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दूसरे दिन भी किसानों नहीं खोला सीबीएलयू का रास्ता
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धरने पर बैठे किसानों को मनाने का प्रयास करते पुलिसकर्मी। विज्ञप्ति
- फोटो : Bhiwani
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भिवानी। सीबीएलयू में नौकरी और दाखिलों में आरक्षण की मांग को लेकर दूसरे दिन भी प्रेमनगर के किसानों ने विश्वविद्यालय का रास्ता नहीं खोला। पुलिस अधिकारियों के काफी मनाने के बाद भी किसान नहीं माने और आरक्षण नहीं मिलने तक रास्ता नहीं खोलने की जिद पर अड़े रहे।
बता दें कि गांव प्रेमनगर के किसानों ने गांव में यूनिवर्सिटी और मेडिकल कॉलेज बनाने के लिए सरकार को निशुल्क जमीन दी थी। किसानों का कहना है कि इसकी एवज में सरकार ने उन्हें नौकरियों और दाखिलों में आरक्षण देने की बात कही थी। मगर दोनों ही वादे पूरे नहीं किए जा रहे हैं। मेडिकल कॉलेज तो यहां से शिफ्ट ही कर दिया गया है। इन सभी मांगों को लेकर शुक्रवार सुबह ग्रामीणों ने विश्वविद्यालय में जाने के रास्ते को टैंकर खड़े करके बंद कर दिया था। शनिवार को भी रास्ता बंद रहा।
प्रेमनगर के पूर्व सरपंच बिजेंद्र सिंह ने कहा कि गांव के साथ सरकार धोखा कर रही है। दाखिलों में सिर्फ एक फीसदी आरक्षण दिया गया है। गांव को दाखिलों में पांच फीसदी और नौकरी में 10 फीसदी आरक्षण चाहिए। सुरेश फौजी और सुखबीर ढांडा ने कहा कि गांव के लोग कोई नाजायज मांग नहीं कर रहे हैं। सरकार के साथ तय हुई बात पर ही अमल करने की मांग कर रहे हैं, जब तक मांग नहीं मानी जाएंगी, तब तक विश्वविद्यालय का रास्ता नहीं खोला जाएगा। इस दौरान कैप्टन कलम सिंह, राजेश बूरा, प्रदीप, सुरेंद्र, कुलदीप धनाना, संदीप सिवाच और अशोक प्रधान भी मौजूद रहे।
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बता दें कि गांव प्रेमनगर के किसानों ने गांव में यूनिवर्सिटी और मेडिकल कॉलेज बनाने के लिए सरकार को निशुल्क जमीन दी थी। किसानों का कहना है कि इसकी एवज में सरकार ने उन्हें नौकरियों और दाखिलों में आरक्षण देने की बात कही थी। मगर दोनों ही वादे पूरे नहीं किए जा रहे हैं। मेडिकल कॉलेज तो यहां से शिफ्ट ही कर दिया गया है। इन सभी मांगों को लेकर शुक्रवार सुबह ग्रामीणों ने विश्वविद्यालय में जाने के रास्ते को टैंकर खड़े करके बंद कर दिया था। शनिवार को भी रास्ता बंद रहा।
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प्रेमनगर के पूर्व सरपंच बिजेंद्र सिंह ने कहा कि गांव के साथ सरकार धोखा कर रही है। दाखिलों में सिर्फ एक फीसदी आरक्षण दिया गया है। गांव को दाखिलों में पांच फीसदी और नौकरी में 10 फीसदी आरक्षण चाहिए। सुरेश फौजी और सुखबीर ढांडा ने कहा कि गांव के लोग कोई नाजायज मांग नहीं कर रहे हैं। सरकार के साथ तय हुई बात पर ही अमल करने की मांग कर रहे हैं, जब तक मांग नहीं मानी जाएंगी, तब तक विश्वविद्यालय का रास्ता नहीं खोला जाएगा। इस दौरान कैप्टन कलम सिंह, राजेश बूरा, प्रदीप, सुरेंद्र, कुलदीप धनाना, संदीप सिवाच और अशोक प्रधान भी मौजूद रहे।
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