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Bhiwani News: पेड़ कटाई मामले में ग्रामीणों ने डीएफओ से की जांच करने की मांग
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बहल। गोकलपुरा गांव के मकड़ाना जोहड़ में बन रहे पोषक अनाज अनुसंधान केंद्र में हरे पेड़ों की कटाई का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। ग्रामीणों ने रेंज अधिकारी लोहारू की ओर से की गई जांच पर सवाल खड़े करते हुए इसकी दोबारा जांच करवाने की मांग की है। इस संबंध में ग्रामीणों ने जिला वन अधिकारी को पत्र भेजकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
समाजसेवी एवं पर्यावरण प्रहरी महावीर चहल ने बताया कि करीब ढाई महीने पहले अनुसंधान केंद्र के निर्माण की आड़ में बिना पूर्व अनुमति के सैकड़ों हरे पेड़ों की कटाई कर दी गई थी। जब गोकलपुरा गांव के ग्रामीणों ने इस पर आपत्ति जताई तो वन विभाग ने मामले की जांच रेंज अधिकारी लोहारू को सौंपी थी।
महावीर चहल के अनुसार रेंज अधिकारी ने केंद्र के अधिकारियों से सांठगांठ कर जिस जेसीबी मशीन से पेड़ उखाड़े गए थे उस पर मात्र 8,960 रुपये का नाममात्र जुर्माना लगाकर मामले को निपटा दिया। ग्रामीणों का कहना है कि इस जांच से वे संतुष्ट नहीं हैं और इसे लीपापोती बताया जा रहा है। ग्रामीणों ने आपस में विचार-विमर्श के बाद निर्णय लिया है कि वे इस मामले की निष्पक्ष जांच के लिए हरसंभव प्रयास करेंगे और जरूरत पड़ी तो आंदोलन का रास्ता भी अपनाएंगे। ग्रामीणों ने जिला वन अधिकारी राजेश वत्स को मांग पत्र सौंपकर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और पूरे मामले की दोबारा जांच कराने की मांग की है।
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समाजसेवी एवं पर्यावरण प्रहरी महावीर चहल ने बताया कि करीब ढाई महीने पहले अनुसंधान केंद्र के निर्माण की आड़ में बिना पूर्व अनुमति के सैकड़ों हरे पेड़ों की कटाई कर दी गई थी। जब गोकलपुरा गांव के ग्रामीणों ने इस पर आपत्ति जताई तो वन विभाग ने मामले की जांच रेंज अधिकारी लोहारू को सौंपी थी।
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महावीर चहल के अनुसार रेंज अधिकारी ने केंद्र के अधिकारियों से सांठगांठ कर जिस जेसीबी मशीन से पेड़ उखाड़े गए थे उस पर मात्र 8,960 रुपये का नाममात्र जुर्माना लगाकर मामले को निपटा दिया। ग्रामीणों का कहना है कि इस जांच से वे संतुष्ट नहीं हैं और इसे लीपापोती बताया जा रहा है। ग्रामीणों ने आपस में विचार-विमर्श के बाद निर्णय लिया है कि वे इस मामले की निष्पक्ष जांच के लिए हरसंभव प्रयास करेंगे और जरूरत पड़ी तो आंदोलन का रास्ता भी अपनाएंगे। ग्रामीणों ने जिला वन अधिकारी राजेश वत्स को मांग पत्र सौंपकर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और पूरे मामले की दोबारा जांच कराने की मांग की है।
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