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Chandigarh-Haryana News: बिजली निजीकरण और प्रीपेड स्मार्ट मीटरिंग के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन का ऐलान
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फोटो -
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। बिजली निजीकरण, ड्राफ्ट बिजली (संशोधन) बिल 2025 और प्रीपेड स्मार्ट मीटरिंग के विरोध में किसान, मजदूर और बिजली कर्मचारी-इंजीनियर एकजुट हो गए हैं। इन संगठनों ने देशव्यापी आंदोलन का ऐलान किया है। यह फैसला संयुक्त किसान मोर्चा, केंद्रीय ट्रेड यूनियन और नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी एम्पलाइज एंड इंजीनियर्स की नई दिल्ली स्थित बीटीआर भवन में आयोजित बैठक में लिया गया।
आंदोलन के पहले चरण में जनवरी 2026 में सभी राज्यों में संयुक्त सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे। फरवरी में राज्यव्यापी धरने, प्रदर्शन और रैलियां होंगी। इसके बाद 18 मार्च को दिल्ली कूच करते हुए रामलीला मैदान में विशाल रैली आयोजित की जाएगी। बैठक में बिजली वितरण प्रणाली को निजी हाथों में सौंपने की कोशिशों की कड़ी आलोचना की गई। कर्मचारी नेताओं ने कहा कि निजीकरण और प्रीपेड स्मार्ट मीटरिंग से किसानों, मजदूरों और आम उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा और बिजली का अधिकार कमजोर होगा।
एनसीसीओईईई के संयोजक सुदीप दत्ता और ईईएफआई के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुभाष लांबा ने बताया कि बैठक का उद्देश्य बिजली क्षेत्र के कर्मचारियों और उपभोक्ताओं के बीच एकता बनाकर ऊर्जा सुरक्षा की रक्षा करना है। संगठनों ने उत्तर प्रदेश समेत विभिन्न राज्यों में बिजली निजीकरण के प्रयासों पर भी गंभीर चिंता जताई और चेतावनी दी कि मांगें न मानी गईं तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। बिजली निजीकरण, ड्राफ्ट बिजली (संशोधन) बिल 2025 और प्रीपेड स्मार्ट मीटरिंग के विरोध में किसान, मजदूर और बिजली कर्मचारी-इंजीनियर एकजुट हो गए हैं। इन संगठनों ने देशव्यापी आंदोलन का ऐलान किया है। यह फैसला संयुक्त किसान मोर्चा, केंद्रीय ट्रेड यूनियन और नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी एम्पलाइज एंड इंजीनियर्स की नई दिल्ली स्थित बीटीआर भवन में आयोजित बैठक में लिया गया।
आंदोलन के पहले चरण में जनवरी 2026 में सभी राज्यों में संयुक्त सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे। फरवरी में राज्यव्यापी धरने, प्रदर्शन और रैलियां होंगी। इसके बाद 18 मार्च को दिल्ली कूच करते हुए रामलीला मैदान में विशाल रैली आयोजित की जाएगी। बैठक में बिजली वितरण प्रणाली को निजी हाथों में सौंपने की कोशिशों की कड़ी आलोचना की गई। कर्मचारी नेताओं ने कहा कि निजीकरण और प्रीपेड स्मार्ट मीटरिंग से किसानों, मजदूरों और आम उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा और बिजली का अधिकार कमजोर होगा।
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एनसीसीओईईई के संयोजक सुदीप दत्ता और ईईएफआई के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुभाष लांबा ने बताया कि बैठक का उद्देश्य बिजली क्षेत्र के कर्मचारियों और उपभोक्ताओं के बीच एकता बनाकर ऊर्जा सुरक्षा की रक्षा करना है। संगठनों ने उत्तर प्रदेश समेत विभिन्न राज्यों में बिजली निजीकरण के प्रयासों पर भी गंभीर चिंता जताई और चेतावनी दी कि मांगें न मानी गईं तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
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