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Bhiwani News: राजनीतिक दलों के चुनावी घोषणा पत्र में लुभावने वादों की जगह धरातल के मुद्दों पर हो काम
Sat, 09 Mar 2024 11:46 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Sat, 09 Mar 2024 11:46 PM IST
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भिवानी। चुनाव के समय प्रत्येक राजनीतिक दल अपना चुनावी घोषणा पत्र जारी करते हैं। इस घोषणा पत्र में राजनीतिक दल लोक लुभावने वादे करके जनता से वोट हथियाने का काम करते हैं, जिसमें आमजन की जरूरतें कम ही होती हैं। चुनावी वादों को लेकर जनमंच के माध्यम से अमर उजाला के जागरुक पाठकों ने चुनावी घोषणा पत्र के वादों को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों के चुनावी घोषणा पत्र में लुभावने वादों की जगह धरातल के मुद्दों पर काम होना चाहिए। अधिकांश वादे तो हवा हवाई होने की भी बात कही है। लोकसभा चुनावों को लेकर भी सक्रियता बढ़ गई है। ऐसे में हर दल हर वर्ग को चुनावी घोषणा पत्र में समेट उनसे वोट बटोरने की जुगत में लगा है।
देश में बेरोजगारी चरम सीमा और महंगाई बहुत है। राजनीतिक दलों के घोषणा पत्र में बेरोजगारी को दूर करके हर व्यक्ति को रोजगार की गारंटी देने और महंगाई पर अंकुश लगाने की व्यवस्था होनी चाहिए। भारत एक कृषि प्रधान देश है। कृषि व्यवस्था में सुधार, फसलों पर एमएसपी की गारंटी और किसान कल्याण बारे भी घोषणा पत्र में स्पष्ट उल्लेख के साथ साथ इन्हें पूरा करने की व्यवस्था हो। राजनीतिक दलों के चुनाव घोषणा पत्र में शिक्षा में गुणात्मक सुधार एवं लोगों के स्वास्थ्य की देखभाल पर भी जोर दिया जाना चाहिए। प्रत्येक राजनीतिक दल को चाहिए कि भ्रष्टाचार पर रोक लगा कर जनता को सुविधाओं का तुरंत लाभ देने बारे भी अपने घोषणा पत्र में व्यवस्था हो। घोषणा पत्र में बीमारी, बुढ़ापे और आपदा के समय सरकारी सहायता का भी उल्लेख होना चाहिए। चुनाव के समय जनता का जागरूक होना बहुत जरूरी है।
- रमेश बूरा, शिक्षाविद् एवं पूर्व प्राचार्य।
राजनीतिक पार्टियों को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, कृषि, उद्योग विकास, मूलभूत ढांचा विकास, बुढ़ापा सुरक्षा इत्यादि मुद्दों के बारे घोषणा पत्र में देने चाहिए। इसमें जनता को सुलभ करने वाली सुविधाओं के लिए पैसा किस-किस मद से आएगा इसका ब्योरा भी देना चाहिए। कई राजनीतिक दल वोट के लालच में घोषणा पत्र में बड़े-बड़े वादे कर देते हैं और फिर वे जुमले साबित होते हैं, ऐसे दलों को जनता द्वारा पहचाना जाना चाहिए। झूठे वादे करने वालों से बचना चाहिए ताकि जनता में उनका पर्दाफाश हो सके, ऐसे दल जनता की भावनाओं के साथ खिलवाड़ करके राजनीतिक हितों की पूर्ति करते हैं जो दल धर्म और जाति का इस्तेमाल करके वोट प्राप्त करते हैं, उनसे भी बचना चाहिए ।
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- कामरेड ओम प्रकाश, जिला उप प्रधान, किसान सभा भिवानी ।
प्रत्येक राजनीतिक दल मतदाताओं को लुभाने के लिए योजनाएं तैयार कर रहा है। इन सभी योजनाओं को जनता तक पहुंचने के लिए वह अपने तरीके से घोषणा पत्र तैयार कर रहा है। हर दल अपने घोषणा पत्र में देश, राज्य, शहर, गांव इत्यादि से संबंधित समस्याएं और निपटने का दावा करता है। परंतु पांच वर्ष तक वह सारे दावे धरे के धरे रह जाते हैं और जनता अपने आप को ठगी महसूस करती है। हर राजनीतिक दल को चाहिए कि वह जनता से उनके वहां की समस्याओं को लेकर ऐसे वादे करें, जिसको वह पूरा करने में सक्षम हो। अगर वह मतदाताओं का दिल जीतना चाहता है और वोट लेना चाहता है तो उसको चाहिए कि वह अपने चुनाव क्षेत्र में वहां की समस्याओं को उठाएं और चुनाव पूर्व ही उन्हें पूरा करने का प्रयत्न करें, फिर अपने घोषणा पत्र में शामिल करें। इससे जनता को विश्वास हो कि यह दल हमारी मांगों को अवश्य ही पूरा करेगा।
