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शहरी सीमा से बाहर हुई दर्जनभर कॉलोनियां

Thu, 04 Aug 2016 12:06 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला
ब्यूरो/अमर उजाला Updated Thu, 04 Aug 2016 12:06 AM IST
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वार्डबंदी - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
शहर की नई वार्डबंदी ने वर्षों से शहरी सीमा में रहने वाले लोगों को भी शहर से बाहर कर दिया है। करीब दर्जनभर कॉलोनियों में रहने वाले हजारों लोग नई वार्डबंदी के शिकार हुए। अब ये न तो शहर का हिस्सा है और न ही शहर की सरकार चुनने के हिस्सेदार होंगे। हैरान करने वाली बात यह है कि जिस कॉलोनी से तीन-तीन पार्षद बने हैं, उस कॉलोनी को भी बाहर कर दिया है। नई वार्डबंदी से खफा लोग अब कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की तैयारी में जुटे हैं।
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शहर की नई वार्डबंदी ने शहर की दर्जनभर कॉलोनियों में रहने वाले लोगों के चेहरों पर चिंता की लकीरें ला दी है। वार्उबंदी 1974 की शहर की सीमा के अनुसार की गई है और उसके बाद शहर काफी बढ़ा है। अनेक नई कॉलोनियां बसी है। आउट में भी काफी कॉलोनियां बसी है। मगर रिकार्ड में शहर की सीमा जस की तस है। अब नई वार्डबंदी में पिछले कई वर्षों से शहर का हिस्सा बनने वाली दर्जनभर कॉलोनियां नक्शे से मिटा दी गई है। अब दर्जनभर कॉलोनियों के लोग शहर  में रहने के बावजूद शहर का हिस्सा नहीं है। अब ये गांवों का भी हिस्सा नहीं है। ऐसे में आगे इन कॉलोनियों में विकास कार्य भी नहीं होंगे क्योंकि न पंचायतें करवाएंगी और न ही नगर परिषद। बिजली-पानी कनेक्शन, वोटर कार्ड, आधार कार्ड जैसी सुविधाएं होने के बावजूद वे शहर का हिस्सा नहीं।
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कौन- कौन सी कॉलोनियां हुई शहर से बाहर
हुन्नामल प्याऊ के सामने डिफेंस कॉलोनी। यहां करीब छह सौ मतदाता है। पिछले करीब 20 वर्षों से रहने वाले लोग नगर परिषद हो या विधानसभा, लोकसभा चुनाव। हर चुनाव में मतदान किया। मगर इस बार शहर से बाहर कर दिए गए। पीपली वाली जोहड़ी हनुमान गेट लाइन पार बसी बस्ती में करीब साढ़े तीन सौ मकान है और यहां कम से कम पांच सौ वोटर है। मगर नई वार्डबंदी में यह हिस्सा शहर से बाहर कर दिया गया है। बेशक ये लोग पिछले 30 सालों से मतदान कर रहे थे, मगर अब नहीं कर पाएंगे। लाइन पार का ही नहीं पीपली वाली जोहड़ी लाइन से पहले का भी काफी एरिया नई वार्डबंदी में काट दिया गया है। सूत्रों के अनुसार करीब नौ सौ के करीब वोट वाला लाइन से पहले का क्षेत्र भी काट दिया गया है।  सिटी स्टेशन लाइन पार की कॉलोनी। जिसमें करीब 80 मकान बने है। पिछले कई वर्षों से यह कॉलोनी वार्ड एक का हिस्सा रही। कौंट रोड पर डॉग फार्म के पीछे लक्ष्मीनगर का बढ़ा हुआ हिस्सा। यहां भी करीब दो सौ से अधिक मतदाता है। तोशाम बाइपास पर पावर हाउस के सामने बसी शांति नगर कॉलोनी। इस कॉलोनी में करीब 80 मतदाता है। हांसी रोड पर आउटर में बसी कुछ कॉलोनियों को भी शहरी सीमा से बाहर कर दिया गया है। जूई फीडर के पास की कॉलोनी भी अब शहरी सीमा का हिस्सा नहीं।
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साहब, तीन पार्षद दिए, अब कॉलोनी को ही सीमा से बाहर कर दिया
साहब, 20 सालों से यहां रह रहे है। वोटर कार्ड, आधार कार्ड, राशन कार्ड सब है। घरों में बिजली मीटर, पेयजल कनेक्शन भी है। पिछले काफी वर्षों से नगर परिषद चुनाव, लोकसभा, विधानसभा चुीनाव में भी भागीदारी करते आ रहे है मगर नई वार्डबंदी में शहरी सीमा  से बाहर कर दिया। अब ना शहर का हिस्सा रहे और न गांव का। यह कहना है रोहतक रोड न्यू डिफेंस कॉलोनी वासियों का। कॉलोनी वासियों ने बताया कि करीब छह सौ से अधिक मतदाता है। अब न नप अधिकारी कोई संतोषजनक जवाब दे रहे है और न ही प्रशासन की ओर से सहयोग मिल रहा है। कॉलोनी वासियों ने बताया कि कॉलोनी वासियों को मतदान के उनके मौलिक अधिकार से वंचित किया जा रहा है। यह सब राजनीतिक द्वेष के चलते किया जा रहा है। कॉलोनी वासयिों नेवार्डबंदी को ठीक कर उनकी कॉलोनी को पहले की तरह शामिल करने की मांग की। इस मौके पर कांग्रेसी नेता प्रदीप गुलिया, संजय गांधी, हवा सिंह, महेंद्र चौहान, सूबेदार रामकिशन, बीर सिंह, ओमप्रकाश श्याराण, राज कुमार ग्रेवाल, देवी सिंह आदि मौजूद रहे।

यह है शहर की सीमाएं
रोहतक रोड पर केंद्रीय स्कूल तक
लोहारू रोड पर उत्तम नगर तक
हांसी रोड पर रेलवे फाटक से कुछ पहले तक
तोशाम बाइपास पर रजवाहे से पहले तक

क्या कहते हैं जनप्रतिनिधि
किसी भी वार्ड में जोड़े, मगर शहर का हिस्सा तो बने
जीतूवाला जोहड़ लाइन पार बसे करीब साढ़े तीन सौ परिवारद और लाइन से पहले के करीब सैकड़ों परिवारों को शहर की नई वार्डबंदी में शहरी सीमा से बाहर कर दिया गया है। ये लोग 30 वर्षों से मतदान करते आ रहे है। इन्हें किसी भी वार्ड का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।

प्रकाश गोठवाला, वार्ड 11

जरूरत के समय वोट, वैसे शहर की सीमा में भी नहीं
सिटी स्टेशन लाइन पार बसी कॉलोनी के लोग पिछले काफी वर्षों से वार्ड एक का हिस्सा रहे है। लोकसभा, विधानसभा, पहले के नगर परिषद चुनावों में मतदान किया। अब उन्हें शहरी सीमा से बाहर बताया जा रहा है। यह गलत है। जरूरत के समय वोट याद आते है और अब इस कॉलोनी को शहर से ही बाहर कर दिया गया। सेक्टर 13 को भी तीन वार्डों में बांटा गया। वार्डबंदी बिल्कुल गलत है और इसके खिलाफ कोर्ट केस किया जाएगा।
विजय पंचगावा, निवर्तमान पार्षद वार्ड 01

 
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