{"_id":"67d253bc606b583be70495bf","slug":"haryana-civic-polls-result-congress-suffers-second-defeat-in-haryana-in-five-months-2025-03-13","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"Haryana Civic Polls Result: पांच महीने में कांग्रेस को दूसरी करारी हार, ये दो बड़ी वजह पार्टी को ले डूबी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Haryana Civic Polls Result: पांच महीने में कांग्रेस को दूसरी करारी हार, ये दो बड़ी वजह पार्टी को ले डूबी
Thu, 13 Mar 2025 11:08 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़
Published by: शाहरुख खान
Updated Thu, 13 Mar 2025 11:08 AM IST
सार
हरियाणा में पांच महीने में कांग्रेस को दूसरी करारी हार मिली है। कांग्रेस विधानसभा चुनाव में हार से सबक नहीं ले पाई। पांच महीने बाद भी कांग्रेस नेता प्रतिपक्ष तय नहीं कर पाई है।
विज्ञापन
Haryana Civic Polls Result
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
हरियाणा निकाय चुनाव में भाजपा की आंधी से एक बार फिर कांग्रेस उड़ गई। पांच महीने में कांग्रेस को दूसरी बार करारी हार का सामना करना पड़ा है। विधानसभा चुनाव में पार्टी जिन कारणों से सत्ता से दूर रही, उन्हीं वजहों से इस बार भी हार का सामना करना पड़ा है।
पांच महीने पहले मिली हार से पार्टी अब तक सबक नहीं ले पाई है। इस हार से कांग्रेस कार्यकर्ताओं का मनोबल फिर से टूट सकता है और इसका नुकसान पार्टी को भविष्य में भी उठाना पड़ सकता है। कांग्रेस की हार की सबसे बड़ी वजह संगठन का न होना रहा है।
कांग्रेस का पिछले 11 साल से प्रदेश में संगठन नहीं है। कई प्रभारी और प्रदेश अध्यक्ष बदले गए, मगर पार्टी अब तक संगठन नहीं बना पाई। यही वजह है कि पार्टी एक दशक तक सड़क पर उतरकर कोई बड़ा प्रदर्शन भी नहीं कर पाई है।
विज्ञापन
संगठन न बनने के पीछे सबसे बड़ी वजह शीर्ष नेताओं के बीच गुटबाजी है। गुटबाजी की वजह से ही शीर्ष नेताओं ने निकाय चुनाव के प्रचार से किनारा किया। भाजपा के चुनाव में प्रचार में जहां केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल, सीएम नायब सिंह सैनी व सभी मंत्री जुटे रहे।
विज्ञापन
पांच महीने पहले मिली हार से पार्टी अब तक सबक नहीं ले पाई है। इस हार से कांग्रेस कार्यकर्ताओं का मनोबल फिर से टूट सकता है और इसका नुकसान पार्टी को भविष्य में भी उठाना पड़ सकता है। कांग्रेस की हार की सबसे बड़ी वजह संगठन का न होना रहा है।
विज्ञापन
कांग्रेस का पिछले 11 साल से प्रदेश में संगठन नहीं है। कई प्रभारी और प्रदेश अध्यक्ष बदले गए, मगर पार्टी अब तक संगठन नहीं बना पाई। यही वजह है कि पार्टी एक दशक तक सड़क पर उतरकर कोई बड़ा प्रदर्शन भी नहीं कर पाई है।
विज्ञापन
संगठन न बनने के पीछे सबसे बड़ी वजह शीर्ष नेताओं के बीच गुटबाजी है। गुटबाजी की वजह से ही शीर्ष नेताओं ने निकाय चुनाव के प्रचार से किनारा किया। भाजपा के चुनाव में प्रचार में जहां केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल, सीएम नायब सिंह सैनी व सभी मंत्री जुटे रहे।
वहीं, कांग्रेस के दिग्गज भूपेंद्र सिंह हुड्डा, प्रदेशाध्यक्ष उदयभान, सांसद कुमारी सैलजा और रणदीप सुरजेवाला चुनाव प्रचार में नहीं दिखे।
पांच महीने बाद भी नेता प्रतिपक्ष तय नहीं चुनाव के बीच प्रभारी बदला
कांग्रेस के हारने की एक बड़ी वजह यह भी सामने आ रही है कि पार्टी हाईकमान पांच महीने बाद भी विधायक दल का नेता तय नहीं कर पाया है। बड़ी बात यह है कि पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा इस पद के लिए बड़े दावेदार हैं और अधिकतर विधायक भी हुड्डा के समर्थन में हैं।
कांग्रेस के हारने की एक बड़ी वजह यह भी सामने आ रही है कि पार्टी हाईकमान पांच महीने बाद भी विधायक दल का नेता तय नहीं कर पाया है। बड़ी बात यह है कि पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा इस पद के लिए बड़े दावेदार हैं और अधिकतर विधायक भी हुड्डा के समर्थन में हैं।
