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Bhiwani News: अधिकृत संपत्तियां जीआईएस पोर्टल पर अनधिकृत
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भिवानी। देश की आजादी के दौरान 1947 में सबसे पहले विकसित हुए शहर के हिस्से की अधिकृत संपत्तियां जीआईएस (भौगोलिक सूचना प्रणाली) पोर्टल पर अनधिकृत दर्शा दी गई हैं। पोर्टल की तकनीकी गड़बड़ी के चलते पुराने शहर की इन संपत्तियों की एनडीसी (अदेय प्रमाणपत्र/बकाया न होने का प्रमाणपत्र) अटक गई है और संपत्ति मालिक परेशान हैं।
नगर परिषद अधिकारियों ने शहर में ऐसे 44 पैच यानी अलग-अलग हिस्से चिह्नित किए हैं। इन पैच में काफी इलाका और कई संपत्तियां शामिल हैं। तकनीकी खामी को दूर कराने के लिए नगर परिषद को पंचकूला मुख्यालय तक प्रक्रिया पूरी करनी होगी। शहर में अब तक 76 हजार संपत्तियों की प्रॉपर्टी आईडी की पहचान हो चुकी है।
शहरी स्थानीय निकाय विभाग की ओर से जीआईएस पोर्टल पर नगर पालिका, नगर परिषद और नगर निगमों के शहरी क्षेत्र की अधिकृत और अनधिकृत कॉलोनियों व संपत्तियों का डाटा डिजिटल तरीके से चिह्नित किया गया है। इसी डाटा के आधार पर नगर परिषद पेयजल, सीवर लाइन और सड़क निर्माण समेत विकास कार्यों का खाका तैयार कर लोगों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराती है।
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शहरी दायरे में प्रत्येक संपत्ति मालिक को प्रॉपर्टी आईडी जारी की गई है। इसके जरिये संपत्ति का टैक्स भुगतान, नक्शा स्वीकृत कराने और खरीद-बिक्री के लिए एनडीसी जारी कराने का काम होता है। शहर के बाहरी दायरे में हाल ही में अधिकृत हुई कॉलोनियों को भी पोर्टल पर दर्शाया गया है। लेकिन पुराने शहर की अधिकृत संपत्तियां अनधिकृत और बाहरी कॉलोनियों की अनधिकृत संपत्तियां अधिकृत दिखाई जा रही हैं।
पोर्टल की इस गड़बड़ी के बाद नगर परिषद अधिकारी भी परेशान हैं। अधिकारियों के अनुसार यह तकनीकी खामी अकेले भिवानी में नहीं बल्कि प्रदेश के सभी जिलों में सामने आई है। नगर परिषद ने पोर्टल पर गलत दर्शाई जा रही संपत्तियों और उनके क्षेत्रों को चिह्नित किया है। साथ ही संबंधित संपत्तियों के राजस्व रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है।
गलत दर्शाई गई संपत्तियों को पोर्टल पर दुरुस्त कराने के लिए मुख्यालय से मंजूरी लेनी होगी। इसके बाद संबंधित क्षेत्र का सर्वेक्षण कराया जाएगा। नगर परिषद सर्वेक्षण के आधार पर प्रस्ताव तैयार कर शहरी स्थानीय निकाय विभाग को मंजूरी के लिए भेजेगी। इस पूरी प्रक्रिया में करीब दो माह का समय लगने की बात कही गई है।
शहर की इन अधिकृत कॉलोनियों में भी संपत्तियां दर्शायी अनधिकृत
