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Hindi News ›   Haryana ›   Chandigarh-Haryana News ›   Key decisions in the Education Department will now be taken only with the Chief Minister's approval.

Chandigarh-Haryana News: शिक्षा विभाग में अहम फैसले अब मुख्यमंत्री की मंजूरी से ही होंगे

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- विभाग के मामलों में सीएम से लेकर अफसरों तक के अधिकार स्पष्ट रूप से तय किए गए
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। स्कूल शिक्षा विभाग में फाइलों के निपटारे और अधिकारियों के अधिकार अब स्पष्ट रूप से तय कर दिए गए हैं। यह निर्धारित किया गया है कि किस तरह के खास मामलों पर मुख्यमंत्री या शिक्षा मंत्री की मंजूरी जरूरी होगी और किन मामलों का निपटारा विभाग के प्रशासनिक अधिकारियों के स्तर पर किया जा सकेगा।


स्कूल शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव की तरफ से जारी आदेश में यह भी व्यवस्था की गई है कि मंत्री चंडीगढ़ से बाहर हों और कोई मामला अत्यंत जरूरी हो तो संबंधित प्रशासनिक सचिव उसे निपटा सकेंगे। मंत्री की वापसी पर ऐसे मामलों की जानकारी उन्हें दी जाएगी। नई व्यवस्था के अनुसार महत्वपूर्ण नीतिगत मामलों, कानून और नियमों में बदलाव, विधानसभा के तारांकित प्रश्न, संसद के प्रश्नों के जवाब, समूह-ए अधिकारियों की नियुक्ति, पदोन्नति, बर्खास्तगी, निलंबन और बड़े अधिकारियों के स्थानांतरण जैसे मामलों की मंजूरी मुख्यमंत्री स्तर से मिलेगी। सरकारी स्कूलों या प्रशिक्षण संस्थानों को खोलने-बंद करने, विभागीय नीति और निजी शिक्षण संस्थानों को सरकारी नियंत्रण में लेने के मामले भी मुख्यमंत्री के समक्ष रखे जाएंगे।
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10 लाख से ऊपर के काम, समूह बी,सी व डी के कर्मचारियों पर एक्शन पर मंत्री फैसला लेंगे
शिक्षा मंत्री के स्तर पर विधानसभा के अतारांकित प्रश्न, 10 लाख रुपये से अधिक की खरीद और बड़े कार्यों की प्रशासनिक मंजूरी, शैक्षणिक संस्थानों के भवन निर्माण, एक योजना से दूसरी योजना में धन स्थानांतरण और समूह-बी, सी व डी कर्मचारियों की नियुक्ति, पदोन्नति, निलंबन, दंड और बर्खास्तगी जैसे मामले में फैसला लिया जाएगा। निजी स्कूलों को अनुदान, मान्यता के नियमों में छूट और सरकारी स्कूलों को सहशिक्षा संस्थान घोषित करने के मामले भी मंत्री स्तर पर तय होंगे।
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अतिरिक्त मुख्य सचिव या प्रधान सचिव स्तर पर अपील-रिवीजन, समूह-ए अधिकारियों का एसीपी, समूह-बी अधिकारियों को छोटे दंड, वित्तीय अनियमितताओं और सरकारी धन या सामान के नुकसान से जुड़े निर्धारित सीमा तक के मामलों का निपटारा होगा। वहीं सचिव या विशेष सचिव व संयुक्त सचिव या अतिरिक्त सचिव स्तर पर छोटी वित्तीय हानि, कर्मचारियों की सेवा संबंधी शिकायतें, छुट्टी, नाम या जन्मतिथि में बदलाव, निजी स्कूलों के खिलाफ शिकायतें और अन्य नियमित प्रशासनिक मामले निपटाए जाएंगे।
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