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Charkhi Dadri News: व्रतियों ने अस्ताचलगामी सूर्य को दिया अर्घ्य
Tue, 28 Oct 2025 01:19 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Tue, 28 Oct 2025 01:19 AM IST
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छठ पर्व के दौरान भगवान सूर्य को अर्ध्य देती महिलाएं। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। भगवान सूर्य की उपासना का छठ पर्व सोमवार को जिले में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। पूर्वांचल जल कल्याण बिहार सेवा संघ की ओर से स्थानीय लाला हरबिलास चौक पर बनाए गए अस्थायी घाट पर मुख्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान पूर्वांचल समाज के लोगों ने अस्थायी घाट में खड़े होकर अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया। कार्यक्रम के दौरान काफी संख्या में महिलाएं, पुरुष व बच्चे मौजूद रहे।
छठ पर्व पर लोगों में खासा उत्साह दिखाई दिया। सूर्य को अर्घ्य देने से पहले लोगों ने छठ मैया और भगवान सूर्य की पूजा-अर्चना की। उसके बाद पूरे श्रद्धा भाव के साथ छठ का पहला अर्घ्य दिया। पूर्वांचल जल कल्याण बिहार सेवा संघ के प्रधान चिंटू ने बताया कि भगवान सूर्य को अर्घ्य देने से यश व आरोग्य की प्राप्ति होती है। उन्होंने बताया कि पर्व के आखिरी दिन मंगलवार सुबह उदय होते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा।
शिक्षिका अर्चना अग्रवाल ने कहा कि आस्था का महापर्व छठ पूजा भगवान सूर्य व छठी मैया की पूजा-अर्चना के साथ हमें प्रकृति से भी जोड़ता है। इससे हम यह सीख सकते हैं कि प्रकृति के संदर्भों की भी पूजा व संरक्षण करना चाहिए। जिनकी वजह से हम पृथ्वी पर सांस ले रहे हैं और सुंदर जीवन व्यतीत कर रहे हैं।
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चरखी दादरी। भगवान सूर्य की उपासना का छठ पर्व सोमवार को जिले में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। पूर्वांचल जल कल्याण बिहार सेवा संघ की ओर से स्थानीय लाला हरबिलास चौक पर बनाए गए अस्थायी घाट पर मुख्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान पूर्वांचल समाज के लोगों ने अस्थायी घाट में खड़े होकर अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया। कार्यक्रम के दौरान काफी संख्या में महिलाएं, पुरुष व बच्चे मौजूद रहे।
छठ पर्व पर लोगों में खासा उत्साह दिखाई दिया। सूर्य को अर्घ्य देने से पहले लोगों ने छठ मैया और भगवान सूर्य की पूजा-अर्चना की। उसके बाद पूरे श्रद्धा भाव के साथ छठ का पहला अर्घ्य दिया। पूर्वांचल जल कल्याण बिहार सेवा संघ के प्रधान चिंटू ने बताया कि भगवान सूर्य को अर्घ्य देने से यश व आरोग्य की प्राप्ति होती है। उन्होंने बताया कि पर्व के आखिरी दिन मंगलवार सुबह उदय होते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा।
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शिक्षिका अर्चना अग्रवाल ने कहा कि आस्था का महापर्व छठ पूजा भगवान सूर्य व छठी मैया की पूजा-अर्चना के साथ हमें प्रकृति से भी जोड़ता है। इससे हम यह सीख सकते हैं कि प्रकृति के संदर्भों की भी पूजा व संरक्षण करना चाहिए। जिनकी वजह से हम पृथ्वी पर सांस ले रहे हैं और सुंदर जीवन व्यतीत कर रहे हैं।
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