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43 फीसदी चालकों के पद खाली, 80 लाख की दो एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस भी फांक रहीं धूल
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43 फीसदी चालकों के पद खाली, 80 लाख की दो एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस भी फांक रहीं धूल
चरखी दादरी। पिछले तीन सालों में जिला स्वास्थ्य विभाग ने एंबुलेंस की संख्या तो बढ़ा दी है, लेकिन इसके अनुुरूप चालकों की तैनाती नहीं हुई है। परिणामस्वरूप चालकों की कमी बनी है और इसका सीधे तौर पर असर एंबुलेंस सेवा पर पड़ रहा है। पिछले करीब एक साल से चालकों के 43 प्रतिशत पद खाली पड़े हैं और अब तक इन पर नियुक्ति नहीं की गई है। स्वास्थ्य विभाग को फिलहाल 23 चालकों की दरकार है और तब जाकर सभी एंबुलेंस का सुचारु रूप से संचालन होगा और मरीजों को इस सेवा का बेहतर लाभ मिल सकेगा। वहीं, विभाग ने 80 लाख से खरीदी गई एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस को भी अब तक सड़क पर नहीं उतारा है और अस्पताल परिसर में ये एंबुलेंस धूल फांक रही हैं।
जिला स्वास्थ्य विभाग के पास इस समय 20 एंबुलेंस हैं। इन एंबुलेंस के सुचारू संचालन के लिए विभाग को 54 चालक चाहिए। फिलहाल विभाग के पास 31 ही चालक हैं और इसके चलते सभी एंबुलेंस नहीं दौड़ पा रही हैं। इस समय करीब 12 से 13 एंबुलेंस का संचालन हो रहा है जबकि बाकी शो-पीस बनी हुई है। स्वास्थ्य विभाग के पास तीन कैटेगरी की एंबुलेंस हैं। इनमें बीएलएस कैटेगरी की छह एंबुलेंस हैं जिनके संचालन के लिए 18 चालकों की दरकार है। इसी प्रकार एएलएस कैटेगरी की आठ एंबुलेंस हैं और इन सभी एंबुलेंस को चलाने के लिए विभाग को 24 चालक चाहिए। इसी प्रकार पीटी कैटेगरी की 12 छह एंबुलेंस हैं और इनके संचालन के लिए 12 चालक चाहिए। कुल मिलाकर विभाग को 54 चालकों की जरूरत है लेकिन विभाग के पास केवल 31 चालक ही हैं। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग को 23 चालकों की दरकार है।
विभागीय सूत्रों के अनुसार लंबे समय से चालकों की कमी बनी है लेकिन अब तक अधिकारी इसे दूर नहीं करवा पाए हैं। इसका असर एंबुलेंस सेवाओं पर पड़ रहा है और स्वास्थ्य तंत्र को मजबूत करने के लिए लाखों खर्च कर खरीदी गईं कुछ एंबुलेंस शो-पीस बनी हुई हैं। वहीं, संवाददाता के इस संबंध में बातचीत करने पर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जल्द ही चालकों की कमी को दूर कर दिया जाएगा। इसके लिए जल्द ही भर्ती की जाएगी। फिलहाल जितने चालक हैं उनके जरिये एंबुलेंस का संचालन करवाया जा रहा है।
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आठ से दस मरीज प्रतिदिन होते हैं रेफर
दादरी सिविल अस्पताल की अगर बात करें तो प्रतिदिन आठ से दस मरीज एंबुलेंस के जरिये दूसरे जिलों के अस्पतालों में रेफर किए जाते हैं। अगर स्वास्थ्य संसाधनों की कमी के चलते रेफर किए जाने वाले मरीजों की बात करें तो उनकी संख्या 80 से अधिक है। इनमें एमआरआई, सिटी स्कैन व डायलिसिस आदि के मरीज भी शामिल हैं। ज्यादातर मरीजों को उनके तीमारदार अपने निजी वाहनों में ही दूसरे जिलों के अस्पताल में ले जाते हैं। प्रतिदिन दो से तीन गर्भवती महिलाओं को एंबुलेंस घर से स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाती है। वहीं, एक माह की अगर बात करें तो दस से बारह सड़क हादसे भी होते हैं जिनमें गंभीर रूप से घायल हुए लोगों को प्राथमिक उपचार के बाद रोहतक पीजीआई पहुंचाया जाता है।
