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Chandigarh-Haryana News: फर्जीवाड़ा रोकने के लिए कृषि भूमि को आधार से लिंक करने की तैयारी
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अरुण शर्मा
चंडीगढ़। सरकार की कृषि से जुड़ी योजनाओं का गलत तरीके से लाभ लेने के लिए पोर्टल पर फर्जी पंजीकरण और दूसरे की जमीन बेचने के फर्जीवाड़े पर अब शिकंजा कस सकेगा। इस तरह की धोखाधड़ी को रोकने के लिए सरकार प्रदेश में कृषि भूमि को आधार से लिंक करने की तैयारी कर रही है। हरियाणा भू-अभिलेख निदेशालय कृषि भूमि को आधार से जोड़ने की प्रक्रिया शुरू करेगा। दिवाली के बाद पटवारियों के माध्यम से मालिकों के आधार नंबर संबंधित कृषि भूमि से लिंक किए जाएंगे। प्रक्रिया पूरी होने के बाद फर्जीवाड़े पर लगाम लग सकेगी।
हरियाणा भू-अभिलेख निदेशालय के अनुसार प्रदेश में 1.38 करोड़ कृषि भू-स्वामी हैं। प्रदेश में करीब 1.10 करोड़ एकड़ भूमि है जिसमें से करीब 86 लाख एकड़ जमीन कृषि योग्य है। पिछले करीब 2-3 वर्षों से असल किसानों के अलावा ठगी के लिए भी लोग मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल के माध्यम से पंजीकरण करा रहे थे। खरीफ-2025 सीजन में करीब 2 लाख से अधिक इसी तरह की शिकायतें सामने आईं। भारी बरसात से फसलों को हुए नुकसान के बाद क्षतिपूर्ति पोर्टल पर भी धोखाधड़ी से मुआवजा लेने के लिए फर्जी तरीके से पंजीकरण की कई शिकायतें आईं थीं। हरियाणा भू-अभिलेख निदेशालय के मुताबिक वित्तायुक्त के तिथि तय करते ही कृषि भूमि को आधार से लिंक करने का काम शुरू हो जाएगा। अभी पटवारी गिरदावरी के कार्य में व्यस्त हैं। ऐसे में दिवाली के बाद योजना पर काम शुरू होगा। इस कार्य को पूरा कराने के लिए करीब दो से तीन माह का समय तय किया गया है। निदेशालय की योजना है कि प्रदेश के सभी 7103 गांवों में कैंप लगाकर कृषि भूमि को आधार नंबर से जोड़ा जाएगा।
कृषि भूमि के स्वामियों को सबसे बड़ा लाभ इससे यही होगा कि उनके नाम पर कोई दूसरा व्यक्ति फर्जी तरीके से मेरी फसल-मेरा ब्योरा व क्षतिपूर्ति पोर्टल आदि पर पंजीकरण कराकर सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं ले पाएगा।
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फर्जी तरीके से जमीन की रजिस्ट्री के मामलों पर भी इससे रोक लग सकेगी। हरियाणा भू-अभिलेख के महानिदेशक डाॅ. यशपाल का कहना है कि जल्द ही इस योजना पर काम शुरू हो जाएगा। इससे किसानों के साथ होने वाली धोखाधड़ी के मामले रुक सकेंगे।
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चंडीगढ़। सरकार की कृषि से जुड़ी योजनाओं का गलत तरीके से लाभ लेने के लिए पोर्टल पर फर्जी पंजीकरण और दूसरे की जमीन बेचने के फर्जीवाड़े पर अब शिकंजा कस सकेगा। इस तरह की धोखाधड़ी को रोकने के लिए सरकार प्रदेश में कृषि भूमि को आधार से लिंक करने की तैयारी कर रही है। हरियाणा भू-अभिलेख निदेशालय कृषि भूमि को आधार से जोड़ने की प्रक्रिया शुरू करेगा। दिवाली के बाद पटवारियों के माध्यम से मालिकों के आधार नंबर संबंधित कृषि भूमि से लिंक किए जाएंगे। प्रक्रिया पूरी होने के बाद फर्जीवाड़े पर लगाम लग सकेगी।
हरियाणा भू-अभिलेख निदेशालय के अनुसार प्रदेश में 1.38 करोड़ कृषि भू-स्वामी हैं। प्रदेश में करीब 1.10 करोड़ एकड़ भूमि है जिसमें से करीब 86 लाख एकड़ जमीन कृषि योग्य है। पिछले करीब 2-3 वर्षों से असल किसानों के अलावा ठगी के लिए भी लोग मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल के माध्यम से पंजीकरण करा रहे थे। खरीफ-2025 सीजन में करीब 2 लाख से अधिक इसी तरह की शिकायतें सामने आईं। भारी बरसात से फसलों को हुए नुकसान के बाद क्षतिपूर्ति पोर्टल पर भी धोखाधड़ी से मुआवजा लेने के लिए फर्जी तरीके से पंजीकरण की कई शिकायतें आईं थीं। हरियाणा भू-अभिलेख निदेशालय के मुताबिक वित्तायुक्त के तिथि तय करते ही कृषि भूमि को आधार से लिंक करने का काम शुरू हो जाएगा। अभी पटवारी गिरदावरी के कार्य में व्यस्त हैं। ऐसे में दिवाली के बाद योजना पर काम शुरू होगा। इस कार्य को पूरा कराने के लिए करीब दो से तीन माह का समय तय किया गया है। निदेशालय की योजना है कि प्रदेश के सभी 7103 गांवों में कैंप लगाकर कृषि भूमि को आधार नंबर से जोड़ा जाएगा।
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कृषि भूमि के स्वामियों को सबसे बड़ा लाभ इससे यही होगा कि उनके नाम पर कोई दूसरा व्यक्ति फर्जी तरीके से मेरी फसल-मेरा ब्योरा व क्षतिपूर्ति पोर्टल आदि पर पंजीकरण कराकर सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं ले पाएगा।
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फर्जी तरीके से जमीन की रजिस्ट्री के मामलों पर भी इससे रोक लग सकेगी। हरियाणा भू-अभिलेख के महानिदेशक डाॅ. यशपाल का कहना है कि जल्द ही इस योजना पर काम शुरू हो जाएगा। इससे किसानों के साथ होने वाली धोखाधड़ी के मामले रुक सकेंगे।