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Chandigarh-Haryana News: बहू की बेदखली पर डीएम को फटकार, आदेश को हाईकोर्ट ने किया रद्द
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-मामले को नए सिरे से निर्णय के लिए मैंटेनेंस ट्रिब्यूनल भेजने का आदेश
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। गुरुग्राम के जिला मजिस्ट्रेट के बहू को घर से बेदखल करने के आदेश को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने रद्द करते हुए कहा है कि मामला पहले एसडीएम-सह-मेंटेनेंस ट्रिब्यूनल के समक्ष जाना चाहिए था। कोर्ट ने जिला मजिस्ट्रेट को निर्देश दिया है कि वह मूल आवेदन एसडीएम-कम-मेंटेनेंस ट्रिब्यूनल को स्थानांतरित करें, जो संबंधित कानूनों के तहत दोबारा निर्णय लेगा। कोर्ट ने सभी पक्षों को 26 नवंबर को मेंटेनेंस ट्रिब्यूनल के समक्ष पेश होने के लिए कहा है।
याचिकाकर्ता बहू ने 30 मार्च 2022 के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें जिला मजिस्ट्रेट ने याचिकाकर्ता और उसके पति को घर खाली करने का निर्देश दिया था। याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि जिला मजिस्ट्रेट ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर यह आदेश दिया है। माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम, 2007 और हरियाणा भरण-पोषण माता-पिता और वरिष्ठ नागरिक नियम, 2009 के तहत यह मामला एसडीएम-कम-मेंटेनेंस ट्रिब्यूनल के पास जाना चाहिए था जबकि जिला मजिस्ट्रेट अपीलीय प्राधिकारी के रूप में कार्य करता है। सरकार के वकील ने भी इस बात से सहमति जताई कि आवेदन एसडीएम मेंटेनेंस ट्रिब्यूनल के समक्ष दाखिल किया जाना चाहिए था। कोर्ट ने कहा कि इस चरण पर वह मामले के गुण-दोष पर नहीं जा रही है क्योंकि याचिकाकर्ता की मुख्य दलील में दम है। इसलिए, जिला मजिस्ट्रेट का आदेश रद्द किया जाता है और उसे निर्देश दिया जाता है कि वह आदेश की प्रमाणित प्रति प्राप्त होने पर आवेदन तुरंत एसडीएम मेंटेनेंस ट्रिब्यूनल को भेजें। ट्रिब्यूनल को निर्देश दिया गया है कि वह सभी पक्षों को सुनने और नियमों का पालन करने के बाद मामले पर नया निर्णय दे।
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। गुरुग्राम के जिला मजिस्ट्रेट के बहू को घर से बेदखल करने के आदेश को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने रद्द करते हुए कहा है कि मामला पहले एसडीएम-सह-मेंटेनेंस ट्रिब्यूनल के समक्ष जाना चाहिए था। कोर्ट ने जिला मजिस्ट्रेट को निर्देश दिया है कि वह मूल आवेदन एसडीएम-कम-मेंटेनेंस ट्रिब्यूनल को स्थानांतरित करें, जो संबंधित कानूनों के तहत दोबारा निर्णय लेगा। कोर्ट ने सभी पक्षों को 26 नवंबर को मेंटेनेंस ट्रिब्यूनल के समक्ष पेश होने के लिए कहा है।
याचिकाकर्ता बहू ने 30 मार्च 2022 के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें जिला मजिस्ट्रेट ने याचिकाकर्ता और उसके पति को घर खाली करने का निर्देश दिया था। याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि जिला मजिस्ट्रेट ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर यह आदेश दिया है। माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम, 2007 और हरियाणा भरण-पोषण माता-पिता और वरिष्ठ नागरिक नियम, 2009 के तहत यह मामला एसडीएम-कम-मेंटेनेंस ट्रिब्यूनल के पास जाना चाहिए था जबकि जिला मजिस्ट्रेट अपीलीय प्राधिकारी के रूप में कार्य करता है। सरकार के वकील ने भी इस बात से सहमति जताई कि आवेदन एसडीएम मेंटेनेंस ट्रिब्यूनल के समक्ष दाखिल किया जाना चाहिए था। कोर्ट ने कहा कि इस चरण पर वह मामले के गुण-दोष पर नहीं जा रही है क्योंकि याचिकाकर्ता की मुख्य दलील में दम है। इसलिए, जिला मजिस्ट्रेट का आदेश रद्द किया जाता है और उसे निर्देश दिया जाता है कि वह आदेश की प्रमाणित प्रति प्राप्त होने पर आवेदन तुरंत एसडीएम मेंटेनेंस ट्रिब्यूनल को भेजें। ट्रिब्यूनल को निर्देश दिया गया है कि वह सभी पक्षों को सुनने और नियमों का पालन करने के बाद मामले पर नया निर्णय दे।
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