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केंद्र पर निर्भरता कम: स्वयं के कर राजस्व संग्रह में देश में टॉप पर हरियाणा, 16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट

Tue, 03 Feb 2026 08:11 AM IST
निवेदिता वर्मा आशीष वर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
आशीष वर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Tue, 03 Feb 2026 08:11 AM IST
सार

हरियाणा का कुल कर्जा जीएसडीपी (सकल घरेलू उत्पादन) का 30.5 फीसदी पहुंच गया है, जोकि चिंताजनक स्थिति है। हालांकि इस श्रेणी में सबसे खराब स्थिति पड़ोसी राज्य पंजाब की है। पंजाब का कुल कर्ज उसकी जीएसडीपी का 42.9 फीसदी है।

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Haryana tops country in collecting its own tax revenue according to 16th Finance Commission report
सीएम नायब सैनी - फोटो : ANI

विस्तार

स्वयं के कर राजस्व संग्रह (ओटीआर) में हरियाणा देश में सभी राज्यों को पछाड़ते हुए शीर्ष पर पहुंच गया है। इसकी केंद्र पर निर्भरता भी बीते वर्षों में कम हुई है। 

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16वें वित्त आयोग की ताजा रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार 2023-24 में हरियाणा का ओटीआर उसके कुल कर राजस्व का 80 फीसदी रहा है। इस सूची में हरियाणा के साथ तेलगांना भी शीर्ष पर है। खुद के करों से तेलगांना ने भी 80 फीसदी तक राजस्व प्राप्त किया।

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अपने खर्च के लिए केंद्र पर निर्भरता नहीं

इसका सीधा मतलब है कि हरियाणा अपने खर्चे के लिए खुद के राजस्व पर निर्भर है न कि केंद्र से मिलने वाले हिस्से पर। रिपोर्ट ने हरियाणा की आर्थिक स्थिति के कमजोर पहलुओं का भी जिक्र है। उसके अनुसार हरियाणा का कुल कर्जा जीएसडीपी (सकल घरेलू उत्पादन) का 30.5 फीसदी पहुंच गया है, जोकि चिंताजनक स्थिति है। हालांकि इस श्रेणी में सबसे खराब स्थिति पड़ोसी राज्य पंजाब की है। पंजाब का कुल कर्ज उसकी जीएसडीपी का 42.9 फीसदी है।

प्रति व्यक्ति आय में हरियाणा तीसरे स्थान पर

रविवार को पेश हुए आम बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2026-2031 की अवधि के लिए केंद्र और राज्यों के बीच कर-राजस्व बंटवारे के लिए 16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट जारी की है। इसमें हरियाणा समेत अन्य राज्यों की कर्ज व आर्थिक स्थिति और केंद्रीय कर में राज्यों की हिस्सेदारी का उल्लेख है। रिपोर्ट के मुताबिक साल 2023-24 में 80 प्रतिशत के साथ हरियाणा ने कुल प्राप्तियों में अपने स्वयं के राजस्व का उच्चतम अनुपात दर्ज किया है और केंद्र के अनुदानों पर सबसे कम निर्भरता दर्ज की। ये आंकड़े उसकी मजबूत राजकोषीय स्वायत्तता को दर्शाते हैं। हरियाणा-तेलगांना के बाद इस सूची में कर्नाटक (75.7 प्रतिशत) और महाराष्ट्र (75.1 प्रतिशत) जैसे राज्य शामिल हैं। वहीं, मणिपुर (9.7 प्रतिशत) और अरुणाचल प्रदेश (13.5 प्रतिशत) केंद्र के अनुदानों और हस्तांतरण पर अत्यधिक निर्भर हैं। प्रति व्यक्ति आय के मामले में हरियाणा फिलहाल तीसरे स्थान पर है।

राजस्व बढ़ाने के लिए करनी होगी मेहनत

रिपोर्ट के मुताबिक कुल जीएसडीपी के मुकाबले कुल दायित्व (कर्ज व राजकोषीय घाटा का जोड़) के मामले में हरियाणा की स्थिति फिलहाल अच्छी नहीं है। राज्य का कुल कर्जा जीएसडीपी के अनुपात में 30.5 फीसदी तक पहुंच गया है, इसलिए हरियाणा को अपने राजस्व संग्रह को बढ़ाने के लिए और मेहनत करनी होगी। जीएसडीपी के मुकाबले कर्ज का उच्च स्तर होने से बुनियादी ढांचा निर्माण व अन्य विकासात्मक व्ययों के लिए वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता कम होती है। इससे विकास व राजस्व संग्रह भी प्रभावित होता है।

जीएसडीपी के मुकाबले राज्यों का कुल कर्जा 

राज्य कुल कर्ज व राजकोषीय घाटा (प्रतिशत में )
पंजाब 42.9
पश्चिम बंगाल 38.3
बिहार 37
राजस्थान 37.9
मध्यप्रदेश 30.7
हरियाणा 30.5
तमिलनाडु 29.9
उत्तर प्रदेश 29.7

यहां से इतना राजस्व मिला हरियाणा को 
स्टेट जीएसटी 32893
स्टांप ड्यूटी व रजिस्ट्रेशन फीस 12480 
स्टेट टैक्स/वैट 11460 
स्टेट एक्साइज 11400 
गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन से 4740 
बिजली पर टैक्स व ड्यूटी 575 
भू राजस्व 25 
राशि करोड़ में 

ओटीआर में राज्यों की स्थिति 
राज्य     अनुपात

हरियाणा 80 फीसदी 
तेलंगाना 80 फीसदी 
कर्नाटक 75.7 फीसदी 
महाराष्ट्र 75.1 फीसदी 
तमिलनाडु 74 फीसदी 
केरल 73 फीसदी 
गुजरात 72 फीसदी 
पंजाब 63 फीसदी

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