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करवाचौथ: सुहागिन करेंगी पति की लंबी उम्र की कामना, जानिए पूजा का शुभ मुहूर्त, हरियाणा में इस समय निकलेगा चांद

Wed, 28 Oct 2026 10:29 AM IST
Naveen अमर उजाला नेटवर्क, हरियाणा
अमर उजाला नेटवर्क, हरियाणा Published by: Naveen Updated Wed, 28 Oct 2026 10:29 AM IST
सार

करवाचौथ के दिन व्रती महिलाओं को चंद्रदेव के दर्शन और अर्घ्य देने का बेसब्री से इंतजार रहता है। हरियाणा के विभिन्न जिलों में भौगोलिक स्थिति के अनुसार चांद निकलने का समय लगभग 8:05 बजे से 8:20 बजे के बीच रहने का अनुमान है।

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Married women will pray for husbands long lives on Karwa Chauth check moon will rise in Haryana.
करवाचौथ (सांकेतिक) - फोटो : AI

विस्तार

हरियाणा सुहाग के पावन पर्व करवाचौथ को लेकर महिलाओं में भारी उत्साह देखने को मिल रहा है। बाजारों में मेहंदी लगवाने और पूजा की सामग्री खरीदने के लिए भारी भीड़ रही। प्रदेश के ग्रामीण अंचलों से लेकर शहरों तक सुहागिनें निर्जला व्रत रखकर अपने पति की दीर्घायु, स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की प्रार्थना करेंगी।

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हरियाणा के प्रमुख शहरों में चांद निकलने का अनुमानित समय
करवाचौथ के दिन व्रती महिलाओं को चंद्रदेव के दर्शन और अर्घ्य देने का बेसब्री से इंतजार रहता है। हरियाणा के विभिन्न जिलों में भौगोलिक स्थिति के अनुसार चांद निकलने का समय लगभग 8:05 बजे से 8:20 बजे के बीच रहने का अनुमान है:

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  •     गुरुग्राम व फरीदाबाद: रात 8:08 बजे से 8:12 बजे
  • रोहतक, झज्जर व सोनीपत: रात 8:10 बजे से 8:14 बजे
  • अंबाला, पंचकूला व करनाल: रात 8:06 बजे से 8:10 बजे
  • हिसार, भिवानी व सिरसा: रात 8:15 बजे से 8:20 बजे
  • रेवाड़ी, नारनौल व महेंद्रगढ़: रात 8:12 बजे से 8:16 बजे

(नोट: स्थानीय मौसम या धुंध/बादल की स्थिति के आधार पर दर्शन के समय में हल्का अंतर हो सकता है।)

पूजा का शुभ मुहूर्त और पारंपरिक विधि
हरियाणा में करवाचौथ की पूजा सांझ ढलते ही सामूहिक रूप से और पारिवारिक परंपरा के अनुसार की जाती है।

शुभ मुहूर्त
प्रदोष काल पूजा मुहूर्त: शाम 5:45 बजे से शाम 7:02 बजे तक

पूजा विधि

  • दीवार पर गेरू व पिसे हुए चावल के घोल से करवा माता (चौथ माता) का चित्र बनाया जाता है या कैलेंडर/तस्वीर स्थापित की जाती है।
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  • पूजा की चौकी पर मां गौरी और भगवान गणेश की प्रतिमा रखें। मिट्टी या पीतल के करवे में जल भरकर रखें, उसके ढक्कन पर गेहूं या शक्कर रखें और ऊपर दीपक प्रज्वलित करें।
  • शाम के समय सभी सुहागिनें पारंपरिक वेशभूषा (लाल/पीले परिधान) और सोलह श्रृंगार कर एक साथ बैठती हैं। हाथ में गेहूं के दाने लेकर करवाचौथ की पौराणिक कथा सुनी जाती है।
  • हरियाणा और पंजाब क्षेत्र में पूजा के दौरान सात बार करवा या थाली फेरने (बदलने) की विशेष रस्म होती है, साथ ही पारंपरिक लोकगीत गाए जाते हैं।

अर्घ्य और व्रत खोलने के तौर-तरीके

  • चंद्र दर्शन: चांद निकलने पर छलनी की ओट से पहले जलते हुए दीपक और फिर चंद्रमा के दर्शन किए जाते हैं।
  • अर्घ्य अर्पण: लोटे के जल से चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाता है, रोली-अक्षत अर्पित किए जाते हैं और पति की लंबी उम्र की प्रार्थना की जाती है।
  • पति दर्शन व आशीर्वाद: इसके बाद उसी छलनी से पति का मुख देखा जाता है और पति के हाथों से जल पीकर व मीठा खाकर निर्जला व्रत खोला जाता है।
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