80 लाख खर्च कर खरीदी गईं एंबुलेंस धूल की चादर से ढकी
करीब तीन माह पहले तत्कालीन डीसी ने रेडक्रॉस के बजट से स्वास्थ्य विभाग के लिए दो एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस खरीदी थी। पिछले दो माह से ये एंबुलेंस स्वास्थ्य विभाग के पास पहुंची हुई हैं, लेकिन अब तक इन्हें रोड पर नहीं उतारा गया है। सूत्रों के अनुसार अब तक ये एंबुलेंस स्वास्थ्य विभाग के नाम नहीं हुई हैं और इसके लिए आरटीए विभाग में आवेदन किया जा चुका है। यह प्रक्रिया पूरी होने और चालकों की कमी दूर होने के बाद ही इन एंबुलेंस को सड़कों पर दौड़ाया जा सकेगा। इन एंबुलेंस में वेंटिलेटर समेत अन्य सभी आवश्यक मूलभूत सुविधाएं हैं।
अलग जिला बनने के बाद भी कंट्रोल रूम चल रहा भिवानी में
दादरी को अलग जिला बने करीब साढ़े चार साल हो चुके हैं लेकिन अभी भी एंबुलेंस कंट्रोल रूम भिवानी में ही चल रहा है। एंबुलेंस की जरूरत पड़ने पर मरीज या तीमारदार को पहले भिवानी कंट्रोल रूम में फोन करना पड़ता है और वहां से मैसेज दादरी एंबुलेंस चालकों को दी जाती है। एंबुलेंस कंट्रोल रूम अगर दादरी में हो तो एंबुलेंस का रिस्पॉंस टाइम और बेहतर हो सकता है। संवाद
वर्जन::
चालकों की कमी को लेकर हमने उच्चाधिकारियों के पास डिमांड भेजी हुई है। जल्द ही चालकों की नियुक्ति होने की उम्मीद है। एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस जल्द ही स्वास्थ्य विभाग के नाम हो जाएंगी और इसके बाद इनकी सेवा भी शुरू कर दी जाएगी।
डॉ. संजय गुप्ता, डिप्टी सीएमओ
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चरखी दादरी। पिछले तीन सालों में जिला स्वास्थ्य विभाग ने एंबुलेंस की संख्या तो बढ़ा दी है, लेकिन इसके अनुुरूप चालकों की तैनाती नहीं हुई है। परिणामस्वरूप चालकों की कमी बनी है और इसका सीधे तौर पर असर एंबुलेंस सेवा पर पड़ रहा है। पिछले करीब एक साल से चालकों के 43 प्रतिशत पद खाली पड़े हैं और अब तक इन पर नियुक्ति नहीं की गई है। स्वास्थ्य विभाग को फिलहाल 23 चालकों की दरकार है और तब जाकर सभी एंबुलेंस का सुचारु रूप से संचालन होगा और मरीजों को इस सेवा का बेहतर लाभ मिल सकेगा। वहीं, विभाग ने 80 लाख से खरीदी गई एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस को भी अब तक सड़क पर नहीं उतारा है और अस्पताल परिसर में ये एंबुलेंस धूल फांक रही हैं।
जिला स्वास्थ्य विभाग के पास इस समय 20 एंबुलेंस हैं। इन एंबुलेंस के सुचारू संचालन के लिए विभाग को 54 चालक चाहिए। फिलहाल विभाग के पास 31 ही चालक हैं और इसके चलते सभी एंबुलेंस नहीं दौड़ पा रही हैं। इस समय करीब 12 से 13 एंबुलेंस का संचालन हो रहा है जबकि बाकी शो-पीस बनी हुई है। स्वास्थ्य विभाग के पास तीन कैटेगरी की एंबुलेंस हैं। इनमें बीएलएस कैटेगरी की छह एंबुलेंस हैं जिनके संचालन के लिए 18 चालकों की दरकार है। इसी प्रकार एएलएस कैटेगरी की आठ एंबुलेंस हैं और इन सभी एंबुलेंस को चलाने के लिए विभाग को 24 चालक चाहिए। इसी प्रकार पीटी कैटेगरी की 12 छह एंबुलेंस हैं और इनके संचालन के लिए 12 चालक चाहिए। कुल मिलाकर विभाग को 54 चालकों की जरूरत है लेकिन विभाग के पास केवल 31 चालक ही हैं। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग को 23 चालकों की दरकार है।