-संदीप वधवा पूर्व महासचिव सांस्कृतिक मंच, भिवानी।
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देश में बेरोजगारी चरम सीमा और महंगाई बहुत है। राजनीतिक दलों के घोषणा पत्र में बेरोजगारी को दूर करके हर व्यक्ति को रोजगार की गारंटी देने और महंगाई पर अंकुश लगाने की व्यवस्था होनी चाहिए। भारत एक कृषि प्रधान देश है। कृषि व्यवस्था में सुधार, फसलों पर एमएसपी की गारंटी और किसान कल्याण बारे भी घोषणा पत्र में स्पष्ट उल्लेख के साथ साथ इन्हें पूरा करने की व्यवस्था हो। राजनीतिक दलों के चुनाव घोषणा पत्र में शिक्षा में गुणात्मक सुधार एवं लोगों के स्वास्थ्य की देखभाल पर भी जोर दिया जाना चाहिए। प्रत्येक राजनीतिक दल को चाहिए कि भ्रष्टाचार पर रोक लगा कर जनता को सुविधाओं का तुरंत लाभ देने बारे भी अपने घोषणा पत्र में व्यवस्था हो। घोषणा पत्र में बीमारी, बुढ़ापे और आपदा के समय सरकारी सहायता का भी उल्लेख होना चाहिए। चुनाव के समय जनता का जागरूक होना बहुत जरूरी है।
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- रमेश बूरा, शिक्षाविद् एवं पूर्व प्राचार्य।
राजनीतिक पार्टियों को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, कृषि, उद्योग विकास, मूलभूत ढांचा विकास, बुढ़ापा सुरक्षा इत्यादि मुद्दों के बारे घोषणा पत्र में देने चाहिए। इसमें जनता को सुलभ करने वाली सुविधाओं के लिए पैसा किस-किस मद से आएगा इसका ब्योरा भी देना चाहिए। कई राजनीतिक दल वोट के लालच में घोषणा पत्र में बड़े-बड़े वादे कर देते हैं और फिर वे जुमले साबित होते हैं, ऐसे दलों को जनता द्वारा पहचाना जाना चाहिए। झूठे वादे करने वालों से बचना चाहिए ताकि जनता में उनका पर्दाफाश हो सके, ऐसे दल जनता की भावनाओं के साथ खिलवाड़ करके राजनीतिक हितों की पूर्ति करते हैं जो दल धर्म और जाति का इस्तेमाल करके वोट प्राप्त करते हैं, उनसे भी बचना चाहिए ।
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- कामरेड ओम प्रकाश, जिला उप प्रधान, किसान सभा भिवानी ।
प्रत्येक राजनीतिक दल मतदाताओं को लुभाने के लिए योजनाएं तैयार कर रहा है। इन सभी योजनाओं को जनता तक पहुंचने के लिए वह अपने तरीके से घोषणा पत्र तैयार कर रहा है। हर दल अपने घोषणा पत्र में देश, राज्य, शहर, गांव इत्यादि से संबंधित समस्याएं और निपटने का दावा करता है। परंतु पांच वर्ष तक वह सारे दावे धरे के धरे रह जाते हैं और जनता अपने आप को ठगी महसूस करती है। हर राजनीतिक दल को चाहिए कि वह जनता से उनके वहां की समस्याओं को लेकर ऐसे वादे करें, जिसको वह पूरा करने में सक्षम हो। अगर वह मतदाताओं का दिल जीतना चाहता है और वोट लेना चाहता है तो उसको चाहिए कि वह अपने चुनाव क्षेत्र में वहां की समस्याओं को उठाएं और चुनाव पूर्व ही उन्हें पूरा करने का प्रयत्न करें, फिर अपने घोषणा पत्र में शामिल करें। इससे जनता को विश्वास हो कि यह दल हमारी मांगों को अवश्य ही पूरा करेगा।
-संदीप वधवा पूर्व महासचिव सांस्कृतिक मंच, भिवानी।