इसके बावजूद शीर्ष नेतृत्व हुड्डा के बारे में फैसला नहीं ले पा रहा। इससे उनके समर्थकों में भी संदेश गलत जा रहा है। निकाय चुनाव में भी इसका असर दिखा है। वहीं, पार्टी ने निकाय चुनाव के बीच प्रदेश प्रभारी को बदल दिया। इसका भी नुकसान पार्टी को उठाना पड़ा है। नए प्रभारी जब तक कुछ समझते, तब तक काफी देर हो चुकी थी।
यह भी पढ़ें: Haryana Nikay Chunav: शहर की सरकार भी भाजपा की हो ली रे... ये है कमल खिलने की वजह और कांग्रेस के हार के कारण
यह भी पढ़ें: Haryana Nikay Chunav: शहर की सरकार भी भाजपा की हो ली रे... ये है कमल खिलने की वजह और कांग्रेस के हार के कारण
संघर्ष करती नहीं दिखी कांग्रेस
विधानसभा चुनाव में हार के बाद कांग्रेस नेताओं को एकजुट होकर संघर्ष करना चाहिए था, मगर पार्टी ठंडी होकर बैठ गई। कांग्रेस के नेता सिर्फ प्रेस नोट और सोशल मीडिया के सहारे लोगों के बीच सक्रिय हैं। इससे कांग्रेस की पकड़ जनता के बीच नहीं बन पा रही।
यह भी पढ़ें: हरियाणा में बजा भाजपा का डंका: 10 में से नौ निगमों में BJP, मानेसर में निर्दलीय ने मारी बाजी; कांग्रेस पिछड़ी
विधानसभा चुनाव में हार के बाद कांग्रेस नेताओं को एकजुट होकर संघर्ष करना चाहिए था, मगर पार्टी ठंडी होकर बैठ गई। कांग्रेस के नेता सिर्फ प्रेस नोट और सोशल मीडिया के सहारे लोगों के बीच सक्रिय हैं। इससे कांग्रेस की पकड़ जनता के बीच नहीं बन पा रही।
यह भी पढ़ें: हरियाणा में बजा भाजपा का डंका: 10 में से नौ निगमों में BJP, मानेसर में निर्दलीय ने मारी बाजी; कांग्रेस पिछड़ी
हरियाणा में भगवा रंग में रंगी शहर की सरकार
हरियाणा विधानसभा चुनावों में जीत की हैट्रिक बनाने के छह महीने से भी कम समय में सत्तारूढ़ भाजपा ने बुधवार को राज्य के निकाय चुनावों में एकतरफा जीत दर्ज की। दस में से नौ मेयर सीटें जीत लीं। पांचों नगर परिषदों को भी भाजपा ने भगवा रंग में रंग दिया है। अध्यक्ष पद जीत लिए हैं। 23 में से 8 पालिकाओं में उसे जीत हासिल हुई है, बाकी में निर्दलीय जीते हैं। कुल 38 शहरों में हुए निकाय चुनाव में उसने 22 में कब्जा कर लिया है। बाकी में निर्दलीय। कांग्रेस खाता नहीं खोल पाई।
हरियाणा विधानसभा चुनावों में जीत की हैट्रिक बनाने के छह महीने से भी कम समय में सत्तारूढ़ भाजपा ने बुधवार को राज्य के निकाय चुनावों में एकतरफा जीत दर्ज की। दस में से नौ मेयर सीटें जीत लीं। पांचों नगर परिषदों को भी भाजपा ने भगवा रंग में रंग दिया है। अध्यक्ष पद जीत लिए हैं। 23 में से 8 पालिकाओं में उसे जीत हासिल हुई है, बाकी में निर्दलीय जीते हैं। कुल 38 शहरों में हुए निकाय चुनाव में उसने 22 में कब्जा कर लिया है। बाकी में निर्दलीय। कांग्रेस खाता नहीं खोल पाई।
भाजपा का दावा है कि 90 फीसदी से ज्यादा पार्षद उसके चुने गए हैं। इस जीत से भाजपा में खुशी की लहर दौड़ गई। होली से दो दिन पहले ही भाजपाइयों की होली हो गई।पहली बार नगर निगम बने मानेसर में निर्दलीय उम्मीदवार डॉ. इंद्रजीत यादव ने भाजपा के सुंदरलाल यादव को हराकर मेयर पद पर जीत हासिल की है। भाजपा ने 7 निगमों गुरुग्राम, फरीदाबाद, यमुनानगर, करनाल, रोहतक, हिसार, पानीपत में वापसी की है।
कुमारी सैलजा के गढ़ में भाजपा की जीत
इसके अलावा सोनीपत व अंबाला के मेयर पद पर विजयी रही है। इन दो जगह उपचुनाव हुआ था। कांग्रेस को अपने गढ़ में भी हार का सामना करना पड़ा है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के गढ़ रोहतक में भाजपा ने एक बार फिर मेयर की कुर्सी जीत ली है। वहीं, सांसद कुमारी सैलजा के क्षेत्र सिरसा नगर परिषद में पहली बार भाजपा को जीत हासिल हुई है।
इसके अलावा सोनीपत व अंबाला के मेयर पद पर विजयी रही है। इन दो जगह उपचुनाव हुआ था। कांग्रेस को अपने गढ़ में भी हार का सामना करना पड़ा है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के गढ़ रोहतक में भाजपा ने एक बार फिर मेयर की कुर्सी जीत ली है। वहीं, सांसद कुमारी सैलजा के क्षेत्र सिरसा नगर परिषद में पहली बार भाजपा को जीत हासिल हुई है।
मानेसर में, निर्दलीय उम्मीदवार इंद्रजीत यादव भाजपा प्रतिद्वंद्वी सुंदर लाल को 2,293 मतों के अंतर से हराकर पहली महापौर बनीं। कांग्रेस के निखिल मदान निवर्तमान सोनीपत महापौर थे। 2024 के विधानसभा चुनावों से पहले वे भाजपा में गए और विधायक बन गए। इस बार सोनीपत से भाजपा के राजीव जैन जीते।