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पानी का कनेक्शन वैध कराने के लिए लोग लगा रहे चक्कर
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पब्लिक हेल्थ कार्यालय में नारेबाजी करते सिटी कॉलोनी के लोग। संवाद न्यूज एजेंसी।
- फोटो : Bhiwani
साहब 2013 में मर्जी से पेयजल कनेक्शन लिया था, अब इसे वैध कराना चाहता हूं। मेरी फाइल जमा कर दो तो मेहरबानी होगी। करीब सात सालों तक मुफ्त का पानी गटकने के बाद अब उपभोक्ताओं को शायद माफी योजना की याद आई। पब्लिक हेल्थ में इन दिनों जनसमस्याएं कम, अवैध पेयजल कनेक्शन को वैध कराने वाले फाइलों के साथ चक्कर ज्यादा लगा रहे हैं।
दूषित पेयजल यानी गंदे पानी और ठप सीवरेज से पब्लिक की हेल्थ बिगड़ रही है, वहीं पब्लिक हेल्थ के अधिकारियों के मसौदे पर मुख्यालय ने कुंडली जमाई तो शहर की हालत खराब हो गई है। पिछले लंबे अर्से से शहर के कुछ हिस्सों की सीवरेज लाइन ठप पड़ी हैं, जिसको बदलने के लिए पब्लिक हेल्थ विभाग ने करीब एक करोड़ से अधिक की राशि का प्रपोजल भी तैयार किया और इसे मुख्यालय को भी भेजा था। मगर मामला सरकारी नियमों में उलझकर रह गया। क्योंकि शहरी दायरे में नई पेयजल लाइन और सीवरेज लाइन डाले जाने का काम अमरूत योजना के तहत कराया जा रहा है। इसमें संबंधित विभाग केवल प्रपोजल ही तैयार कर सकते हैं, जबकि काम अमरूत के तहत नगर परिषद की ओर से ही कराया जाएगा।
पब्लिक हेल्थ विभाग ने एक अगस्त से 31 अगस्त तक बकाया बिजली बिलों के एकमुश्त भुगतान पर 25 फीसदी राशि की छूट की योजना शुरू की हुई है। इस योजना में अब तक 18 लोगों के अवैध कनेक्शन वैध कर दिए गए हैं, जबकि 55 लोगों ने अवैध पेयजल कनेक्शनों को वैध कराने की फाइल भी जमा कराई है। जिन पर अधिकारियों द्वारा संज्ञान लिया जाना बाकी है। इसी के साथ एक से 31 अगस्त तक शहरी दायरे में अवैध पेयजल कनेक्शनों को भी मुफ्त में वैध किए जाने की योजना है। पिछले दो दिनों से अवैध को वैध कनेक्शन कराने वाले ही दफ्तरों में चक्कर लगा रहे हैं।
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पानी ने याद दिला दी नानी, भूमिगत पानी खारा, सेहत ने नकारा
पानी ने सिटी स्टेशन लाइनपार सिटी कॉलोनी के लोगों को नानी याद दिला दी। दरअसल यहां पर दो साल से पब्लिक हेल्थ लोगों को भूमिगत जल सप्लाई कर रहा है जिसका स्वाद खारा है और इसे खाने पीने में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। मंगलवार को पब्लिक हेल्थ कार्यालय में शिकायत लेकर आई सिटी कॉलोनी वासी कमला, सुनीता, कोशल्या देवी, गुड्डी, पूजा, सीमा, मनीता, अजय, सुरेंद्र, विनोद ने बताया कि पब्लिक हेल्थ बोरवेल से भूमिगत खारा पानी सप्लाई में दे रहा है। जिससे चर्म रोग का संक्रमण भी बढ़ गया है। इस पानी में चाय भी नहीं बन पाती, खाना भी खराब हो जाता है। सप्लाई में नहरी पानी की मांग कई बार कर चुके हैं, शिकायतें भी दी हैं, मगर कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही है। सिटी लाइनपार सिटी कॉलोनी की महिलाओं ने पब्लिक हेल्थ कार्यालय के बाहर नारेबाजी कर रोष भी जताया।
10 हजार डिफाल्टरों में अटके 15 करोड़, 20 हजार अवैध कनेक्शनों ने बढ़ाई मुश्किलें
