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Chandigarh-Haryana News: उद्योग के लिए अब 30 दिन में सिंगल विंडो पर मंजूरी, सभी जिलों में होंगे स्टार्टअप अधिकारी
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फोटो
- मुख्यमंत्री नायब सैनी ने समीक्षा बैठक में दिए निर्देश, राज्य में स्टार्टअप एडवाइजरी काउंसिल व राज्य नवाचार एवं एमएसएमई परिषद भी गठित होगी
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा में नया उद्योग या स्टार्टअप शुरू करने वाले युवाओं को अब मंजूरियों के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। सिंगल विंडो क्लीयरेंस प्रणाली में व्यावसायिक स्वीकृतियों का समय 45 दिन से घटाकर 30 दिन किया जा रहा है। आगे भी इसे 50 प्रतिशत तक कम करने का लक्ष्य रखा गया है। वहीं, स्टार्टअप को जिला स्तर तक बढ़ावा देने के लिए प्रत्येक जिले में स्टार्टअप संपर्क अधिकारी नियुक्त किए जाएंगे।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने हरियाणा विजन-2047 की समीक्षा बैठक में निर्देश दिए हैं कि हर जिले में तैनात अधिकारियों की जिम्मेदारी नए उद्यमियों को पंजीकरण, अनुमतियां, वित्तीय सहायता और सरकारी योजनाओं से जोड़ने के साथ पूरी प्रक्रिया में मार्गदर्शन देने की होगी। उद्योगों और स्टार्टअप से जुड़े निर्णयों को गति देने के लिए राज्य स्टार्टअप एडवाइजरी काउंसिल तथा राज्य नवाचार एवं एमएसएमई परिषद का भी गठन किया जाएगा।
बैठक में बताया गया कि पद्मा योजना के तहत प्रदेश के 10 जिलों में नए औद्योगिक क्लस्टर विकसित किए जाएंगे। स्टार्टअप को वित्तीय सहयोग देने के लिए 2,000 करोड़ रुपये का हरियाणा स्टार्टअप फंड ऑफ फंड्स बनाया जा रहा है जबकि 250 करोड़ रुपये का आत्मनिर्भर स्टार्टअप वेंचर फंड पहले से संचालित है।
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मुख्यमंत्री ने बरवाला में आधुनिक वुडन जोन और वुडन मार्केट विकसित करने, स्वयं सहायता समूहों को वॉलमार्ट और अमेजॉन जैसे ई-कॉमर्स मंचों से जोड़ने तथा 100 ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष कौशल केंद्र स्थापित करने के निर्देश दिए। इसके अलावा उद्योगों की जरूरत के अनुरूप आईटीआई में नए पाठ्यक्रम शुरू किए जाएंगे और कम से कम 25 आईटीआई को उद्योगों के सहयोग से संचालित किया जाएगा ताकि युवाओं को प्रशिक्षण के साथ बेहतर रोजगार के अवसर भी मिल सकें।
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- मुख्यमंत्री नायब सैनी ने समीक्षा बैठक में दिए निर्देश, राज्य में स्टार्टअप एडवाइजरी काउंसिल व राज्य नवाचार एवं एमएसएमई परिषद भी गठित होगी
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा में नया उद्योग या स्टार्टअप शुरू करने वाले युवाओं को अब मंजूरियों के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। सिंगल विंडो क्लीयरेंस प्रणाली में व्यावसायिक स्वीकृतियों का समय 45 दिन से घटाकर 30 दिन किया जा रहा है। आगे भी इसे 50 प्रतिशत तक कम करने का लक्ष्य रखा गया है। वहीं, स्टार्टअप को जिला स्तर तक बढ़ावा देने के लिए प्रत्येक जिले में स्टार्टअप संपर्क अधिकारी नियुक्त किए जाएंगे।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने हरियाणा विजन-2047 की समीक्षा बैठक में निर्देश दिए हैं कि हर जिले में तैनात अधिकारियों की जिम्मेदारी नए उद्यमियों को पंजीकरण, अनुमतियां, वित्तीय सहायता और सरकारी योजनाओं से जोड़ने के साथ पूरी प्रक्रिया में मार्गदर्शन देने की होगी। उद्योगों और स्टार्टअप से जुड़े निर्णयों को गति देने के लिए राज्य स्टार्टअप एडवाइजरी काउंसिल तथा राज्य नवाचार एवं एमएसएमई परिषद का भी गठन किया जाएगा।
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बैठक में बताया गया कि पद्मा योजना के तहत प्रदेश के 10 जिलों में नए औद्योगिक क्लस्टर विकसित किए जाएंगे। स्टार्टअप को वित्तीय सहयोग देने के लिए 2,000 करोड़ रुपये का हरियाणा स्टार्टअप फंड ऑफ फंड्स बनाया जा रहा है जबकि 250 करोड़ रुपये का आत्मनिर्भर स्टार्टअप वेंचर फंड पहले से संचालित है।
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मुख्यमंत्री ने बरवाला में आधुनिक वुडन जोन और वुडन मार्केट विकसित करने, स्वयं सहायता समूहों को वॉलमार्ट और अमेजॉन जैसे ई-कॉमर्स मंचों से जोड़ने तथा 100 ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष कौशल केंद्र स्थापित करने के निर्देश दिए। इसके अलावा उद्योगों की जरूरत के अनुरूप आईटीआई में नए पाठ्यक्रम शुरू किए जाएंगे और कम से कम 25 आईटीआई को उद्योगों के सहयोग से संचालित किया जाएगा ताकि युवाओं को प्रशिक्षण के साथ बेहतर रोजगार के अवसर भी मिल सकें।