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Bhiwani News: कुंगड़ में गहराया जल संकट, दोनों जलघर सूखे
Sun, 18 May 2025 01:58 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Sun, 18 May 2025 01:58 AM IST
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गांव कुंगड़ के सूखे जलघर के टैंक।
नरेंद्र भाकर
बवानीखेड़ा। गांव कुंगड़ में पीने के पानी की समस्या दिनों-दिन गंभीर होती जा रही है। गांव के दोनों जलघर सूखे पड़े हैं, जिससे ग्रामीणों को मजबूरी में खुद के खर्च पर टैंकरों से पानी मंगवाना पड़ रहा है। वहीं महिलाएं दिनभर नलकूपों से पानी भरकर घर तक लाने की जद्दोजहद कर रही हैं। शनिवार को ग्रामीणों ने द्वितीय जलघर पहुंचकर प्रशासन के खिलाफ रोष जताया और नहर में जल्द पानी छोड़े जाने की मांग की।
ग्रामीण करीना, मंजू, सुमन, प्रवीण, कविता, मुकेश, नीलम, राजेंद्र, अशोक, कपिल, ईश्वर प्रकाश और कृष्ण ने बताया कि गांव की आबादी करीब 10,000 है और अधिकांश परिवार कृषि पर निर्भर हैं। घरों में बंधे पशुओं के लिए भी पीने का पानी उपलब्ध नहीं है।
ग्रामीणों ने बताया कि जब भी पंजाब को हरियाणा के लोगों की जरूरत पड़ी, उन्होंने हमेशा साथ दिया। किसान आंदोलन में भी गांव के लोगों ने भाग लिया, लेकिन अब पंजाब हरियाणा को उसके हिस्से का पानी नहीं दे रहा है। दोनों राज्यों के विवादों का खामियाजा ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है। 20 मई को सुंदर ब्रांच नहर में पानी छोड़े जाने की जानकारी दी गई थी, लेकिन अब बताया जा रहा है कि 23 मई को पानी छोड़ा जाएगा। तब तक गांव में पानी को लेकर स्थिति और बिगड़ सकती है।
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गांव में दो जलघर, फिर भी पानी नहीं
गांव कुंगड़ में पानी की आपूर्ति को बेहतर करने के लिए दो जलघर बनाए गए हैं, लेकिन इन जलघरों में पानी नहीं है। दोनों जलघरों का जलस्तर पूरी तरह खत्म हो चुका है। गांव में मुर्राह नस्ल की महंगी भैंसें और झोटों का पालन होता है, लेकिन पानी की कमी से पशुपालकों को भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। शनिवार को महिलाएं खाली मटके लेकर जलघर पहुंचीं और नहर में पानी छोड़े जाने की मांग की।
ग्रामीणों के वर्जन
पानी की कमी से बुरा हाल है। प्रशासन को पहले ही अवगत करवा चुके हैं, लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ। गर्मी का मौसम है, सरकार को जल्द से जल्द पेयजल का प्रबंध करवाना चाहिए।
— करीना
गांव में रसोई में भी इस्तेमाल के लिए पानी नहीं है। सुबह से शाम तक नलकूप से पानी भरकर सिर पर लाना पड़ता है। फिर भी पानी पूरा नहीं पड़ता। प्रशासन से अपील है कि जल्द नहर में पानी छोड़ा जाए।
— मुकेश
पशुओं को भी पीने के लिए पानी नहीं मिल रहा है। गर्मी में पशुओं की हालत खराब है। खुद के खर्च पर टैंकर बुलाकर पानी मंगवाना पड़ रहा है।
— नीलम
जलघर में जाकर कनिष्ठ अभियंता से मिलकर नहर में पानी छोड़ने की मांग की, लेकिन सिर्फ आश्वासन मिला। सरकार से मांग है कि नहर में जल्द पानी छोड़ा जाए, ताकि गांव में पेयजल की समस्या खत्म हो।
— कविता
सुंदर ब्रांच नहर में पहले सप्ताह में एक दिन पानी चलता था, लेकिन अब केवल तीन दिन ही पानी आ पा रहा है। इससे पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं मिल रहा। स्थिति को सुधारने के लिए जलघर में तीन ट्यूबवेल लगाए जा रहे हैं, जिससे जल्द पानी की आपूर्ति सुचारू हो सकेगी। — सुनील कुमार, कनिष्ठ अभियंता, सिंचाई विभाग