जीआईएस पोर्टल के संपत्तियों के डिजिटल डॉटा यानी मानचित्र पर शहर के अंदर की 55 साल पुरानी कॉलोनियों में भी संपत्ति को अनधिकृत दर्शाया है। इसमें मुख्य तौर पर शहर का कृष्णा कॉलोनी रेलवे रोड़ क्षेत्र हैं जहां आसपास कई जगह संपत्तियां अनधिकृत दर्शा दिया है। जिसे पोर्टल पर लाल रंग से चिह्नित भी किया गया है। इसी तरह हांसी गेट केएम स्कूल के समीप का क्षेत्र, डीसी कॉलोनी का कुछ क्षेत्र, आंबेडकर कॉलोनी, विद्या नगर कॉलोनी, बावड़ी गेट के आसपास का क्षेत्र, डाबर कॉलोनी का अनधिकृत दर्शाया गया है। जबकि यहां खुद नगर परिषद ने भवनों के नक्शा पास कर संपत्ति मालिकों को पीआईडी जारी की है। इतना ही नहीं अब इन अनधिकृत संपत्तियों की एनडीसी तक नहीं मिल रही है।
पोर्टल की खामी ने संपत्ति मालिकों की बढ़ा दी परेशानी, अब काट रहे चक्कर
जीआईएस पोर्टल पर अधिकृत दायरे की संपत्ति को अनधिकृत दर्शाने और अनधिकृत को अधिकृत दर्शाने का मामला उजागर होने के बाद संपत्ति मालिकों में भी हड़कंप मचा है। लोग अपनी संपत्ति को पोर्टल पर दुरुस्त कराने के लिए नगर परिषद कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं। ऐसे लोग दलालों के झांसे में भी आ रहे हैं वहीं पार्षदों के माध्यम से भी संपत्ति का रिकॉर्ड पोर्टल पर दुरुस्त कराने की गुहार लगा रहे हैं। कई संपत्तियों के मालिक स्थानांतरण, खरीद और बिक्री के अलावा बकाया टैक्स भुगतान का मामला भी अब अटक गया है।
नगर परिषद के जीआईएस पोर्टल पर तकनीकी खामी की वजह से शहरी दायरे में संपत्तियों को अनधिकृत दर्शाया गया है। नगर परिषद की तरफ से शहर में ऐसी 44 पैच चिह्नित किए जा चुके हैं। इस क्षेत्र को संबंधित अथॉरिटी से मंजूरी लेकर सर्वेक्षण कराया जाएगा। नगर परिषद के सर्वेक्षण के बाद इसका प्रस्ताव बनाकर शहरी स्थानीय निकाय विभाग को मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। इस प्रक्रिया में करीब दो माह का समय लग जाएगा। - जयभगवान जांगड़ा, योजना विशेषज्ञ (प्लानिंग एक्सपर्ट), नगर परिषद भिवानी
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नगर परिषद अधिकारियों ने शहर में ऐसे 44 पैच यानी अलग-अलग हिस्से चिह्नित किए हैं। इन पैच में काफी इलाका और कई संपत्तियां शामिल हैं। तकनीकी खामी को दूर कराने के लिए नगर परिषद को पंचकूला मुख्यालय तक प्रक्रिया पूरी करनी होगी। शहर में अब तक 76 हजार संपत्तियों की प्रॉपर्टी आईडी की पहचान हो चुकी है।
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शहरी स्थानीय निकाय विभाग की ओर से जीआईएस पोर्टल पर नगर पालिका, नगर परिषद और नगर निगमों के शहरी क्षेत्र की अधिकृत और अनधिकृत कॉलोनियों व संपत्तियों का डाटा डिजिटल तरीके से चिह्नित किया गया है। इसी डाटा के आधार पर नगर परिषद पेयजल, सीवर लाइन और सड़क निर्माण समेत विकास कार्यों का खाका तैयार कर लोगों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराती है।
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शहरी दायरे में प्रत्येक संपत्ति मालिक को प्रॉपर्टी आईडी जारी की गई है। इसके जरिये संपत्ति का टैक्स भुगतान, नक्शा स्वीकृत कराने और खरीद-बिक्री के लिए एनडीसी जारी कराने का काम होता है। शहर के बाहरी दायरे में हाल ही में अधिकृत हुई कॉलोनियों को भी पोर्टल पर दर्शाया गया है। लेकिन पुराने शहर की अधिकृत संपत्तियां अनधिकृत और बाहरी कॉलोनियों की अनधिकृत संपत्तियां अधिकृत दिखाई जा रही हैं।