पब्लिक हेल्थ की हेल्थ भी करीब 10 हजार डिफाल्टर पेयजल उपभोक्ताओं ने पतली कर दी है, क्योंकि इनमें करीब 15 करोड़ बकाया बिलों की राशि अटकी पड़ी है वहीं शहरी दायरे में करीब 20 हजार अवैध पेयजल कनेक्शनों ने भी अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ा दी है। पूरे शहर की आबादी पौने तीन लाख की आबादी में करीब 35 हजार वैध पेयजल कनेक्शन विभाग के पास रजिस्टर्ड हैं। जबकि 20 हजार अवैध कनेक्शनों का कोई हिसाब किताब तक नहीं है।
टोल फ्री नंबर पर शिकायतें दर्ज कराई, नहीं हुआ निवारण
कोरोना संक्रमण के दौरान पब्लिक हेल्थ विभाग भी गंदे पानी, लीकेज और ठप सीवर की शिकायतें ऑनलाइन टोल फ्री नंबर 18001805678 पर दर्ज कराने के लिए प्रेरित कर रहा है। मगर इस नंबर पर घंटी भी जाती है और शिकायत भी दर्ज हो जाती हैं, मगर निवारण की कोई गारंटी नहीं है। पब्लिक हेल्थ के पास रोजाना ही 15 से 20 शिकायतें पेयजल व सीवरेज से संबंधित आ रही हैं, मगर इनमें से अधिकांश का स्थायी समाधान नहीं हुआ है।
लोगों का कंठ सूखा, टैंकों में खिले हैं कमल
शहर की अधिकांश बाहरी कॉलोनी, टेल की कॉलोनी गर्मी में गंभीर पेयजल संकट से जूझ रहीं हैं, लेकिन मुख्य जलघर के टैंकों में कमल खिले हैं। पानी से लबालब टैंकों पर कमल के फूलों की चादर बिछी हैं, मगर इसी पानी को पीने के लिए लोग तरस रहे हैं।
वर्जन-
एक मुश्त भुगतान योजना में अभी उपभोक्ता शामिल हो रहे हैं, जबकि शहर के अंदर नई पेयजल और नई सीवरेज का मामला अब अमरूत में भेजा गया है। संबंधित विभाग ने केवल मसौदा तैयार किया है, इस पर काम अमरूत में होना है। टोल फ्री नंबर से विभाग के सभी अधिकारी जुड़े हैं, एक बार शिकायत दर्ज हुई तो उसका समाधान भी निश्चित रूप से होता है।
- बलविंद्र जैन, कार्यकारी अभियंता, पब्लिक हेल्थ विभाग।
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दूषित पेयजल यानी गंदे पानी और ठप सीवरेज से पब्लिक की हेल्थ बिगड़ रही है, वहीं पब्लिक हेल्थ के अधिकारियों के मसौदे पर मुख्यालय ने कुंडली जमाई तो शहर की हालत खराब हो गई है। पिछले लंबे अर्से से शहर के कुछ हिस्सों की सीवरेज लाइन ठप पड़ी हैं, जिसको बदलने के लिए पब्लिक हेल्थ विभाग ने करीब एक करोड़ से अधिक की राशि का प्रपोजल भी तैयार किया और इसे मुख्यालय को भी भेजा था। मगर मामला सरकारी नियमों में उलझकर रह गया। क्योंकि शहरी दायरे में नई पेयजल लाइन और सीवरेज लाइन डाले जाने का काम अमरूत योजना के तहत कराया जा रहा है। इसमें संबंधित विभाग केवल प्रपोजल ही तैयार कर सकते हैं, जबकि काम अमरूत के तहत नगर परिषद की ओर से ही कराया जाएगा।
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पब्लिक हेल्थ विभाग ने एक अगस्त से 31 अगस्त तक बकाया बिजली बिलों के एकमुश्त भुगतान पर 25 फीसदी राशि की छूट की योजना शुरू की हुई है। इस योजना में अब तक 18 लोगों के अवैध कनेक्शन वैध कर दिए गए हैं, जबकि 55 लोगों ने अवैध पेयजल कनेक्शनों को वैध कराने की फाइल भी जमा कराई है। जिन पर अधिकारियों द्वारा संज्ञान लिया जाना बाकी है। इसी के साथ एक से 31 अगस्त तक शहरी दायरे में अवैध पेयजल कनेक्शनों को भी मुफ्त में वैध किए जाने की योजना है। पिछले दो दिनों से अवैध को वैध कनेक्शन कराने वाले ही दफ्तरों में चक्कर लगा रहे हैं।
