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Bhiwani News: वर्ष 1971 के युद्ध में भारत को मिली जीत की याद में मनाया विजय दिवस
Sat, 14 Dec 2024 10:25 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Sat, 14 Dec 2024 10:25 PM IST
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हुडा पार्क के समीप नीजि रेस्तरां में खानसामा विजय दिवस मनाते पूर्व सैनिक।
भिवानी। वर्ष 1971 के युद्ध में पाकिस्तान के खिलाफ भारत को मिली ऐतिहासिक जीत की याद में हर वर्ष 16 दिसंबर को खानसामा विजय दिवस मनाया जाता है। भारत-पाक के युद्ध में 16 दिसंबर 1971 को भारतीय सेना के सामने पाकिस्तान के 93,000 सैनिकों ने आत्मसमर्पण कर दिया था। युद्ध के बाद नए राष्ट्र बांग्लादेश का जन्म हुआ था। दक्षिण एशिया की भूराजनीति भी बदल गई थी। इसी खुशी में पूर्व सैनिकों ने हुडा पार्क के पास एक रेस्तरां में खानसामा विजय दिवस मनाया।
सूबेदार जगदीश सिंह पाली इस युद्ध के चश्मदीद थे। उन्होंने बताया कि यह युद्ध तीन से 15 दिसंबर 1971 तक चला था। कुल 11 दिनों तक चले इस युद्ध में 13 दिसंबर का दिन महत्वपूर्ण था। उन्होंने बताया कि पाकिस्तानी सेना ने खानसामा में पक्का स्थल बनाकर भारतीय जवानों को खानसामा से पहले रोक दिया था। उस समय 21 राजपूत बटालियन को आदेश मिला था कि वे खानसामा पर कब्जा करें।
उन्होंने बताया कि ये हमला 13 दिसंबर की रात में होना था, लेकिन 21 राजपूत बटालियन के जवानों ने कहा कि राजपूत विजय या वीरगति के निशान पर लड़ाई लड़ता है। बजरंग बली का जयकारा लगा रात के बजाय दिन में हमला करने का निर्णय लिया गया। इन जवानों ने रात से पहले ही खानसामा को अपने कब्जे में ले लिया।
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21 राजपूत बटालियन के पूर्व सैनिक महेश चौहान ने कहा कि यह युद्ध न केवल सैन्य शक्ति के प्रदर्शन का उदाहरण था, बल्कि मानवीय हस्तक्षेप की आवश्यकता और अंतरराष्ट्रीय राजनीति में उसके प्रभाव को भी दर्शाता है। इस मौके पर कैप्टन चरण सिंह मलिक, कैप्टन कृष्ण पाली, सूबेदार राजकुमार पाली, हवलदार देशराज पाली, कैप्टन कृष्ण कुमार सांगा, सूबेदार लाभ सिंह खरक, सूबेदार सत्यवान कलिंगा, हवलदार संजय कलिंगा, हवलदार संजय खरक आदि मौजूद रहे।
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सूबेदार जगदीश सिंह पाली इस युद्ध के चश्मदीद थे। उन्होंने बताया कि यह युद्ध तीन से 15 दिसंबर 1971 तक चला था। कुल 11 दिनों तक चले इस युद्ध में 13 दिसंबर का दिन महत्वपूर्ण था। उन्होंने बताया कि पाकिस्तानी सेना ने खानसामा में पक्का स्थल बनाकर भारतीय जवानों को खानसामा से पहले रोक दिया था। उस समय 21 राजपूत बटालियन को आदेश मिला था कि वे खानसामा पर कब्जा करें।
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उन्होंने बताया कि ये हमला 13 दिसंबर की रात में होना था, लेकिन 21 राजपूत बटालियन के जवानों ने कहा कि राजपूत विजय या वीरगति के निशान पर लड़ाई लड़ता है। बजरंग बली का जयकारा लगा रात के बजाय दिन में हमला करने का निर्णय लिया गया। इन जवानों ने रात से पहले ही खानसामा को अपने कब्जे में ले लिया।
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21 राजपूत बटालियन के पूर्व सैनिक महेश चौहान ने कहा कि यह युद्ध न केवल सैन्य शक्ति के प्रदर्शन का उदाहरण था, बल्कि मानवीय हस्तक्षेप की आवश्यकता और अंतरराष्ट्रीय राजनीति में उसके प्रभाव को भी दर्शाता है। इस मौके पर कैप्टन चरण सिंह मलिक, कैप्टन कृष्ण पाली, सूबेदार राजकुमार पाली, हवलदार देशराज पाली, कैप्टन कृष्ण कुमार सांगा, सूबेदार लाभ सिंह खरक, सूबेदार सत्यवान कलिंगा, हवलदार संजय कलिंगा, हवलदार संजय खरक आदि मौजूद रहे।