पोर्टल की इस गड़बड़ी के बाद नगर परिषद अधिकारी भी परेशान हैं। अधिकारियों के अनुसार यह तकनीकी खामी अकेले भिवानी में नहीं बल्कि प्रदेश के सभी जिलों में सामने आई है। नगर परिषद ने पोर्टल पर गलत दर्शाई जा रही संपत्तियों और उनके क्षेत्रों को चिह्नित किया है। साथ ही संबंधित संपत्तियों के राजस्व रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है।
गलत दर्शाई गई संपत्तियों को पोर्टल पर दुरुस्त कराने के लिए मुख्यालय से मंजूरी लेनी होगी। इसके बाद संबंधित क्षेत्र का सर्वेक्षण कराया जाएगा। नगर परिषद सर्वेक्षण के आधार पर प्रस्ताव तैयार कर शहरी स्थानीय निकाय विभाग को मंजूरी के लिए भेजेगी। इस पूरी प्रक्रिया में करीब दो माह का समय लगने की बात कही गई है।
शहर की इन अधिकृत कॉलोनियों में भी संपत्तियां दर्शायी अनधिकृत
जीआईएस पोर्टल के संपत्तियों के डिजिटल डॉटा यानी मानचित्र पर शहर के अंदर की 55 साल पुरानी कॉलोनियों में भी संपत्ति को अनधिकृत दर्शाया है। इसमें मुख्य तौर पर शहर का कृष्णा कॉलोनी रेलवे रोड़ क्षेत्र हैं जहां आसपास कई जगह संपत्तियां अनधिकृत दर्शा दिया है। जिसे पोर्टल पर लाल रंग से चिह्नित भी किया गया है। इसी तरह हांसी गेट केएम स्कूल के समीप का क्षेत्र, डीसी कॉलोनी का कुछ क्षेत्र, आंबेडकर कॉलोनी, विद्या नगर कॉलोनी, बावड़ी गेट के आसपास का क्षेत्र, डाबर कॉलोनी का अनधिकृत दर्शाया गया है। जबकि यहां खुद नगर परिषद ने भवनों के नक्शा पास कर संपत्ति मालिकों को पीआईडी जारी की है। इतना ही नहीं अब इन अनधिकृत संपत्तियों की एनडीसी तक नहीं मिल रही है।
पोर्टल की खामी ने संपत्ति मालिकों की बढ़ा दी परेशानी, अब काट रहे चक्कर
जीआईएस पोर्टल पर अधिकृत दायरे की संपत्ति को अनधिकृत दर्शाने और अनधिकृत को अधिकृत दर्शाने का मामला उजागर होने के बाद संपत्ति मालिकों में भी हड़कंप मचा है। लोग अपनी संपत्ति को पोर्टल पर दुरुस्त कराने के लिए नगर परिषद कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं। ऐसे लोग दलालों के झांसे में भी आ रहे हैं वहीं पार्षदों के माध्यम से भी संपत्ति का रिकॉर्ड पोर्टल पर दुरुस्त कराने की गुहार लगा रहे हैं। कई संपत्तियों के मालिक स्थानांतरण, खरीद और बिक्री के अलावा बकाया टैक्स भुगतान का मामला भी अब अटक गया है।
नगर परिषद के जीआईएस पोर्टल पर तकनीकी खामी की वजह से शहरी दायरे में संपत्तियों को अनधिकृत दर्शाया गया है। नगर परिषद की तरफ से शहर में ऐसी 44 पैच चिह्नित किए जा चुके हैं। इस क्षेत्र को संबंधित अथॉरिटी से मंजूरी लेकर सर्वेक्षण कराया जाएगा। नगर परिषद के सर्वेक्षण के बाद इसका प्रस्ताव बनाकर शहरी स्थानीय निकाय विभाग को मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। इस प्रक्रिया में करीब दो माह का समय लग जाएगा। - जयभगवान जांगड़ा, योजना विशेषज्ञ (प्लानिंग एक्सपर्ट), नगर परिषद भिवानी