{"_id":"5e1f64c08ebc3e4af81a799f","slug":"vegetables-rate-hipe-bhiwani-news-rtk5374866190","type":"story","status":"publish","title_hn":"मंडी से बाहर निकलते ही 50 फीसदी तक महंगी हो रहीं सब्जियां, जिम्मेदार बोले- करेंगे बैठक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मंडी से बाहर निकलते ही 50 फीसदी तक महंगी हो रहीं सब्जियां, जिम्मेदार बोले- करेंगे बैठक
विज्ञापन
सब्जीमंडी में बैठा दुकानदार। संवाद न्यूज एजेंसी
- फोटो : Bhiwani
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सब्जीमंडी में लहसुन का भाव 180 से 200 रुपये प्रति किलो तक। ये ही लहसुन कृष्णा कॉलोनी मंडी में दो सौ रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है तो पुराना बस स्टैंड पर इसके बाद 220 रुपये किलो तक है। मंडी से बाहर निकलते ही सब्जियों के दामों में 10 से 50 फीसदी तक बढ़ रहे है। कोई रोक-टोक या बंधन न होने के कारण उपभोक्ताओं को मजबूरी में महंगे दामों पर सब्जियां खरीदनी पड़ रही है। वहीं चेयरमैन, हरियाणा कृषि विपणन बोर्ड मामले को लेकर बैठक करने की बात कर रहे हैं।
शहर की सब्जीमंडी, कृष्णा कॉलोनी सब्जी मंडी में ही सब्जियों के दामों में 10 से 20 फीसदी तक का फर्क आ रहा है वहीं शहर की अन्य मार्केट पुराना बस स्टैंड, दादरी गेट, सेक्टर 13 मार्केट, अनाजमंडी ओवरब्रिज पर तो दाम 30 से 50 फीसदी तक बढ़ रहे है। दरअसल जिला प्रशासन और हरियाणा कृषि विपणन बोर्ड का फल-सब्जियों के दामों पर कोई नियंत्रण नहीं है और दुकानदार मनमाफिक दाम वसूल रहे है।
क्या कहते है उपभोक्ता:
सब्जीमंडी में जाने पर समय लगता है और इसी कारण घर के आसपास ही खरीदते है। यहां दुकानदार सब्जियों के मनमाने भाव लगा रहे है। वो किसान से कम दाम में सब्जी खरीदकर उपभोक्ताओं को ज्यादा रेट पर सब्जी बेच रहे है। मौसमी सब्जियों के दाम भी आसमान छू रहे है। जिला प्रशासन को इसके लिए कदम उठाना चाहिए।
विज्ञापन
- डिम्पल, टीचर।
कुछ समय से सब्जियों के दाम लगातार बढ़ रहे है। जिसका सीधा प्रभाव आमजन पर पड़ रहा है। सरकार को कुछ ऐसा कदम उठाना चाहिए कि अधिकतम दाम और न्यूनतम दाम तय हो। कोई भी निर्धारित से ज्यादा दाम न ले सके ताकि आमजन के साथ धोखाधड़ी न हो। अब दुकानदार पहले कुछ दाम बोलते है, मौल-भाव करते है और फिर अपनी मर्जी के दामों पर सब्जियां बेचते है।
- नेहा, छात्रा
बढ़ती महंगाई के कारण खाद्य पदार्थों के भाव में बढ़ोतरी हो रही है। जिसके कारण सब्जियों के रेट भी बढ़ रह े है। इसके लिए आवश्यक है कि दुकानदारों के बेचने के मूल्य की बढ़ोतरी के रेट भी निर्धारित करें। ताकि ग्राहक का बजट न बिगड़े।
- उषा देवी, गृहिणी।
सब्जियों के दाम में बहुत ज्यादा वृद्धि हो गई। जिससे आमजन की रसोई का बजट बिगड़ गया। महंगाई के नाम पर दुकानदार ज्यादा दाम वसूल रहे है। जिला प्रशासन और कृषि से संबंधित विभाग को इसके बारे में विचार करना चाहिए। सरकार को सब्जियों के बढ़ते दामों पर नियंत्रण करना चाहिए।
- कृष्णा देवी, गृहिणी।
मार्केट अनुसार ये है सब्जियों के दाम (रुपये प्रति किलो)
सब्जी सब्जी मंडी कृष्णा कॉलोनी पुरानी बस स्टैंड भाव
लहसुन 180-200 200-210 220
अदरक 80 100 100
आलू 20 20-25 25-30
प्याज 40-50 50 60
टमाटर 20-25 25-30 35
हरी मिर्च 40 40 40-45
मटर 40-50 50 50
गाजर 20-25 20-30 40
जब मैं चेयरमैन नहीं बना था, तब भी देखता था कि आढ़ती किसानों को लूटते हैं। किसानों से औने-पौने दामों पर सब्जियां खरीदते हैं और फिर अपने हिसाब से बेचते हैं। मगर आढ़ती की पांच प्रतिशत की होती है। इसके अलावा मंडी में फड़ की जगह किसान, जमीदारों के लिए होती है, ताकि वे भी वहां खुद अपनी सब्जियां बेच सके। मगर अब इन पर गैर कानूनी तरीके से कुछ दुकानदारों ने कब्जा कर रखा है। इस संबंध में बैठक की जाएगी।
