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Chandigarh-Haryana News: फसल बीमा योजना के मामलों में अब बीमा कंपनियों की नहीं चलेगी मनमानी
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राज्य सरकार ने शिकायतों व विवादों की सुनवाई के लिए राज्यस्तरीय शिकायत निवारण समिति का गठन किया
बीमा कंपनियों ने निर्णय नहीं माना तो निर्णय की तिथि से प्रतिदिन दो हजार रुपये के हिसाब से लगेगा जुर्माना
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना समेत फसल बीमा पर आधारित अन्य योजनाओं की शिकायतों व विवादों पर अब बीमा कंपनियों की मनमानी नहीं चलेगी। राज्य सरकार ने इसके लिए कृषि विभाग के प्रधान सचिव की अगुवाई में राज्यस्तरीय शिकायत निवारण समिति (एसजीआरसी) का गठन किया है। कमेटी में कुल दस सदस्यों को शामिल किया गया है। कृषि विभाग के प्रधान सचिव की ओर से इस बारे में अधिसूचना जारी कर दी गई है। साथ ही कई दिशा-निर्देश भी जारी किए गए हैं।
इन दिशा-निर्देशों के मुताबिक एसजीआरसी जिलास्तर पर लिए गए निर्णय व रेफर मामलों पर विचार करेगा। बीमा कंपनियों को एसजीआरसी का निर्णय 30 दिन के भीतर मानना होगा। यदि बीमा कंपनियों ने निर्णय नहीं माना तो निर्णय की तिथि से प्रतिदिन दो हजार रुपये के हिसाब से जुर्माना लगाया जाएगा। जिलास्तर की कमेटी शिकायकर्ता से प्राप्त आवेदन से 15 दिन के भीतर विवाद में अंतिम निर्णय देगी और इस निर्णय को राज्यस्तरीय शिकायत निवारण समिति को सूचित करेगी। 15 दिन के बाद समिति किसी भी आवेदन पर विचार नहीं करेगी। यह समिति राज्य में योजना की अवधि व सभी लंबित शिकायतों के समाधान तक प्रभावी रहेगी। समिति की बैठक साल में दो बार होगी। समिति के सभी सदस्य अपने-अपने विभागों से दैनिक भत्ता प्राप्त करेंगे। राज्य सरकार की ओर से बनाई कमेटी में कृषि विभाग के निदेशक, कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक, बैंकर समिति हरियाणा के संयोजक, नाबार्ड के मुख्य प्रबंधक, कृषि विभाग में कार्यरत उप जिला अटॉर्नी, जिले के संबंधित उपनिदेशक कृषि, बीमा कंपनियों के प्रतिनिधि व अन्य शामिल होंगे।
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बीमा कंपनियों ने निर्णय नहीं माना तो निर्णय की तिथि से प्रतिदिन दो हजार रुपये के हिसाब से लगेगा जुर्माना
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना समेत फसल बीमा पर आधारित अन्य योजनाओं की शिकायतों व विवादों पर अब बीमा कंपनियों की मनमानी नहीं चलेगी। राज्य सरकार ने इसके लिए कृषि विभाग के प्रधान सचिव की अगुवाई में राज्यस्तरीय शिकायत निवारण समिति (एसजीआरसी) का गठन किया है। कमेटी में कुल दस सदस्यों को शामिल किया गया है। कृषि विभाग के प्रधान सचिव की ओर से इस बारे में अधिसूचना जारी कर दी गई है। साथ ही कई दिशा-निर्देश भी जारी किए गए हैं।
इन दिशा-निर्देशों के मुताबिक एसजीआरसी जिलास्तर पर लिए गए निर्णय व रेफर मामलों पर विचार करेगा। बीमा कंपनियों को एसजीआरसी का निर्णय 30 दिन के भीतर मानना होगा। यदि बीमा कंपनियों ने निर्णय नहीं माना तो निर्णय की तिथि से प्रतिदिन दो हजार रुपये के हिसाब से जुर्माना लगाया जाएगा। जिलास्तर की कमेटी शिकायकर्ता से प्राप्त आवेदन से 15 दिन के भीतर विवाद में अंतिम निर्णय देगी और इस निर्णय को राज्यस्तरीय शिकायत निवारण समिति को सूचित करेगी। 15 दिन के बाद समिति किसी भी आवेदन पर विचार नहीं करेगी। यह समिति राज्य में योजना की अवधि व सभी लंबित शिकायतों के समाधान तक प्रभावी रहेगी। समिति की बैठक साल में दो बार होगी। समिति के सभी सदस्य अपने-अपने विभागों से दैनिक भत्ता प्राप्त करेंगे। राज्य सरकार की ओर से बनाई कमेटी में कृषि विभाग के निदेशक, कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक, बैंकर समिति हरियाणा के संयोजक, नाबार्ड के मुख्य प्रबंधक, कृषि विभाग में कार्यरत उप जिला अटॉर्नी, जिले के संबंधित उपनिदेशक कृषि, बीमा कंपनियों के प्रतिनिधि व अन्य शामिल होंगे।
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