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भारतीय संस्कृति की समझ को नई दृष्टि देती है डॉ. संतराम की पुस्तक : दहिया
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फोटो समाचार
सूचना, जनसंपर्क, भाषा विभाग के निदेशक डॉ. आदित्य दहिया ने भारतीय संस्कृति की अवधारणा पुस्तक का किया विमोचन
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। सूचना, जनसंपर्क, भाषा एवं संस्कृति विभाग के निदेशक डॉ. आदित्य दहिया ने शुक्रवार को चंडीगढ़ स्थित कार्यालय में पद्मश्री एवं वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. संतराम देशवाल की पुस्तक भारतीय संस्कृति की अवधारणा का विमोचन किया। इस मौके पर डॉ. दहिया ने कहा कि भारतीय संस्कृति केवल प्राचीन परंपराओं का परिचय मात्र नहीं है बल्कि यह हमारे जीवन-मूल्यों, सामाजिक चेतना व राष्ट्रीय पहचान की सुदृढ़ आधारशिला है। साहित्य इन मूल्यों को पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तांतरित करने का सबसे सशक्त माध्यम है। समकालीन दृष्टि से लिखी गई यह कृति पाठकों को अपनी जड़ों से जोड़ने और युवा पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत को गहराई से समझने का अवसर प्रदान करेगी। यह पुस्तक विद्यार्थियों, शोधार्थियों, साहित्य प्रेमियों व भारतीय संस्कृति में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी।
लेखक पद्मश्री डॉ. संतराम देशवाल ने बताया कि उनकी अब तक करीब 36 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। इनमें हरियाणवी साहित्य, लोक संस्कृति, भाषा, कविता, गजल, यात्रा-वृत्तांत, जीवनी, अनुवाद और समीक्षा जैसे विविध विषय शामिल हैं। डॉ. देशवाल की दो पुस्तकों को हरियाणा साहित्य अकादमी के श्रेष्ठ कृति पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। इसके अलावा साहित्य में उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें राज्य के सर्वोच्च साहित्यिक सम्मानों में शामिल महाकवि सूरदास आजीवन साहित्य साधना सम्मान, जनकवि मेहर सिंह पुरस्कार से भी नवाजा गया है। इस अवसर पर सूचना, जनसंपर्क एवं भाषा विभाग के संयुक्त निदेशक (प्रशासन) मानव मलिक व परियोजना निदेशक डॉ. पवन आर्य भी मौजूद रहे।
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सूचना, जनसंपर्क, भाषा विभाग के निदेशक डॉ. आदित्य दहिया ने भारतीय संस्कृति की अवधारणा पुस्तक का किया विमोचन
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। सूचना, जनसंपर्क, भाषा एवं संस्कृति विभाग के निदेशक डॉ. आदित्य दहिया ने शुक्रवार को चंडीगढ़ स्थित कार्यालय में पद्मश्री एवं वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. संतराम देशवाल की पुस्तक भारतीय संस्कृति की अवधारणा का विमोचन किया। इस मौके पर डॉ. दहिया ने कहा कि भारतीय संस्कृति केवल प्राचीन परंपराओं का परिचय मात्र नहीं है बल्कि यह हमारे जीवन-मूल्यों, सामाजिक चेतना व राष्ट्रीय पहचान की सुदृढ़ आधारशिला है। साहित्य इन मूल्यों को पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तांतरित करने का सबसे सशक्त माध्यम है। समकालीन दृष्टि से लिखी गई यह कृति पाठकों को अपनी जड़ों से जोड़ने और युवा पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत को गहराई से समझने का अवसर प्रदान करेगी। यह पुस्तक विद्यार्थियों, शोधार्थियों, साहित्य प्रेमियों व भारतीय संस्कृति में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी।
लेखक पद्मश्री डॉ. संतराम देशवाल ने बताया कि उनकी अब तक करीब 36 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। इनमें हरियाणवी साहित्य, लोक संस्कृति, भाषा, कविता, गजल, यात्रा-वृत्तांत, जीवनी, अनुवाद और समीक्षा जैसे विविध विषय शामिल हैं। डॉ. देशवाल की दो पुस्तकों को हरियाणा साहित्य अकादमी के श्रेष्ठ कृति पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। इसके अलावा साहित्य में उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें राज्य के सर्वोच्च साहित्यिक सम्मानों में शामिल महाकवि सूरदास आजीवन साहित्य साधना सम्मान, जनकवि मेहर सिंह पुरस्कार से भी नवाजा गया है। इस अवसर पर सूचना, जनसंपर्क एवं भाषा विभाग के संयुक्त निदेशक (प्रशासन) मानव मलिक व परियोजना निदेशक डॉ. पवन आर्य भी मौजूद रहे।
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