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Hindi News ›   Haryana ›   Chandigarh-Haryana News ›   How to control dengue and chikungunya, 20 out of 22 insect collector posts are vacant.

Chandigarh-Haryana News: डेंगू-चिकनगुनिया पर कैसे लगे लगाम, कीट संग्रहकर्ता के 22 में से 20 पद खाली

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सरकार ने काम चलाने के लिए एनएचएम के माध्यम से आठ संविदा कीट संग्रहकर्ता की कर रखी है तैनाती
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डेंगू का सीजन शुरू, आने लगे हैं केस
चंडीगढ़। हरियाणा में हर साल मच्छर जनित बीमारियां नया रिकॉर्ड बनाती हैं। सैकड़ों लोगों को अस्पतालों में हजारों रुपये फूंकने पड़ते हैं। कईयों की जान भी चली जाती हैं। मगर सरकार इन बीमारियों के प्रति गंभीर नहीं दिखती है। राज्य में मच्छरों को पकड़कर उसके फैलने की तीव्रता और शोध करने वाले कीट संग्रहकर्ता (इंसेक्ट कलेक्टर) के पद खाली हैं। राज्य में ऐसे कुल मिलाकर 22 पद हैं। लेकिन इनमें से सिर्फ दो ही पद भरे गए हैं। हालांकि, सरकार ने काम चलाने के लिए एनएचएम के माध्यम से आठ संविदा कीट संग्रहकर्ता की भर्ती की हुई है, लेकिन इन पर भी काम का बोझ ज्यादा है। किसी पर दो जिले का प्रभार है तो किसी पर तीन जिले का। वहीं, स्वास्थ्य मंत्री आरती राव का कहना है कि इन पदों पर भर्ती प्रक्रिया विचाराधीन है। ये पद जल्द ही भरे जाएंगे।

हरियाणा में कीट संग्रहकर्ता की हर जिले में तैनाती का प्रावधान है। 22 जिलों में 22 अधिकारी होने चाहिए। मगर पिछले कई सालों से हरियाणा सरकार ने कीट संग्रहकर्ता की भर्ती ही नहीं की, जो तैनात थे, वे रिटायर हो गए। सरकार ने एनएचएम के माध्यम से चारों जोन में सिर्फ दो-दो की तैनाती कर रखी है। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक यमुनानगर में दो, हिसार में दो, रोहतक में दो और दो नूंह में तैनात है।
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क्यों महत्वपूर्ण होते हैं कीट संग्रहकर्ता

मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया, पीला बुखार और जापानी इंसेफेलाइटिस बीमारियां मच्छर के काटने से होती हैं। जलवायु परिवर्तन की वजह से मच्छर के स्वभाव और उनकी फैलने की तीव्रता में हर दूसरे साल बदलाव आ जाता है। बीमारियों की रोकथाम के लिए इन मच्छरों के व्यवहार को पहचानना जरूरी है। इसके लिए इन्हें पकड़कर रिसर्च करनी होती है। कीट संग्रहकर्ता ही इन मच्छरों को घर-घर जाकर ढूंढ़ते हैं और पकड़कर संरक्षित करते हैं, ताकि लैब में रिसर्च की जा सके। रिसर्च में ही पता चलता है कि मच्छर किस प्रजाति का है और उसकी फैलने की कितनी तीव्रता है, ताकि महामारी फैलने से पहले स्वास्थ्य विभाग जरूरी इंतजाम कर सके। साथ ही लोगों को भी जागरूक किया जा सके।
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18 बायोलॉजिस्ट भी नहीं है

हरियाणा में कीट संग्रहकर्ता के अलावा बायोलाॅजिस्ट के भी पद खाली हैं। राज्य में बायोलॉजिस्ट के कुल 22 पद हैं। इनमें से 18 पद खाली हैं। बायोलाॅजिस्ट की भी इन बीमारियों को रोकने में अहम भूमिका होती है। डेंगू, मलेरिया और इंसेफेलाइटिस के मामले में बायोलाॅजिस्ट मच्छरों को समझने और नियंत्रण की रणनीति विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वहीं, फील्ड वर्कर के 139 में से 115 पद खाली हैं।




मौसम में आए बदलाव की वजह से आने लगे डेंगू के केस

आमतौर पर डेंगू के केस मानसून सीजन के बाद आते हैं, मगर मौसम में आए बदलाव की वजह से डेंगू के केस अप्रैल महीने में ही आने लगे हैं। अब तक डेंगू के 20 केस आ चुके हैं। इनमें हिसार में एक, कैथल में तीन, करनाल में पांच, नूंह में एक, रेवाड़ी में पांच, सोनीपत में एक और रोहतक में दो कंफर्म केस आए हैं। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि हरियाणा में कुछ अंतराल के बाद बारिश दर्ज की जा रही है। इस वजह से तापमान सामान्य से नीचे दर्ज किए जा रहे हैं और नमी की मात्रा भी ज्यादा है, जो डेंगू के मच्छरों के लिए अनुकूल है। तापमान बढ़ने के बाद डेंगू के मच्छर खत्म हो जाएंगे। डायरेक्टर मलेरिया डाॅ. विजय बातिश का कहना है कि डेंगू के केस में लोगों को ज्यादा सतर्क होने की जरूरत है। डेंगू का मच्छर साफ पानी में पैदा होता है। इसलिए पानी को ढंक कर रखे और कहीं भी पानी भरने न दें।
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