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Chandigarh-Haryana News: दिव्यांग बच्चों के लिए सभी निकायों में बनेंगे पार्क
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बजट की घोषणा पर काम शुरू, निकाय क्षेत्रों में नए या फिर पुराने पार्कों को करना है विकसित
अरुण शर्मा
चंडीगढ़। हरियाणा की सभी निकायों में विशेष (दिव्यांग) बच्चों के लिए उनकी आवश्यकता के अनुसार पार्क बनाए जाएंगे। वित्त वर्ष 2025-2026 के बजट सत्र में निकायों में संबंधित पार्क स्थापित करने की घोषणा हुई थी। फिलहाल योजना पर काम शुरू हो गया है। 87 में से अधिकतर निकायों ने एस्टीमेट तैयार कर लिए हैं। जो पार्क स्थापित होने हैं उनमें विशेष बच्चों के लिए व्हीलचेयर के साथ ही खेलने के लिए विशेष रूप से विकसित किया जाएगा।
मुख्यमंत्री नायब सैनी की घोषणा के अनुसार, सभी निकायों को विशेष बच्चों के लिए पार्क विकसित करने के लिए दो विकल्प दिए गए थे। एक निकाय किसी पुराने विकसित पार्क को विशेष बच्चों के लिए विकसित करा सकती है। दूसरा विकल्प यह भी था कि नए सिरे से किसी भी पार्क को आकर्षक रूप देकर तैयार किया जा सकता है। योजना को लेकर चार चरण तय किए थे और उसी के अनुसार शहरी स्थानीय निकाय विभाग की तरफ से समीक्षा की जा रही है। पहले चरण में 15 जून 2025 तक पार्कों स्थान या नाम तय करने थे। दूसरे चरण में 31 जुलाई तक योजना में शामिल प्रस्तावित पार्कों के लिए एस्टीमेट तैयार करने थे जबकि 30 सितंबर तक एजेंसियों को कार्य वितरित करने को कहा गया। योजना पर 30 सितंबर 2026 तक कार्य पूरा कराने का लक्ष्य रखा गया है। शहरी स्थानीय निकाय मंत्री विपुल गोयल ने कहा, बजट में घोषणा के अनुसार समय अवधि में कार्य पूरा कराने की योजना है। इसके अलावा भी कई दूसरी बजट की घोषणाओं पर कार्य जारी हैं।
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विशेष बच्चों के पार्कों में इस तरह से करने होते हैं इंतजाम
विशेष गुरुकुल के निदेशक सतीश कुमार का कहना है कि विशेष बच्चों के लिए पार्क स्थापित करने के लिए कई बातों को ध्यान रखा जाता है। जमीन का फर्श बेहद मुलायम रबड़ वाला रखना होता है जिससे विशेष बच्चों को खेलते समय चोट लगे तो नुकसान न हो। झूले अधिक ऊंचे नहीं होने चाहिए। सीढ़ी, झूला, स्लाॅप आदि के दोनों तरफ पकड़ने के लिए पाइप (पैडलर) होने चाहिए जिससे बच्चों को खेलते समय आसानी हो। रंगों की बात करें तो विशेष बच्चों को हरा, नीला, पीला और लाल रंग पसंद होता है लेकिन यह रंग चमकीले नहीं होने चाहिए। अधिक चमकीले रंगों का प्रतिबिंब भी विशेष बच्चों के लिए ठीक नहीं रहता, कई बार कुछ विशेष बच्चों पर इसका विपरीत प्रभाव होता है।
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अरुण शर्मा
चंडीगढ़। हरियाणा की सभी निकायों में विशेष (दिव्यांग) बच्चों के लिए उनकी आवश्यकता के अनुसार पार्क बनाए जाएंगे। वित्त वर्ष 2025-2026 के बजट सत्र में निकायों में संबंधित पार्क स्थापित करने की घोषणा हुई थी। फिलहाल योजना पर काम शुरू हो गया है। 87 में से अधिकतर निकायों ने एस्टीमेट तैयार कर लिए हैं। जो पार्क स्थापित होने हैं उनमें विशेष बच्चों के लिए व्हीलचेयर के साथ ही खेलने के लिए विशेष रूप से विकसित किया जाएगा।
मुख्यमंत्री नायब सैनी की घोषणा के अनुसार, सभी निकायों को विशेष बच्चों के लिए पार्क विकसित करने के लिए दो विकल्प दिए गए थे। एक निकाय किसी पुराने विकसित पार्क को विशेष बच्चों के लिए विकसित करा सकती है। दूसरा विकल्प यह भी था कि नए सिरे से किसी भी पार्क को आकर्षक रूप देकर तैयार किया जा सकता है। योजना को लेकर चार चरण तय किए थे और उसी के अनुसार शहरी स्थानीय निकाय विभाग की तरफ से समीक्षा की जा रही है। पहले चरण में 15 जून 2025 तक पार्कों स्थान या नाम तय करने थे। दूसरे चरण में 31 जुलाई तक योजना में शामिल प्रस्तावित पार्कों के लिए एस्टीमेट तैयार करने थे जबकि 30 सितंबर तक एजेंसियों को कार्य वितरित करने को कहा गया। योजना पर 30 सितंबर 2026 तक कार्य पूरा कराने का लक्ष्य रखा गया है। शहरी स्थानीय निकाय मंत्री विपुल गोयल ने कहा, बजट में घोषणा के अनुसार समय अवधि में कार्य पूरा कराने की योजना है। इसके अलावा भी कई दूसरी बजट की घोषणाओं पर कार्य जारी हैं।
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विशेष बच्चों के पार्कों में इस तरह से करने होते हैं इंतजाम
विशेष गुरुकुल के निदेशक सतीश कुमार का कहना है कि विशेष बच्चों के लिए पार्क स्थापित करने के लिए कई बातों को ध्यान रखा जाता है। जमीन का फर्श बेहद मुलायम रबड़ वाला रखना होता है जिससे विशेष बच्चों को खेलते समय चोट लगे तो नुकसान न हो। झूले अधिक ऊंचे नहीं होने चाहिए। सीढ़ी, झूला, स्लाॅप आदि के दोनों तरफ पकड़ने के लिए पाइप (पैडलर) होने चाहिए जिससे बच्चों को खेलते समय आसानी हो। रंगों की बात करें तो विशेष बच्चों को हरा, नीला, पीला और लाल रंग पसंद होता है लेकिन यह रंग चमकीले नहीं होने चाहिए। अधिक चमकीले रंगों का प्रतिबिंब भी विशेष बच्चों के लिए ठीक नहीं रहता, कई बार कुछ विशेष बच्चों पर इसका विपरीत प्रभाव होता है।
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