Haryana: जितना ग्राउंड वाटर रिचार्ज किया गया, उससे ज्यादा निकाला गया... कैसे सुधरेगा भूजल स्तर
हरियाणा जल संसाधन प्राधिकरण की चेयरपर्सन केशनी आनंद अरोड़ा ने बताया, पानी बचाने के लिए राज्य के सभी विभागों की ओर से पुरजोर कोशिश की जा रही है। इसका परिणाम सामने है कि ग्राउंड वाटर रिचार्ज में 11 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।
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भूजल पुनर्भरण (ग्राउंड वाटर रिचार्ज ) के क्षेत्र में हरियाणा के हालात अब थोड़े बदलने लगे हैं। साल 2023 से ये 869053.15 हेक्टेयर मीटर से 2024 में 9,35,857.56 हेक्टेयर मीटर हो गया है, जो करीब 11 फीसदी है। यह हरियाणा जल संसाधन प्राधिकरण (एचडब्ल्यूआरए) के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि है। वहीं, चिंता की एक बात यह भी है कि राज्य में भूजल का दोहन जारी है।
भूजल प्रकोष्ठ, सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग व केंद्रीय भूजल बोर्ड की संयुक्त रिपोर्ट के मुताबिक इस अवधि में जितना भूजल पुनर्भरण किया गया, उससे कहीं ज्यादा भूजल निकाल दिया गया। राज्य में साल भर में 10.32 बिलियन क्यूबिक मीटर (बीसीएम) सालाना ग्राउंड वाटर रिचार्ज हुआ। इस अवधि में 9.36 बिलियन क्यूबिक मीटर (बीसीएम) भूजल निकाला जाना चाहिए था, मगर पूरे साल में 12.72 बीसीएम पानी जमीन से निकाला गया। हरियाणा में कुल भूजल निकासी दर 135.7 फीसदी से बढ़कर 136 फीसदी हो गया है।
हरियाणा के 88 ब्लाॅक रेड जोन में
राज्य की स्थिति ऐसी है कि 143 ब्लॉक में से सिर्फ 36 ब्लॉक ही सेफ जोन में हैं। 88 ब्लॉक रेड जोन में हैं। यानी इन ब्लॉक में 100 फीसदी से ज्यादा भूजल निकाला जा रहा है। 11 ब्लॉक में क्रिटिकल जोन में हैं। जहां 90 से 100 फीसदी पानी भूजल निकाला जा रहा है। 8 ब्लॉक में 70 से 90 फीसदी के बीच भूजल निकासी दर्ज की गई है। हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि हरियाणा में पानी बचाने की दिशा
में एक बेहतरीन कदम उठाया जा रहा है। पिछले दो साल में हरियाणा में 5.8 बिलियन क्यूबिक मीटर बचाया जा चुका है। अगले दो साल के लिए लक्ष्य भी तय कर लिया गया है, मगर दोहन को रोकने के लिए तेजी से कदम उठाने की जरूरत है।
हरियाणा जल संसाधन प्राधिकरण की चेयरपर्सन केशनी आनंद अरोड़ा ने बताया, पानी बचाने के लिए राज्य के सभी विभागों की ओर से पुरजोर कोशिश की जा रही है। इसका परिणाम सामने है कि ग्राउंड वाटर रिचार्ज में 11 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। जहां पानी का धड़ल्ले से दोहन किया जा रहा है, वहां निगरानी बढ़ाने के साथ-साथ फ्रेश वाटर की जगह ट्रीटटेड पानी के इस्तेमाल की प्रक्रिया बढ़ाई जा रही है। इससे लगता है कि आने वाले साल में कुछ कामयाबी हमें और मिलने के आसार हैं।
ऐसे बढ़ा भूजल पुनर्भरण
1. सिंचाई विभाग की ओर से 100 से ज्यादा स्टोरेज बनाए गए
2. चार लाख एकड़ में धान की सीधी बुवाई
3. ट्रीटेड पानी का 40 फीसदी तक किया जा रहा इस्तेमाल
4. शहर व गांव में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाए गए
5. 1597 तालाबों को पुनर्जीवित किया गया है।
6. 1050 पुनर्भरण गड्ढे खोदे गए हैं
इन जिलों के 88 ब्लॉक में सर्वाधिक भूजल दोहन
अंबाला : अंबाला -1, बराड़ा, नारायणगढ़, साहा
भिवानी : बहल, कैरू, लोहारू, तोशाम
दादरी : बाढड़ा, जोहरू
फरीदाबाद : बल्लभगढ़, फरीदाबाद, फरीदाबाद अर्बन
फतेहाबाद : फतेहाबाद, रतिया, टोहाना, जाखल, नागपुर, भूना
गुरुग्राम : फारुखनगर, पटौदी, सोहाना, गुरुग्राम, गुरुग्राम अर्बन
हिसार : नारनौद
जींद : अलेवा, उचाना, उझाना, सफीदों, जींद
कैथल: सिवान, गुल्हा, कैथल, कलायत, पुंडरी, राजौंद, ढांड
कुरुक्षेत्र : इस्लाइमाबाद, बबैन, लाडवा, पिहोवा, शाहबाद, थानेसर, पिपली
महेंद्रगढ़ : कैनाना, महेंद्रगढ़, सीहमा, अटेली, नांगल, नारनौल, नांगल चौधरी
मेवात : तावडू
पलवल : बढौली, पृथला
पानीपत : बापौली, इसराना, मतलौडा, पानीपत, समालखा, सानौली खुर्द
रेवाड़ी: खोल, रेवाड़ी, नाहर, धारूखेड़ा, जातूसाना, बावल
सिरसा : रानिया, सिरसा, नाथूसेरी चौपटा, उडान, डबवाली, एलनाबाद
सोनीपत: गन्नौर, सोनीपत, राई, मुरथल
यमुनानगर: जगाधरी, मुस्तफाबाद, बिलासपुर, साढौरा व रादौर