फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Chandigarh-Haryana News ›   50 percent reduction in stubble burning cases this time in Haryana

Stubble Burning: सीजन लगभग खत्म, हरियाणा में इस बार पराली जलाने के मामलों में 50 फीसद कमी

Mon, 11 Nov 2024 10:37 AM IST
अंकेश ठाकुर कुलदीप शुक्ला, चंडीगढ़
कुलदीप शुक्ला, चंडीगढ़ Published by: अंकेश ठाकुर Updated Mon, 11 Nov 2024 10:37 AM IST
सार

यह अच्छी खबर है कि इस बार बीते वर्षों के मुकाबले हरियाणा में पराली जलाने के मामलों में 50 प्रतिशत की गिरावट आएगी।  इस सीजन में अभी तक 15 सितंबर से 10 नवंबर तक 56 दिनों में पराली जलाने के 922 केस सामने आए हैं,

विज्ञापन
50 percent reduction in stubble burning cases this time in Haryana
हरियाणा में पराली जलाने में आई कमी। - फोटो : ANI/File

विस्तार

हरियाणा में 85 फीसदी धान की फसल की कटाई होने से पराली जलाने का सीजन लगभग खत्म होने के कगार पर है। कृषि विभाग व हरियाणा स्टेट प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा प्रदेश में पराली जलाने के मामलों में 50 फीसदी की संभावित कमी लाने के लक्ष्य का दावा किया जा है। 
विज्ञापन


इस सीजन 15 सितंबर से 10 नवंबर तक 56 दिनों में पराली जलाने के 922 केस सामने आए हैं, जबकि साल 2023 में 10 नवंबर तक 1917 केस थे। अब तक पराली जलाने के मामलों में पिछले वर्ष के मुकाबले 51 फीसदी की कमी आई है। साल 2022 में पराली जलाने के कुल 3154 मामले आए थे। वहीं, साल 2023 में 2303 मामले आए थे, यानी 37 फीसदी कमी दर्ज हुई थी।
विज्ञापन


हरियाणा और पंजाब में पराली जलाने के मामलों पर सुप्रीम कोर्ट की रवैया भी काफी सख्त रहा है। प्रदेश में पहली बार पराली जलाने पर किसानों की गिरफ्तारी और मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल पर रेड एंट्री की कार्रवाई हुई है। रेड एंट्री होने वाले किसान दो सीजन तक न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर फसल नहीं बेच सकेंगे। अभी तक 600 से अधिक किसानों की रेड एंट्री और 300 से अधिक एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


योजना के तहत किसानों को दिया जा रहा प्रोत्साहन
हरियाणा सरकार के बेहतर पराली प्रबंधन की तस्वीर नासा के मानचित्र पर भी प्रदर्शित हो चुकी है। हरियाणा पराली प्रोत्साहन योजना के तहत पराली प्रबंधन के लिए किसानों को एक हजार रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन दिया जा रहा है। साथ ही किसानों को पराली को मिट्टी में मिलाने और गांठें बनाने के लिए सुपर सीडर, जीरो टिलेज मशीन, स्ट्रॉ चॉपर और हैप्पी सीडर जैसे कृषि यंत्र सब्सिडी पर दिए जा रहे हैं।

एक्स सीटू प्रणाली से पराली प्रबंधन
सात जिलों में 15 जगह उद्यमी बॉयलर चलाने के लिए पराली से ईंधन बनाकर काम चलाते हैं। इसी तरह 11 जिलों में 23 जगहों पर ईंट बनाई जा रही हैं और 10 जिलों में बिजली का निर्माण कराया जाता है। यहां पर 3,51,000 मीट्रिक टन पराली की खपत है। कैथल के कांथली क्षेत्र में बिजली संयंत्र स्थापित है। जिले की 90 फीसदी पराली इसी संयंत्र में जाती है, शेष पिहोवा स्थित गत्ता फैक्टरी में भेजी जाती है। ज्यादातर पराली फैक्टरियों में बेच दी जाती है।


 

पांच साल में 15 सितंबर से 10 नवंबर के बीच पराली जलने के केस

साल      मामले

2020   3458
2021   4513
2022   2740
2023   1739
2024   920
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed