फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Chandigarh-Haryana News ›   High Court Order prisoner cannot penalized for co accused absconding decision on parole

हाईकोर्ट का आदेश: सह-अभियुक्त के फरार होने की सजा कैदी को नहीं दी जा सकती, पैरोल पर नए सिरे से लें फैसला

Fri, 04 Sep 2026 12:54 PM IST
Nivedita न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: Nivedita Updated Fri, 04 Sep 2026 12:54 PM IST
सार

अदालत ने कहा कि हर कैदी के मामले का आकलन उसके अपने आचरण और उसके खिलाफ उपलब्ध सामग्री के आधार पर होना चाहिए। केवल अनुमान या आशंका के आधार पर पैरोल रोकना उचित नहीं है।

विज्ञापन
High Court Order prisoner cannot penalized for co accused absconding decision on parole
पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि किसी कैदी को उसके सह-अभियुक्त के आचरण के लिए जिम्मेदार ठहराकर पैरोल जैसे वैधानिक अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। 
विज्ञापन


अदालत ने कहा कि केवल यह आशंका जताना कि कैदी के जेल से बाहर आने पर शांति भंग हो सकती है, पैरोल खारिज करने के लिए पर्याप्त नहीं है। इसके पीछे ठोस और विश्वसनीय सामग्री होना जरूरी है।
विज्ञापन


राहुल की याचिका पर सुनवाई करते हुए करनाल के मंडलायुक्त का 15 जुलाई 2026 का आदेश रद्द कर दिया। इस आदेश के जरिये राहुल की 10 सप्ताह की पैरोल अर्जी खारिज की गई थी। हाईकोर्ट ने अधिकारियों को चार सप्ताह के भीतर उसकी अर्जी पर कानून के अनुसार नए सिरे से फैसला लेने का निर्देश दिया। 
विज्ञापन
विज्ञापन


राहुल हत्या समेत गंभीर धाराओं में उम्रकैद की सजा काट रहा है। सोनीपत के गन्नौर थाने में दिसंबर 2016 में दर्ज मामले में उसे 2018 में दोषी ठहराया गया था। उसकी अपील हाईकोर्ट में लंबित है। परिवार की जिम्मेदारियों और सामाजिक संबंधों के लिए उसने 10 सप्ताह की नियमित पैरोल मांगी थी।

प्रशासन ने अर्जी खारिज करते समय उसके खिलाफ दर्ज छह मामलों और सह-अभियुक्त गोपाल उर्फ गोपी के आचरण को भी आधार बनाया। गोपी 40 दिन की पैरोल पर बाहर जाने के बाद जेल वापस नहीं लौटा था। हाईकोर्ट ने पाया कि राहुल के खिलाफ बताए गए छह मामलों में से पांच में वह बरी हो चुका है। जेल में उसका आचरण भी अच्छा रहा है और अधिकारियों ने उसकी रिहाई से राज्य की सुरक्षा को खतरा नहीं बताया।


अदालत ने कहा कि सह-अभियुक्त के फरार होने को राहुल के खिलाफ इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। हर कैदी के मामले का आकलन उसके अपने आचरण और उसके खिलाफ उपलब्ध सामग्री के आधार पर होना चाहिए। केवल अनुमान या आशंका के आधार पर पैरोल रोकना उचित नहीं है।
 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed