गया था। उसके बाद से शहरी विकास के लिए बैठक में पार्षदों से रायशुमारी की जाती है।
- इन पार्षदों ने बैठक से बनाई दूरी
वार्ड- 1 से पार्षद जय सिंह लांबा, वार्ड-2 से मुनेश दहिया, वार्ड-3 से बबीता, वार्ड-6 से नवीन बिंदल, वार्ड-8 से नवीन, वार्ड-9 से विनोद सिंहमार, वार्ड-10 से मनोज वर्मा, वार्ड-14 सतबीर चौहान, वार्ड-17 से सुधीर स्वामी, वार्ड-19 से अजय, वार्ड-20 से रचना देवी, वार्ड-21 से मंजू पहल ने बैठक का बहिष्कार किया।
- प्रेसवार्ता में विरोधी खेमे ने खर्चे के इन मदों पर उठाए सवाल
- सार्वजनिक शौचालयों के रखरखाव और मरम्मत पर साल में 27 लाख खर्च करना।
- नगर परिषद के वाहनों की मरम्मत और डीजल पर सालाना 50 लाख रुपये खर्च करना।
- नगर परिषद कार्यालय के मरम्मत कार्य पर 40 लाख का बजट खर्च करना।
- आउटसोर्सिंग कर्मचारी की तनख्वाह और अन्य मदों के रुपये में 1.8 करोड़ खर्च करना।
- एक करोड़ से शहर में पार्क का निर्माण करना।
- 30 लाख खर्च कर एक साल तक सभी पार्कों का रख-रखाव करना।
- सवाल उठाने के बताए ये कारण
- इस समय सभी सार्वजनिक शौचालय बदहाल हैं जबकि इनके रख-रखाव का पिछले साल भी टेंडर था।
- अब कचरा उठान का कार्य एजेंसी करेगी और वाहन भी उसके होंगे तो 50 लाख की डीजल कहां डलवाएंगे।
- नगर परिषद के नए कार्यालय बनाने की योजना है तो फिर पुराने भवन की मरम्मत पर 40 लाख खर्च क्यों करेंगे।
- नगर परिषद के सभी आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को मिलाकर भी साल की तनख्वाह 1.8 करोड़ नहीं बनेगी।
- शहर के पहले ही दोनों बड़े और मिनी पार्क बदहाल हैं जबकि भ्रष्टाचार के लिए नए पार्क की योजना तैयार की है।
- पिछले साल भी पार्कों का रखरखाव एजेंसी के पास था, लेकिन कोई देखरेख नहीं की गई। ऐसे में 30 लाख खराब क्यों करे।
- आठ माह से नहीं हुआ विकास, हिंदी में एजेंडा भेजने की मांग
बैठक से दूरी बनाकर प्रेसवार्ता करने वाले पार्षदों ने बताया कि पिछले आठ माह से शहर में कोई विकास नहीं हुआ है। लोग बेहद परेशान हैं। मरम्मत कार्य भी चुनिंदा वार्डों में हुए हैं। साथ ही पार्षदों ने मांग करते हुए कहा कि प्रस्तावित खर्च का जो एजेंडा उन्हें अंग्रेजी में भेजा गया है, उसे अगली बार हिंदी में भेजा जाए।


आरोप पूरी तरह से बेबुनियाद है। कोरम पूरा न होने पर बैठक स्थगित कर दी और अब अगली बैठक नियमानुसार 48 घंटे बाद 29 मार्च को होगी। इस बैठक में कोरम पूरा करने के लिए आठ ही पार्षद चाहिए। कुछ पार्षद राजनैतिक द्वेष के चलते आरोप लगाकर शहरी विकास में अड़चन डालने का प्रयास कर रहे हैं।
-बक्शीराम सैनी, चेयरमैन, नगर परिषद
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