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पानी ने याद दिला दी नानी, भूमिगत पानी खारा, सेहत ने नकारा
पानी ने सिटी स्टेशन लाइनपार सिटी कॉलोनी के लोगों को नानी याद दिला दी। दरअसल यहां पर दो साल से पब्लिक हेल्थ लोगों को भूमिगत जल सप्लाई कर रहा है जिसका स्वाद खारा है और इसे खाने पीने में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। मंगलवार को पब्लिक हेल्थ कार्यालय में शिकायत लेकर आई सिटी कॉलोनी वासी कमला, सुनीता, कोशल्या देवी, गुड्डी, पूजा, सीमा, मनीता, अजय, सुरेंद्र, विनोद ने बताया कि पब्लिक हेल्थ बोरवेल से भूमिगत खारा पानी सप्लाई में दे रहा है। जिससे चर्म रोग का संक्रमण भी बढ़ गया है। इस पानी में चाय भी नहीं बन पाती, खाना भी खराब हो जाता है। सप्लाई में नहरी पानी की मांग कई बार कर चुके हैं, शिकायतें भी दी हैं, मगर कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही है। सिटी लाइनपार सिटी कॉलोनी की महिलाओं ने पब्लिक हेल्थ कार्यालय के बाहर नारेबाजी कर रोष भी जताया।
10 हजार डिफाल्टरों में अटके 15 करोड़, 20 हजार अवैध कनेक्शनों ने बढ़ाई मुश्किलें
पब्लिक हेल्थ की हेल्थ भी करीब 10 हजार डिफाल्टर पेयजल उपभोक्ताओं ने पतली कर दी है, क्योंकि इनमें करीब 15 करोड़ बकाया बिलों की राशि अटकी पड़ी है वहीं शहरी दायरे में करीब 20 हजार अवैध पेयजल कनेक्शनों ने भी अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ा दी है। पूरे शहर की आबादी पौने तीन लाख की आबादी में करीब 35 हजार वैध पेयजल कनेक्शन विभाग के पास रजिस्टर्ड हैं। जबकि 20 हजार अवैध कनेक्शनों का कोई हिसाब किताब तक नहीं है।
टोल फ्री नंबर पर शिकायतें दर्ज कराई, नहीं हुआ निवारण
कोरोना संक्रमण के दौरान पब्लिक हेल्थ विभाग भी गंदे पानी, लीकेज और ठप सीवर की शिकायतें ऑनलाइन टोल फ्री नंबर 18001805678 पर दर्ज कराने के लिए प्रेरित कर रहा है। मगर इस नंबर पर घंटी भी जाती है और शिकायत भी दर्ज हो जाती हैं, मगर निवारण की कोई गारंटी नहीं है। पब्लिक हेल्थ के पास रोजाना ही 15 से 20 शिकायतें पेयजल व सीवरेज से संबंधित आ रही हैं, मगर इनमें से अधिकांश का स्थायी समाधान नहीं हुआ है।
लोगों का कंठ सूखा, टैंकों में खिले हैं कमल
शहर की अधिकांश बाहरी कॉलोनी, टेल की कॉलोनी गर्मी में गंभीर पेयजल संकट से जूझ रहीं हैं, लेकिन मुख्य जलघर के टैंकों में कमल खिले हैं। पानी से लबालब टैंकों पर कमल के फूलों की चादर बिछी हैं, मगर इसी पानी को पीने के लिए लोग तरस रहे हैं।
वर्जन-
एक मुश्त भुगतान योजना में अभी उपभोक्ता शामिल हो रहे हैं, जबकि शहर के अंदर नई पेयजल और नई सीवरेज का मामला अब अमरूत में भेजा गया है। संबंधित विभाग ने केवल मसौदा तैयार किया है, इस पर काम अमरूत में होना है। टोल फ्री नंबर से विभाग के सभी अधिकारी जुड़े हैं, एक बार शिकायत दर्ज हुई तो उसका समाधान भी निश्चित रूप से होता है।
- बलविंद्र जैन, कार्यकारी अभियंता, पब्लिक हेल्थ विभाग।

पानी से लबालब टैंक में खिले कमल।- फोटो : Bhiwani