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बवानीखेड़ा। गांव कुंगड़ में पीने के पानी की समस्या दिनों-दिन गंभीर होती जा रही है। गांव के दोनों जलघर सूखे पड़े हैं, जिससे ग्रामीणों को मजबूरी में खुद के खर्च पर टैंकरों से पानी मंगवाना पड़ रहा है। वहीं महिलाएं दिनभर नलकूपों से पानी भरकर घर तक लाने की जद्दोजहद कर रही हैं। शनिवार को ग्रामीणों ने द्वितीय जलघर पहुंचकर प्रशासन के खिलाफ रोष जताया और नहर में जल्द पानी छोड़े जाने की मांग की।
ग्रामीण करीना, मंजू, सुमन, प्रवीण, कविता, मुकेश, नीलम, राजेंद्र, अशोक, कपिल, ईश्वर प्रकाश और कृष्ण ने बताया कि गांव की आबादी करीब 10,000 है और अधिकांश परिवार कृषि पर निर्भर हैं। घरों में बंधे पशुओं के लिए भी पीने का पानी उपलब्ध नहीं है।
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ग्रामीणों ने बताया कि जब भी पंजाब को हरियाणा के लोगों की जरूरत पड़ी, उन्होंने हमेशा साथ दिया। किसान आंदोलन में भी गांव के लोगों ने भाग लिया, लेकिन अब पंजाब हरियाणा को उसके हिस्से का पानी नहीं दे रहा है। दोनों राज्यों के विवादों का खामियाजा ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है। 20 मई को सुंदर ब्रांच नहर में पानी छोड़े जाने की जानकारी दी गई थी, लेकिन अब बताया जा रहा है कि 23 मई को पानी छोड़ा जाएगा। तब तक गांव में पानी को लेकर स्थिति और बिगड़ सकती है।
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गांव में दो जलघर, फिर भी पानी नहीं
गांव कुंगड़ में पानी की आपूर्ति को बेहतर करने के लिए दो जलघर बनाए गए हैं, लेकिन इन जलघरों में पानी नहीं है। दोनों जलघरों का जलस्तर पूरी तरह खत्म हो चुका है। गांव में मुर्राह नस्ल की महंगी भैंसें और झोटों का पालन होता है, लेकिन पानी की कमी से पशुपालकों को भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। शनिवार को महिलाएं खाली मटके लेकर जलघर पहुंचीं और नहर में पानी छोड़े जाने की मांग की।
ग्रामीणों के वर्जन
पानी की कमी से बुरा हाल है। प्रशासन को पहले ही अवगत करवा चुके हैं, लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ। गर्मी का मौसम है, सरकार को जल्द से जल्द पेयजल का प्रबंध करवाना चाहिए।
— करीना
गांव में रसोई में भी इस्तेमाल के लिए पानी नहीं है। सुबह से शाम तक नलकूप से पानी भरकर सिर पर लाना पड़ता है। फिर भी पानी पूरा नहीं पड़ता। प्रशासन से अपील है कि जल्द नहर में पानी छोड़ा जाए।
— मुकेश
पशुओं को भी पीने के लिए पानी नहीं मिल रहा है। गर्मी में पशुओं की हालत खराब है। खुद के खर्च पर टैंकर बुलाकर पानी मंगवाना पड़ रहा है।
— नीलम
जलघर में जाकर कनिष्ठ अभियंता से मिलकर नहर में पानी छोड़ने की मांग की, लेकिन सिर्फ आश्वासन मिला। सरकार से मांग है कि नहर में जल्द पानी छोड़ा जाए, ताकि गांव में पेयजल की समस्या खत्म हो।
— कविता
सुंदर ब्रांच नहर में पहले सप्ताह में एक दिन पानी चलता था, लेकिन अब केवल तीन दिन ही पानी आ पा रहा है। इससे पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं मिल रहा। स्थिति को सुधारने के लिए जलघर में तीन ट्यूबवेल लगाए जा रहे हैं, जिससे जल्द पानी की आपूर्ति सुचारू हो सकेगी। — सुनील कुमार, कनिष्ठ अभियंता, सिंचाई विभाग