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Charkhi Dadri News: 132 वैज्ञानिकों व शोधकर्ताओं ने प्रस्तुत किए शोधपत्र

Thu, 27 Mar 2025 01:44 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी Updated Thu, 27 Mar 2025 01:44 AM IST
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132 scientists and researchers presented research papers
जनता महाविद्यालय में आयोजित वेबिनार में शामिल विभिन्न देशों के वैज्ञानिक, शोधकर्ता और प्रोफेसर
चरखी दादरी। जनता महाविद्यालय एवं रिसर्च प्लेटो पब्लिशर्स की ओर से आयोजित सामग्री विज्ञान और उपकरणों में हाल के रुझान आईसीआर एमटीडी के दूसरे दिन देश-विदेश के अनेक वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं एवं प्रोफेसर्स ने अपने शोधपत्र प्रस्तुत किए। कार्यक्रम के संयोजक एवं महाविद्यालय के भौतिक शास्त्र विभाग के अध्यक्ष डॉ. जयवीर सिंह ने बताया कि मुख्य वक्ता प्रोफेसर थॉमस जे वेबस्टर रहे।
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वेबस्टर वर्तमान में हैबी यूनिक विश्वविद्यालय चीन में कार्य कर रहे हैं। वेबस्टर ने ह्यूमन नैनो मेडिसिन विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार कोरोना के पश्चात एंटीबाॅयोटिक का प्रयोग किए बिना इस टेक्नोलॉजी की सहायता से मनुष्य को ठीक किया जा सकता है। 2025 के नोबेल पुरस्कार के लिए नामित प्रोफेसर वेबस्टर ने बताया कि वह इस तकनीक से अब तक 30 हजार लोगों का इलाज कर चुके हैं। वक्ता रशियन एकेडमी ऑफ साइंस मास्को के प्रोफेसर श्वेतलाना ग्रेटोवश्की ने मैग्नेटिक लेविटेशन विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि इस टेक्नोलॉजी से ट्रांसपोर्टेशन में महत्वपूर्ण उपलब्धियां अर्जित की जा सकती हैं।
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स्लोवेनिया के नेशनल इंस्टीट्यूट आफ साइंस के प्रोफेसर ब्लेज लिखो जार ने एक अन्य सत्र में ऊर्जा के गैरपरंपरागत स्रोतों में विशेष रूप से तरल हाइड्रोजन के संचयन पर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस तकनीक से भविष्य में ग्रीन एनर्जी को एकत्रित करके इसका प्रयोग मानवता के विकास के लिए किया जा सकता है।
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जनता महाविद्यालय के पूर्व छात्र एवं नेताजी सुभाष इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी द्वारिका के प्रोफेसर विनोद कुमार ने भी सामग्री विज्ञान के विभिन्न पहलुओं पर विचार रखें।
इससे पहले महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. यशवीर सिंह ने देश-विदेश के प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों शोधकर्ताओं एवं शिक्षकों का महाविद्यालय की ओर से संचालित इस कार्यक्रम में ऑनलाइन मोड में जुड़ने पर स्वागत एवं आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम के संयोजक प्रोफेसर जयवीर सिंह ने बताया कि बुधवार को 15 तकनीकी सत्रों में 25 देश के 132 वैज्ञानिकों एवं शोधकर्ताओं ने अपने शोधपत्र प्रस्तुत किए। इनमें प्रमुख रूप से जापान के खा जू हीको सोमीमोरा, संयुक्त अरब अमीरात के साद जफर विमलेश, रूस के विक्टर कोलिदोव, इंग्लैंड के जे जोहब आइजक पीटर, श्रीलंका के प्रोफेसर जय सिंहमन, इंडोनेशिया के अबू सलाम, भारत से राकेश पटेल, नीलां एस गोरे, प्रतिभा शर्मा ने मुख्य रूप से अपने शोधपत्र प्रस्तुत किए।

डॉ. जयवीर सिंह ने बताया कि शोधकर्ताओं में भारत के विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के शोध छात्रों एवं शिक्षकों के अतिरिक्त चीन, कोरिया, सोलोवाकिया दक्षिणी कोरिया, संयुक्त राज्य अमेरिका, मलेशिया, इंग्लैंड, स्लोवेनिया, श्रीलंका, जापान आदि देशों के विद्वानों ने अपने विचार रखे।
कार्यक्रम के संचालन में सह संयोजक डॉ. सुशील सैनी, आयोजन समिति के डॉ. नीरज गर्ग, शिवाकांत, डॉ. मंजीत व डॉ. पूनम सांगवान आदि की भूमिका रही।
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