बाबूलाल यादव, चेयरमैन, हरियाणा कृषि विपणन बोर्ड
मार्केटिंग बोर्ड सब्जियों का रेट तय नहीं करती और न ही सब्जियों पर कोई मार्केट फीस वसूली जा रही है। इस कारण हम सब्जियों के दामों को लेकर दुकानदारों पर कोई दबाव नहीं डाल सकते। हमें स्टॉक जांचने का अधिकार है। कोई भी ओवर स्टॉक करता है तो हम उसके खिलाफ कार्रवाई कर सकते हैं।
- योगेश शर्मा, मंडी सुपरवाइजर, हरियाणा कृषि विपणन बोर्ड
विज्ञापन
शहर की सब्जीमंडी, कृष्णा कॉलोनी सब्जी मंडी में ही सब्जियों के दामों में 10 से 20 फीसदी तक का फर्क आ रहा है वहीं शहर की अन्य मार्केट पुराना बस स्टैंड, दादरी गेट, सेक्टर 13 मार्केट, अनाजमंडी ओवरब्रिज पर तो दाम 30 से 50 फीसदी तक बढ़ रहे है। दरअसल जिला प्रशासन और हरियाणा कृषि विपणन बोर्ड का फल-सब्जियों के दामों पर कोई नियंत्रण नहीं है और दुकानदार मनमाफिक दाम वसूल रहे है।
विज्ञापन
क्या कहते है उपभोक्ता:
सब्जीमंडी में जाने पर समय लगता है और इसी कारण घर के आसपास ही खरीदते है। यहां दुकानदार सब्जियों के मनमाने भाव लगा रहे है। वो किसान से कम दाम में सब्जी खरीदकर उपभोक्ताओं को ज्यादा रेट पर सब्जी बेच रहे है। मौसमी सब्जियों के दाम भी आसमान छू रहे है। जिला प्रशासन को इसके लिए कदम उठाना चाहिए।
विज्ञापन
- डिम्पल, टीचर।
कुछ समय से सब्जियों के दाम लगातार बढ़ रहे है। जिसका सीधा प्रभाव आमजन पर पड़ रहा है। सरकार को कुछ ऐसा कदम उठाना चाहिए कि अधिकतम दाम और न्यूनतम दाम तय हो। कोई भी निर्धारित से ज्यादा दाम न ले सके ताकि आमजन के साथ धोखाधड़ी न हो। अब दुकानदार पहले कुछ दाम बोलते है, मौल-भाव करते है और फिर अपनी मर्जी के दामों पर सब्जियां बेचते है।
- नेहा, छात्रा
बढ़ती महंगाई के कारण खाद्य पदार्थों के भाव में बढ़ोतरी हो रही है। जिसके कारण सब्जियों के रेट भी बढ़ रह े है। इसके लिए आवश्यक है कि दुकानदारों के बेचने के मूल्य की बढ़ोतरी के रेट भी निर्धारित करें। ताकि ग्राहक का बजट न बिगड़े।
- उषा देवी, गृहिणी।
सब्जियों के दाम में बहुत ज्यादा वृद्धि हो गई। जिससे आमजन की रसोई का बजट बिगड़ गया। महंगाई के नाम पर दुकानदार ज्यादा दाम वसूल रहे है। जिला प्रशासन और कृषि से संबंधित विभाग को इसके बारे में विचार करना चाहिए। सरकार को सब्जियों के बढ़ते दामों पर नियंत्रण करना चाहिए।
- कृष्णा देवी, गृहिणी।
मार्केट अनुसार ये है सब्जियों के दाम (रुपये प्रति किलो)
सब्जी सब्जी मंडी कृष्णा कॉलोनी पुरानी बस स्टैंड भाव
लहसुन 180-200 200-210 220
अदरक 80 100 100
आलू 20 20-25 25-30
प्याज 40-50 50 60
टमाटर 20-25 25-30 35
हरी मिर्च 40 40 40-45
मटर 40-50 50 50
गाजर 20-25 20-30 40
जब मैं चेयरमैन नहीं बना था, तब भी देखता था कि आढ़ती किसानों को लूटते हैं। किसानों से औने-पौने दामों पर सब्जियां खरीदते हैं और फिर अपने हिसाब से बेचते हैं। मगर आढ़ती की पांच प्रतिशत की होती है। इसके अलावा मंडी में फड़ की जगह किसान, जमीदारों के लिए होती है, ताकि वे भी वहां खुद अपनी सब्जियां बेच सके। मगर अब इन पर गैर कानूनी तरीके से कुछ दुकानदारों ने कब्जा कर रखा है। इस संबंध में बैठक की जाएगी।
बाबूलाल यादव, चेयरमैन, हरियाणा कृषि विपणन बोर्ड
मार्केटिंग बोर्ड सब्जियों का रेट तय नहीं करती और न ही सब्जियों पर कोई मार्केट फीस वसूली जा रही है। इस कारण हम सब्जियों के दामों को लेकर दुकानदारों पर कोई दबाव नहीं डाल सकते। हमें स्टॉक जांचने का अधिकार है। कोई भी ओवर स्टॉक करता है तो हम उसके खिलाफ कार्रवाई कर सकते हैं।
- योगेश शर्मा, मंडी सुपरवाइजर, हरियाणा कृषि विपणन बोर्ड