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Hindi News ›   Haryana ›   Chandigarh-Haryana News ›   PGCIL gets relief from High Court, HSVP's demand of Rs 93.12 crore rejected, Court News, Haryana News

Chandigarh-Haryana News: पीजीसीआईएल को हाईकोर्ट से राहत, एचएसवीपी की 93.12 करोड़ की मांग खारिज

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-कंपनी को नो ड्यूज सर्टिफिकेट जारी करने का एचएसवीपी को आदेश
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-कार्यालय व आवास के लिए दी गई थी भूमि, निर्माण में देरी के चलते की थी कार्रवाई
अमर उजाला ब्यूरो

चंडीगढ़। पावर ग्रिड कारपोरेशन आफ इंडिया लिमिटेड (पीजीसीआईएल) को राहत देते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) द्वारा लगाए गए 93.12 करोड़ रुपये के शुल्क की मांग को खारिज कर दिया है। हाईकोर्ट ने पीजीसीआईएल की याचिका स्वीकार करते हुए एचएसवीपी को निर्देश दिया कि वह कंपनी को नो ड्यूज सर्टिफिकेट जारी करे। पीजीसीआईएल को 1996 में फरीदाबाद में कार्यालय और आवासीय भवनों के निर्माण के लिए एचएसवीपी द्वारा भूमि आवंटित की गई थी लेकिन निर्माण प्रक्रिया में लगातार देरी होती रही। कंपनी ने सरकारी तंत्र में मौजूद जटिलताओं का परिणाम बताया। समय-समय पर विस्तार के लिए आवेदन देने और निर्धारित शुल्क जमा करने के बावजूद एचएसवीपी ने कई बार कंपनी को नोटिस जारी किए और 2012 में भूमि को जब्त कर लिया। हालांकि, कंपनी की अपील पर मुख्य प्रशासक ने उसके पक्ष में फैसला दिया और माना कि देरी कंपनी के नियंत्रण से बाहर थी। 2013 में एचएसवीपी ने एक नई नीति लागू की, जिसके तहत जब्त की गई जमीन को शुल्क देकर फिर से नियमित किया जा सकता था। 2016 में एचएसवीपी ने 4.09 करोड़ की राशि बताई, जिसे कंपनी ने जमा कर दिया। इसके बाद दिसंबर 2016 में निर्माण कार्य का ठेका दिया गया लेकिन एचएसवीपी ने भवन योजना की स्वीकृति नहीं दी और न ही विस्तार की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया। इसके उलट मई 2017 में एचएसवीपी ने 93.12 करोड़ की एक नई मांग भेज दी, जिसमें विस्तार शुल्क, एन्हांसमेंट चार्ज और सेवा कर शामिल थे।

अदालत ने स्पष्ट किया कि एचएसवीपी को पहले ही जमा की गई राशि और अदालत के पूर्व निर्देशों के बाद इस मामले को दोबारा खोलने का अधिकार नहीं है। अदालत ने यह भी माना कि 2011 से 2016 तक की अवधि में एचएसवीपी की निष्क्रियता के कारण ही निर्माण में देरी हुई। इसलिए इसे जीरो पीरियड माना जाना चाहिए। इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने एचएसवीपी की 93.12 करोड़ की मांग को निरस्त कर दिया और एचएसवीपी को निर्देश दिया कि वह पीजीसीआईएल को नो ड्यूज सर्टिफिकेट जारी करे।
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