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रोडवेज के बेडे़ में शामिल होंगी 30 बसें, गुरुग्राम में हो रहीं तैयार
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दादरी बस स्टैंड परिसर में बूथों पर खड़ी बसें।
- फोटो : CharkhiDadri
चरखी दादरी। जिले के 10 से 12 गांव जहां अब रोडवेज की बसें नहीं दौड़ती, जल्द ही वहां ग्रामीणों को बस सेवा मिलेगी। इतना ही नहीं जिन गांवों में सेवाएं कम थी, वहां बढ़ाई जाएंगी। इसके लिए रोडवेज प्रबंधन ने तैयारी कर ली है। दरअसल हाल ही में प्रदेश सरकार द्वारा खरीदी गईं 400 बसों में से 30 दादरी डिपो को अलॉट की गई हैं। इन बसों को गुरुग्राम में तैयार किया जा रहा है और जल्द ही नई बसें डिपो के बेडे़ में शामिल होंगी। इसकी पुष्टि दादरी डिपो महाप्रबंधक रविश हुड्डा ने की है। उन्होंने बताया कि इन बसों को दौड़ाने का रूट मैप भी तैयार किया जा चुका है। लंबे रूटों से पुरानी बसें हटाकर नई बसों को लगाया जाएगा और इसके अलावा कुछ लंबे रूट पर नई बस सेवा भी शुरू की जा सकती है। नई बसें आने के बाद दादरी बस स्टैंड पर बसों की संख्या बढ़कर 128 हो जाएगी। वहीं लंबे रूटों पर दौड़ने वाली पुरानी बसों से ग्रामीण और लोकल रूटों पर सेवाएं बढ़ाई जाएंगी।
लोहारु सब डिपो भी दादरी डिपो के अधीन है। दादरी और लोहारू की अगर बात करें तो रोडवेज बसों की संख्या करीब 150 है। दादरी बस स्टैंड से इस समय 98 बसों का विभिन्न रूटों पर संचालन हो रहा है। वहीं, कुछ बसें इस साल कंडम भी हो जाएंगी और उनका संचालन रूटों पर बंद किया जाएगा। इस बिंदु को जेहन में रखते हुए डिपो ने मुख्यालय से नई बसों की डिमांड की थी। हाल ही में प्रदेश सरकार ने करीब चार सौ बसों की खरीद की है और डिपो की डिमांड के मद्देनजर दादरी को 30 नई बसें अलॉट हुई हैं। नई बसें बीएस-छह मार्का की होंगी और इनके चेसिस नंबर की सूची डिपो को भेजी जा चुकी है और बसों की बॉडी गुरुग्राम में तैयार करवाई जा रही है।
रोडवेज सूत्रों के अनुसार इसी माह 30 में से 10 बसें पहुंचने की उम्मीद हैं और उसके बाद 20 से 25 दिन बाद 10 और बसें पहुंच जाएंगी। बाकी दस बसें भी करीब इसी माह के अंत तक आने की उम्मीद है। ये नई बसें पहुंचने से रोडवेज का सफर बेहतर होगा। दूसरी ओर बसें अलॉट होते ही रोडवेज अधिकारियों ने इनके संचालन का प्रारूप तैयार कर लिया है। ज्यादातर नई बसों को लंबे रूटों पर दौड़ाया जाएगा और जो पुरानी बसें लंबे रूटों पर चल रही हैं, उनका संचालन लोकल रूटों पर शुरू किया जाएगा। दादरी डिपो की प्रतिदिन आमदनी करीब 10 से 12 लाख है।
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दिसंबर तक 40 बसें कंडम होने का अनुमान
एक तरफ डिपो को नई 30 बसें मिली हैं तो दूसरी ओर दिसंबर 2021 तक डिपो की 40 बसें कंडम हो जाएंगी। एनजीटी के नियमानुसार दस साल पुरानी होने के कारण डीजल से चलने वाली इन बसों का संचालन नहीं किया जा सकेगा। ऐसे में 10 बसों की कमी को लेकर संवाददाता से बातचीत में रोडवेज महाप्रबंधक ने बताया कि 30 बसें मिलने के बाद दस और बसों की डिमांड भेज दी जाएगी और दिसंबर से पहले बेडे़ में बसों की संख्या 150 कर दी जाएगी।
इन लंबे रूटों पर चलती हैं दादरी डिपो से बसें
दादरी डिपो से पुष्कर, अलवर, चंडीगढ़, हरिद्वार, खाटू श्याम, जयपुर, दिल्ली, सिक्कर, सिरसा आदि लंबे रूटों पर बसें चलती हैं। 70 फीसदी लंबे रूटों पर पुरानी बसें दौड़ रही हैं और नई बसें डिपो में पहुंचते ही इनके पहिये इन लंबे रूटों पर घुमाए जाएंगे।
लंबे रूटों पर इनकम बढ़ाने पर भी जोर
विभागीय सूत्रों के अनुसार कुछ लंबे रूटों पर चलने वाली बसों की आमदन इस समय बेहद कम आ रही है। रोडवेज महाप्रबंधक इससे खफा है। वो आंकड़ों का प्रतिदिन जायजा लेकर कम आमदन वाले चालक-परिचालकों को कार्यालय में बुलाकर कार्यप्रणाली में सुधार के साथ इसे बढ़ाने के निर्देश भी दे रहे हैं। हालांकि कुछ रूटों की आमदन इस व्यवस्था के बाद बढ़ी है। सभी चालक-परिचालकों के अलावा ड्यूटी स्टाफ में भी इसकी चर्चा है।
