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Charkhi Dadri News: प्राण वायु देवता योजना में तीन माह से अटकी पेड़ पेंशन की 55 फाइलें
Sun, 18 Jan 2026 01:46 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Sun, 18 Jan 2026 01:46 AM IST
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दादरी के बाबा स्वामीदयाल धाम में स्थित प्राचीन पेड़।
- फोटो : 1
संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। सरकार की प्राण वायु देवता स्कीम के तहत 55 आवेदकों की गत तीन माह से पेड़ पेंशन की फाइल हेड ऑफिस में अटकी है। अब तक जिले में इस स्कीम के तहत 20 लोगों की ही पेंशन शुरू हुई है। सरकार ने यह स्कीम 2023-24 वर्ष में शुरू की थी।
जिस पेड़ की आयु 75 वर्ष नहीं हुई है वे भी पेंशन पाने की होड़ में आवेदन कर रहे हैं। अब तक कुल 150 लोगों ने आवेदन किए हैं जिनमें से 20 पेड़ की ही पेंशन शुरू हुई है। फिलहाल 55 पात्र आवेदक ही लाइन में हैं। शेष आवेदन रद्द हो गए हैं।
पहले आओ, पहले आओ के आधार पर इस स्कीम का लाभ दिया जा रहा है। साझी जमीन पर पेड़ है तो सभी हिस्सेदारी की सहमति लेना अनिवार्य है। इनमें से एक को ही पेंशन लेने का प्रावधान है। इसके लिए जमीन की जमाबंदी आवेदक के नाम होना जरूरी है। वह पेड़ की देखरेख भी करता हो।
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आवेदन करते समय जीपीएस फोटो अपलोड करनी होती है। पेड़ की मोटाई व प्रजाति भी अंकित करनी होती है। आवेदन के बाद वन विभाग के कर्मचारी मौके पर जाकर जांच करते हैं। उसके बाद ही आवेदन को स्वीकृति दी जाती है।
इसके लिए सरकार की ओर से हर वर्ष भिन्न-भिन्न नीतियां तैयार की जा रही हैं ताकि इस पर नियंत्रण पाया जा सके। वायु के साथ जल प्रदूषण और भी विकट समस्या है। आज जल भी प्रदूषित होने लगा है। पुराने समय में गांवों में जोहड़ एवं बावडिय़ां होती थी जो बारिश के पानी से भर जाती थी। बारिश भी सीजन में खूब होती थी। इन जोहड़ों के चारों ओर हरियाली होती थी। खासकर बरगद,पीपल व नीम के पेड़ ज्यादा मात्रा में होते थे। आज जोहड़ व बावडिय़ां भी अपना अस्तित्व खोने लगे हैं। सरकार जोहड़ व बावडिय़ों को पुनर्जीवित करने के लिए प्रयास जरूर कर रही है। इसके लिए आमजन के सहयोग की ज्यादा जरूरत बनी हुई है तभी इसे सिरे चढ़ाया जा सकता है।
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चरखी दादरी। सरकार की प्राण वायु देवता स्कीम के तहत 55 आवेदकों की गत तीन माह से पेड़ पेंशन की फाइल हेड ऑफिस में अटकी है। अब तक जिले में इस स्कीम के तहत 20 लोगों की ही पेंशन शुरू हुई है। सरकार ने यह स्कीम 2023-24 वर्ष में शुरू की थी।
जिस पेड़ की आयु 75 वर्ष नहीं हुई है वे भी पेंशन पाने की होड़ में आवेदन कर रहे हैं। अब तक कुल 150 लोगों ने आवेदन किए हैं जिनमें से 20 पेड़ की ही पेंशन शुरू हुई है। फिलहाल 55 पात्र आवेदक ही लाइन में हैं। शेष आवेदन रद्द हो गए हैं।
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पहले आओ, पहले आओ के आधार पर इस स्कीम का लाभ दिया जा रहा है। साझी जमीन पर पेड़ है तो सभी हिस्सेदारी की सहमति लेना अनिवार्य है। इनमें से एक को ही पेंशन लेने का प्रावधान है। इसके लिए जमीन की जमाबंदी आवेदक के नाम होना जरूरी है। वह पेड़ की देखरेख भी करता हो।
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आवेदन करते समय जीपीएस फोटो अपलोड करनी होती है। पेड़ की मोटाई व प्रजाति भी अंकित करनी होती है। आवेदन के बाद वन विभाग के कर्मचारी मौके पर जाकर जांच करते हैं। उसके बाद ही आवेदन को स्वीकृति दी जाती है।
इसके लिए सरकार की ओर से हर वर्ष भिन्न-भिन्न नीतियां तैयार की जा रही हैं ताकि इस पर नियंत्रण पाया जा सके। वायु के साथ जल प्रदूषण और भी विकट समस्या है। आज जल भी प्रदूषित होने लगा है। पुराने समय में गांवों में जोहड़ एवं बावडिय़ां होती थी जो बारिश के पानी से भर जाती थी। बारिश भी सीजन में खूब होती थी। इन जोहड़ों के चारों ओर हरियाली होती थी। खासकर बरगद,पीपल व नीम के पेड़ ज्यादा मात्रा में होते थे। आज जोहड़ व बावडिय़ां भी अपना अस्तित्व खोने लगे हैं। सरकार जोहड़ व बावडिय़ों को पुनर्जीवित करने के लिए प्रयास जरूर कर रही है। इसके लिए आमजन के सहयोग की ज्यादा जरूरत बनी हुई है तभी इसे सिरे चढ़ाया जा सकता है।