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विभागीय सूत्रों के अनुसार लंबे समय से चालकों की कमी बनी है लेकिन अब तक अधिकारी इसे दूर नहीं करवा पाए हैं। इसका असर एंबुलेंस सेवाओं पर पड़ रहा है और स्वास्थ्य तंत्र को मजबूत करने के लिए लाखों खर्च कर खरीदी गईं कुछ एंबुलेंस शो-पीस बनी हुई हैं। वहीं, संवाददाता के इस संबंध में बातचीत करने पर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जल्द ही चालकों की कमी को दूर कर दिया जाएगा। इसके लिए जल्द ही भर्ती की जाएगी। फिलहाल जितने चालक हैं उनके जरिये एंबुलेंस का संचालन करवाया जा रहा है।
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आठ से दस मरीज प्रतिदिन होते हैं रेफर
दादरी सिविल अस्पताल की अगर बात करें तो प्रतिदिन आठ से दस मरीज एंबुलेंस के जरिये दूसरे जिलों के अस्पतालों में रेफर किए जाते हैं। अगर स्वास्थ्य संसाधनों की कमी के चलते रेफर किए जाने वाले मरीजों की बात करें तो उनकी संख्या 80 से अधिक है। इनमें एमआरआई, सिटी स्कैन व डायलिसिस आदि के मरीज भी शामिल हैं। ज्यादातर मरीजों को उनके तीमारदार अपने निजी वाहनों में ही दूसरे जिलों के अस्पताल में ले जाते हैं। प्रतिदिन दो से तीन गर्भवती महिलाओं को एंबुलेंस घर से स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाती है। वहीं, एक माह की अगर बात करें तो दस से बारह सड़क हादसे भी होते हैं जिनमें गंभीर रूप से घायल हुए लोगों को प्राथमिक उपचार के बाद रोहतक पीजीआई पहुंचाया जाता है।
80 लाख खर्च कर खरीदी गईं एंबुलेंस धूल की चादर से ढकी
करीब तीन माह पहले तत्कालीन डीसी ने रेडक्रॉस के बजट से स्वास्थ्य विभाग के लिए दो एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस खरीदी थी। पिछले दो माह से ये एंबुलेंस स्वास्थ्य विभाग के पास पहुंची हुई हैं, लेकिन अब तक इन्हें रोड पर नहीं उतारा गया है। सूत्रों के अनुसार अब तक ये एंबुलेंस स्वास्थ्य विभाग के नाम नहीं हुई हैं और इसके लिए आरटीए विभाग में आवेदन किया जा चुका है। यह प्रक्रिया पूरी होने और चालकों की कमी दूर होने के बाद ही इन एंबुलेंस को सड़कों पर दौड़ाया जा सकेगा। इन एंबुलेंस में वेंटिलेटर समेत अन्य सभी आवश्यक मूलभूत सुविधाएं हैं।
अलग जिला बनने के बाद भी कंट्रोल रूम चल रहा भिवानी में
दादरी को अलग जिला बने करीब साढ़े चार साल हो चुके हैं लेकिन अभी भी एंबुलेंस कंट्रोल रूम भिवानी में ही चल रहा है। एंबुलेंस की जरूरत पड़ने पर मरीज या तीमारदार को पहले भिवानी कंट्रोल रूम में फोन करना पड़ता है और वहां से मैसेज दादरी एंबुलेंस चालकों को दी जाती है। एंबुलेंस कंट्रोल रूम अगर दादरी में हो तो एंबुलेंस का रिस्पॉंस टाइम और बेहतर हो सकता है। संवाद
वर्जन::
चालकों की कमी को लेकर हमने उच्चाधिकारियों के पास डिमांड भेजी हुई है। जल्द ही चालकों की नियुक्ति होने की उम्मीद है। एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस जल्द ही स्वास्थ्य विभाग के नाम हो जाएंगी और इसके बाद इनकी सेवा भी शुरू कर दी जाएगी।
डॉ. संजय गुप्ता, डिप्टी सीएमओ