30 बसें दादरी डिपो को अलॉट हो गई हैं और गुरुग्राम में बसें तैयार हो रही हैं। जल्द ही ये बसें डिपो के बेडे़ में शामिल हो जाएंगी और इन बसों को लंबे रूटों पर दौड़ाने की हमारी योजना है। जल्द ही कुछ नए लंबे रूट पर बसों का संचालन शुरू करने की हमारी योजना है और इस पर काम चल रहा है। दिसंबर तक करीब 40 बसें कंडम हो जाएंगी। इनकी समयावधि दस साल पूरी होने पर नियमानुसार इन्हें सड़कों पर नहीं दौड़ाया जा सकेगा।
-रवीश हुड्डा, जीएम, चरखी दादरी
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लोहारु सब डिपो भी दादरी डिपो के अधीन है। दादरी और लोहारू की अगर बात करें तो रोडवेज बसों की संख्या करीब 150 है। दादरी बस स्टैंड से इस समय 98 बसों का विभिन्न रूटों पर संचालन हो रहा है। वहीं, कुछ बसें इस साल कंडम भी हो जाएंगी और उनका संचालन रूटों पर बंद किया जाएगा। इस बिंदु को जेहन में रखते हुए डिपो ने मुख्यालय से नई बसों की डिमांड की थी। हाल ही में प्रदेश सरकार ने करीब चार सौ बसों की खरीद की है और डिपो की डिमांड के मद्देनजर दादरी को 30 नई बसें अलॉट हुई हैं। नई बसें बीएस-छह मार्का की होंगी और इनके चेसिस नंबर की सूची डिपो को भेजी जा चुकी है और बसों की बॉडी गुरुग्राम में तैयार करवाई जा रही है।
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रोडवेज सूत्रों के अनुसार इसी माह 30 में से 10 बसें पहुंचने की उम्मीद हैं और उसके बाद 20 से 25 दिन बाद 10 और बसें पहुंच जाएंगी। बाकी दस बसें भी करीब इसी माह के अंत तक आने की उम्मीद है। ये नई बसें पहुंचने से रोडवेज का सफर बेहतर होगा। दूसरी ओर बसें अलॉट होते ही रोडवेज अधिकारियों ने इनके संचालन का प्रारूप तैयार कर लिया है। ज्यादातर नई बसों को लंबे रूटों पर दौड़ाया जाएगा और जो पुरानी बसें लंबे रूटों पर चल रही हैं, उनका संचालन लोकल रूटों पर शुरू किया जाएगा। दादरी डिपो की प्रतिदिन आमदनी करीब 10 से 12 लाख है।
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दिसंबर तक 40 बसें कंडम होने का अनुमान
एक तरफ डिपो को नई 30 बसें मिली हैं तो दूसरी ओर दिसंबर 2021 तक डिपो की 40 बसें कंडम हो जाएंगी। एनजीटी के नियमानुसार दस साल पुरानी होने के कारण डीजल से चलने वाली इन बसों का संचालन नहीं किया जा सकेगा। ऐसे में 10 बसों की कमी को लेकर संवाददाता से बातचीत में रोडवेज महाप्रबंधक ने बताया कि 30 बसें मिलने के बाद दस और बसों की डिमांड भेज दी जाएगी और दिसंबर से पहले बेडे़ में बसों की संख्या 150 कर दी जाएगी।
इन लंबे रूटों पर चलती हैं दादरी डिपो से बसें
दादरी डिपो से पुष्कर, अलवर, चंडीगढ़, हरिद्वार, खाटू श्याम, जयपुर, दिल्ली, सिक्कर, सिरसा आदि लंबे रूटों पर बसें चलती हैं। 70 फीसदी लंबे रूटों पर पुरानी बसें दौड़ रही हैं और नई बसें डिपो में पहुंचते ही इनके पहिये इन लंबे रूटों पर घुमाए जाएंगे।
लंबे रूटों पर इनकम बढ़ाने पर भी जोर
विभागीय सूत्रों के अनुसार कुछ लंबे रूटों पर चलने वाली बसों की आमदन इस समय बेहद कम आ रही है। रोडवेज महाप्रबंधक इससे खफा है। वो आंकड़ों का प्रतिदिन जायजा लेकर कम आमदन वाले चालक-परिचालकों को कार्यालय में बुलाकर कार्यप्रणाली में सुधार के साथ इसे बढ़ाने के निर्देश भी दे रहे हैं। हालांकि कुछ रूटों की आमदन इस व्यवस्था के बाद बढ़ी है। सभी चालक-परिचालकों के अलावा ड्यूटी स्टाफ में भी इसकी चर्चा है।
30 बसें दादरी डिपो को अलॉट हो गई हैं और गुरुग्राम में बसें तैयार हो रही हैं। जल्द ही ये बसें डिपो के बेडे़ में शामिल हो जाएंगी और इन बसों को लंबे रूटों पर दौड़ाने की हमारी योजना है। जल्द ही कुछ नए लंबे रूट पर बसों का संचालन शुरू करने की हमारी योजना है और इस पर काम चल रहा है। दिसंबर तक करीब 40 बसें कंडम हो जाएंगी। इनकी समयावधि दस साल पूरी होने पर नियमानुसार इन्हें सड़कों पर नहीं दौड़ाया जा सकेगा।
-रवीश हुड्डा, जीएम, चरखी दादरी