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Bhiwani News: हिलना पत्थर पर यूनिवर्सिटी के प्रोफेसरों का चल रहा शोध, भूकंप में भी नहीं डगमगाएगी निर्मित बिल्डिंग
Wed, 21 Feb 2024 11:13 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Wed, 21 Feb 2024 11:13 PM IST
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सीबीएलयू के भूगोल विभाग में शोध के लिए रखा हिलना पत्थर।
भिवानी। चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय में एक ऐसे पत्थर पर शोध चल रहा है, जिस पर भविष्य के बहुमंजिला भवनों की बुनियाद टिकी है। ये भवन भूकंप के तेज झटकों में भी नहीं डगमगाएंगे और इनके टिके रहने की संभावनाएं भी अधिक होंगी। दरअसल, चरखी दादरी शहर से मात्र सात किलोमीटर दूर कलियाणा गांव की पहाड़ियों में 385 मीटर की गहराई में एक ऐसा पत्थर है जिसे हिलना पत्थर कहा जा रहा है। इस पत्थर की खासियत यह है कि हाथ लगाने पर भी ये पत्थर हिलने लगता है यानी इलास्टिक की तरह रिएक्ट करता है।
सीबीएलयू के शोधार्थी प्रोफेसरों का दावा है कि इस पत्थर के अंदर लचीलापन है। ये पत्थर तीन जगह ही पाया जाता है। अमेरिका के उत्तरी कैरोलिना और ब्राजील के मिनास झिराईस में मिलता है, जबकि हरियाणा के चरखी दादरी जिले के गांव कलियाणा की पहाड़ी पर ये पत्थर मिला है।
भिवानी के चौ. बंसीलाल विश्वविद्यालय के भूगोल विभाग में पत्थर पर शोध चल रहा है। पिछले काफी दिनों से इस पत्थर की खासियत पर शोधार्थी जुटे हैं। पत्थर के कई सैंपल जांच के दायरे में हैं। ये पीले रंग का पत्थर दुर्लभ पत्थर भी है। सीबीएलयू भूकंप के दौरान भवन निर्माण की ऐसी संभावनाओं पर शोध कर रही है, जिसमें तेज झटकों को सहते हुए भी बहुमंजिला इमारतें टिकी रहे और उन्हें नुकसान न पहुंचे।
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इस पत्थर का प्रयोग कर बनाई जाने वाले भवन भूकंप में कितने टिकाऊ रहेंगे, इस पर भी शोध हो रहा है। चौ. बंसीलाल विश्वविद्यालय भूगोल विभाग के एचओडी डॉ. पवन कुमार ने बताया कि कलियाणा के हिलना पत्थर पर शोधार्थियों द्वारा शोध कार्य चल रहा है। ये पत्थर काफी लचीलापन की खासियत रखता है। उन्होंने बताया कि पत्थर में इकोलॉजिकल के छोटे कण मिले हैं जो बलवा पत्थर की पतली लचीली पट्टियों में पाया जाता है।
सीबीएलयू के भूगोल विभाग में कलियाणा पहाड़ी पर मिलने वाले पत्थर पर शोध कार्य किया जा रहा है। अभी इस पर रिसर्च हो रहा है। इसके बाद कोई ठोस नतीजे सामने आने के बाद इसका पेटेंट कराया जाएगा।
- प्रोफेसर राजकुमार मित्तल, वीसी, सीबीएलयू भिवानी।
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सीबीएलयू के शोधार्थी प्रोफेसरों का दावा है कि इस पत्थर के अंदर लचीलापन है। ये पत्थर तीन जगह ही पाया जाता है। अमेरिका के उत्तरी कैरोलिना और ब्राजील के मिनास झिराईस में मिलता है, जबकि हरियाणा के चरखी दादरी जिले के गांव कलियाणा की पहाड़ी पर ये पत्थर मिला है।
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भिवानी के चौ. बंसीलाल विश्वविद्यालय के भूगोल विभाग में पत्थर पर शोध चल रहा है। पिछले काफी दिनों से इस पत्थर की खासियत पर शोधार्थी जुटे हैं। पत्थर के कई सैंपल जांच के दायरे में हैं। ये पीले रंग का पत्थर दुर्लभ पत्थर भी है। सीबीएलयू भूकंप के दौरान भवन निर्माण की ऐसी संभावनाओं पर शोध कर रही है, जिसमें तेज झटकों को सहते हुए भी बहुमंजिला इमारतें टिकी रहे और उन्हें नुकसान न पहुंचे।
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इस पत्थर का प्रयोग कर बनाई जाने वाले भवन भूकंप में कितने टिकाऊ रहेंगे, इस पर भी शोध हो रहा है। चौ. बंसीलाल विश्वविद्यालय भूगोल विभाग के एचओडी डॉ. पवन कुमार ने बताया कि कलियाणा के हिलना पत्थर पर शोधार्थियों द्वारा शोध कार्य चल रहा है। ये पत्थर काफी लचीलापन की खासियत रखता है। उन्होंने बताया कि पत्थर में इकोलॉजिकल के छोटे कण मिले हैं जो बलवा पत्थर की पतली लचीली पट्टियों में पाया जाता है।
सीबीएलयू के भूगोल विभाग में कलियाणा पहाड़ी पर मिलने वाले पत्थर पर शोध कार्य किया जा रहा है। अभी इस पर रिसर्च हो रहा है। इसके बाद कोई ठोस नतीजे सामने आने के बाद इसका पेटेंट कराया जाएगा।
- प्रोफेसर राजकुमार मित्तल, वीसी, सीबीएलयू भिवानी।