Haryana: अनिल विज और सीएम सैनी के बीच क्या है खटपट की वजह...? पढ़िए 100 दिन से चल रही तकरार की कहानी
अनिल विज और सीएम नायब सैनी के बीच पहले भी इस तरह की तकरारबाजी देखी जा चुकी है। इससे पहले मनोहर लाल हरियाणा के मुख्यमंत्री थे तब भी दोनों के बीच दखलअंदाजी रहती थी।
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हरियाणा सरकार के परिवहन मंत्री अनिल विज ने एक बार फिर से अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। अनिल विज ने निशाने पर एक बार फिर से मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी हैं। सीएम नायब सैनी और अनिल विज में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। परिवहन मंत्री अनिल विज ने सरकार में उनकी सुनवाई न होने और उनके आदेशों की अनुपालना न होने पर मुख्यमंत्री नायब सैनी को लेकर लगातार दूसरे दिन बयान दिया है। इससे एक दिन पहले विज ने कहा था कि वह किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल की तरह आमरण अनशन कर सकते हैं। विज ने कहा था कि वह अब जनता दरबार के बाद ग्रेवियांस कमेटी की मीटिंग में नहीं जाएंगे। वहीं आज उन्होंने सीएम सैनी को कहा कि जब से वे मुख्यमंत्री बने हैं उस दिन से उड़न खटोले पर सवार हैं, नीचे उतरे तो जनता के दुख दर्द को देखें।
यह सब अनिल विज इसलिए कह रहे हैं क्योंकि वह कुछ अधिकारियों को बदलने की मांग कर रहे थे, लेकिन सरकार उनकी मांगों पर गौर नहीं कर रही थी। हालांकि अब सरकार की तरफ से अंबाला के उपायुक्त को बदल दिया गया है।
बता दें कि अनिल विज और सीएम नायब सैनी के बीच पहले भी इस तरह की तकरारबाजी देखी जा चुकी है। इससे पहले मनोहर लाल हरियाणा के मुख्यमंत्री थे तब भी दोनों के बीच दखलअंदाजी रहती थी। 12 मार्च 2024 में जब मनोहर लाल ने कैबिनेट मीटिंग में घोषणा की थी कि वह मुख्यमंत्री का पद छोड़ रहे हैं और कार्यकारी जिम्मेदारी नायब सिंह सैनी को सौंप रहे हैं तब अनिल विज ने नराजगी जाहिर करते हुए बैठक के बीच से उठकर चले गए थे। इसके बाद उन्हें मनाने के लिए खुद नायब सैनी विज के घर पर गए थे।
नायब सिंह सैनी पहली बार मुख्यमंत्री बने थे तब अनिल विज मंत्रीमंडल में शामिल नहीं किया गया था। तब भी उनकी नाराजगी जग जाहिर थी। इसके बाद भी हरियाणा विधानसभा चुनाव के दौरान भी अनिल विज ने नायब सैनी को मुख्यमंत्री बनाने की घोषणा का कटाक्ष किया था। इतना ही नहीं अनिल विज ने खुद मुख्यंत्री पद की दावेदारी ठोक दी थी। विज ने कहा था कि वह सात बार के विधायक हैं। अगर उन्हें मुख्मंत्री की जिम्मेदारी दी जाती है तो वह बखूबी निभाएंगे।
इससे पहले, अनिल विज और मनोहर लाल खट्टर के बीच भी खटपट की खबरें 2019 से 2024 तक आती रहीं। विज से उस समय सीएम मनोहर लाल खट्टर ने कुछ विभाग वापस ले लिए थे। 2020 में खट्टर ने विज से गृहमंत्री होते हुए भी सीआईडी का चार्ज वापस ले लिया था।
हरियाणा विधानसभा चुनाव 2024 में भाजपा ने प्रंचड जीत हासिल की थी। इसके बाद भाजपा के विधायक दल की बैठक में विधायक दल के नेता के चुनाव के लिए भाजपा के संसदीय बोर्ड ने पर्यवेक्षक के तौर पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को जिम्मेदारी सौंपी थी। उनके साथ मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव भी पर्यवेक्षक होंगे। ऐसा इसलिए किया गया था क्योंकि विधायक दल का नेता चुने जाने के समय अनिल विज सीएम पद को लेकर अपना दावा ठोक सकते हैं। इसके अलावा, बाहर से केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह भी मुख्यमंत्री पद को लेकर दावा जताते रहे हैं। पार्टी हाईकमान ने इन दोनों के तेवरों को देखते ही अमित शाह को यह जिम्मेदारी सौंपी है, ताकि पार्टी में कोई गुटबाजी न दिखे और सारी प्रक्रिया आराम से पूरी हो सके।
बदला गया अंबाला का डीसी
हालांकि अब सरकार ने उनकी एक मांग को पूरा कर लिया है, जिसमें अंबाला के डीसी को बदल दिया गया है। वहीं अब विज अन्य पुलिस अधिकारियों को भी बदलने के चाह रखते हैं।