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आयुष्मान योजना ः मोतियाबंद के ऑपरेशन अब नहीं होंगे कवर

Thu, 26 Sep 2019 11:54 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Thu, 26 Sep 2019 11:54 PM IST
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Cataract operations will no longer be covered under Ayushman scheme
सिविल अस्पताल में बनाया गया आयुष्मान काउंटर। - फोटो : CharkhiDadri
आयुष्मान योजना के तहत अब पात्रों के मोतियाबिंद के निशुल्क ऑपरेशन नहीं हो सकेंगे। मोतियाबिंद ऑपरेशन को आयुष्मान योजना के दायरे से स्वास्थ्य विभाग ने बाहर कर दिया है। अगर अब पैनल में शामिल अस्पतालों ने गोल्डन कार्ड लिए व्यक्ति का मोतियाबिंद का ऑपरेशन किया तो इसका क्लेम स्वास्थ्य विभाग से नहीं मिलेगा। हालांकि आंखों के अन्य ऑपरेशन आयुष्मान योजना के तहत कवर होंगे। मोतियाबिंद के ऑपरेशन को योजना के दायरे से बाहर करने का मुख्य कारण कुछ अस्पतालों द्वारा फर्जी ढंग से क्लेम करने को बताया जा रहा है।
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आयुष्मान योजना के तहत प्रदेश के करीब पांच सौ निजी अस्पतालों को पैनल में शामिल किया गया है। चरखी दादरी जिले में छह निजी अस्पताल पैनल से जुड़े हुए हैं। इनमें से दो अस्पतालों में केवल आंखों का उपचार किया जाता है। इन दोनों अस्पतालों में आंखों के करीब 30 से अधिक ऑपरेशन किए जा चुके हैं। स्वास्थ्य विभाग सूत्रों की माने तो कुछ दिन पहले भिवानी के एक आई अस्पताल द्वारा फर्जी क्लेम करने का मामला पकड़ में आया था। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने मोतियाबिंद के ऑपरेशन को आयुष्मान के दायरे से बाहर करने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी। अब तक प्रदेश के कई अस्पतालों को मोतियाबिंद के ऑपरेशनों की क्लेम राशि जारी नहीं की गई है। हालांकि आंखों के अन्य ऑपरेशन आयुष्मान योजना के तहत कवर होंगे। डिप्टी सीएमओ एवं आयुष्मान योजना के नोडल अधिकारी अभिमन्यु ने बताया कि रेटीना ट्रांसप्लांट, आंखों की सर्जरी सहित अन्य कई प्रकार के ऑपरेशन योजना के तहत पात्र करवा सकते हैं। लेकिन मोतियाबिंद के ऑपरेशन अब पात्र योजना के तहत नहीं करवा सकेंगे। उच्च अधिकारियों के आदेशानुसार मोतियाबिंद को आयुष्मान के दायरे से बाहर किया गया है।
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दस से बारह हजार आता है खर्च
पैनल में शामिल निजी अस्पताल संचालकों की माने तो आंखों के ऑपरेशन पर करीब दस से 12 हजार रुपये खर्च आता है। दादरी जिले में आयुष्मान योजना के तहत करीब 30 मरीजों ने अब तक आंखों के ऑपरेशन करवाए हैं। जिले में गोल्डन कार्ड के लिए 23 हजार लोग पात्र हैं और इनमें से 18568 के गोल्डन कार्ड बन चुके हैं। करीब 300 पात्र लोग अब तक पैनल से जुड़े जिले के अस्पतालों में अपना उपचार करवा चुके हैं। वहीं, दूसरे जिलों में योजना के तहत उपचार लेने वाले मरीजों की संख्या इससे कई गुना अधिक है। इसका सबसे मुख्य कारण जिले में स्पेशलिस्ट की कमी है।
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डिप्टी सीएमओ डॉ. अभिमन्यु ने बताया कि आंखों के विभिन्न प्रकार के ऑपरेशन आयुष्मान योजना में कवर होंगे, लेकिन मोतियाबिंद का ऑपरेशन अब इस योजना में शामिल नहीं है। उच्च अधिकारियों के इस संबंध में आदेश मिल चुके हैं।
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