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Bhiwani News: शारदीय नवरात्र का आज पहला दिन, मां शैलपुत्री की होगी पूजा

Mon, 22 Sep 2025 01:31 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी Updated Mon, 22 Sep 2025 01:31 AM IST
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Today is the first day of Sharadiya Navratri, where Goddess Shailputri will be worshipped.
बाजार में नवरात्र की तैयारी के लिए सामान खरीदतीं महिलाएं।
भिवानी। नौ दिन तक चलने वाले शारदीय नवरात्र का आज पहला दिन है। घरों और मंदिरों में कलश स्थापना के साथ ही मां शैलपुत्री की पूजा की जाएगी। आने वाले दस दिनों तक श्रद्धालु मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा करेंगे। इस अवसर पर कुछ लोग लगातार नौ दिन तक उपवास रखते हैं। उपवास के दौरान शरीर का संतुलन बना रहे और किसी प्रकार की समस्या न हो, इसके लिए पंडित नेकीराम शर्मा राजकीय मेडिकल कॉलेज से फिजिशियन डॉ. यतिन गुप्ता ने विशेष सलाह दी।
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उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को बीपी या शुगर की समस्या रहती है तो उपवास के दौरान खान-पान का विशेष ध्यान रखना चाहिए। विशेष रूप से आलू और केले का सेवन सीमित मात्रा में करें क्योंकि अधिक मात्रा में सेवन से शुगर बढ़ सकती है। सामान्य व्यक्ति अपने शरीर की क्षमता के अनुसार फलाहार कर सकता है। इसके अलावा गर्मी के कारण पर्याप्त पानी पीते रहें और प्राकृतिक जूस का सेवन करें।
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बाजारों में रही दिनभर रौनक, फलों के भावों में आई तेजी
शारदीय नवरात्र के पहले दिन घरों में माता के पूजन के लिए कलश स्थापना की जाएगी। इससे ठीक पहले रविवार को नवरात्र पूजन सामग्री खरीदने के लिए बाजारों में दिनभर महिलाओं की भीड़ रही। नवरात्र पूजन में प्रयुक्त सामग्री जैसे माता की लाल चुनरी, लाल सिंदूर, कलश, मौली, लौंग, इलाइची, जटा वाला नारियल, वस्त्र और शृंगार का सामान खरीदा गया। चुनरी 5 से 30 रुपये, सिंदूर 10 से 20 रुपये, मौली 20 रुपये, लौंग 10 से 20 रुपये, इलाइची 10 से 20 रुपये और नारियल 50 रुपये में उपलब्ध थे। उपवास में प्रयुक्त फलों की मांग बढ़ गई है। बाजार में सेब 100 से 120 रुपये प्रति किलोग्राम और केला 60 से 80 रुपये प्रति किलोग्राम बिक रहा है। पानी वाला नारियल 50 रुपये में उपलब्ध है। फल विक्रेता तरुण शर्मा ने बताया कि नवरात्रि पर मंडी से ही फल महंगे मिलते हैं इसलिए कीमतें बढ़ जाती हैं।
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नवरात्र में बन रहे शुभ कार्य करने के विशेष योग
पंडित महेश शर्मा ने बताया कि शारदीय नवरात्र 22 सितंबर सोमवार, आश्विन मास की शुक्ल प्रतिपदा से शुरू होकर एक अक्तूबर तक चलेंगे। इस बार नवरात्र की शुरुआत शुक्ल योग और ब्रह्म योग के विशेष संयोग से हो रही है। शास्त्रों के अनुसार शुक्ल योग में की गई पूजा से सौभाग्य और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है, जबकि ब्रह्म योग साधना और ध्यान के लिए उत्तम माना जाता है। नवरात्रि के दौरान ग्रहों का शुभ संयोग बना हुआ है। धार्मिक मान्यता के अनुसार माता के नवरात्रों में सही मुहूर्त में सगाई, दुकान या नया काम आरंभ करना, आभूषण और वस्त्र खरीदना शुभ माना जाता है।

इस बार हाथी पर सवार हो कर आएंगी मां दुर्गा
पंडित महेश शर्मा ने बताया कि इस बार मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर आएंगी, जो अत्यंत शुभ है। धर्मशास्त्रों के अनुसार जब देवी का वाहन हाथी हो तो यह समय अच्छी कृषि, धन-संपत्ति, सामाजिक मान-प्रतिष्ठा, बल और उच्च मनोबल का संकेत देता है। दुर्गा सप्तशती अनुसार हाथी पर विराजित देवी मां दुर्गा शक्ति और सुख-समृद्धि का प्रतीक हैं। उनका वाहन दर्शाता है कि मां की शक्ति अपार है और वह अपने भक्तों के समस्त विघ्न-बाधाओं का नाश कर जीवन में सुख, समृद्धि और सौभाग्य का आशीर्वाद देंगी।

इस बार नौ के बजाय दस दिन के होंगे नवरात्र
पंडित महेश शर्मा ने बताया कि इस बार नवरात्र नौ दिन के बजाय 10 दिनों के होंगे, जो शास्त्रों के अनुसार अत्यंत शुभ है। तिथि वृद्धि का यह दुर्लभ संयोग वर्ष के शेष समय को शुभ और सुख-समृद्ध बनाए रखने का संकेत देता है। इन दिनों भक्त शुद्ध-सात्विक मन से मां के नौ स्वरूपों की पूजा करें और दुर्गा सप्तशती का पाठ करें, जिससे मां भगवती अपने भक्तों पर अपार कृपा बरसाती हैं।


नवरात्र में कलश स्थापना का विशेष महत्व
नवरात्र में कलश स्थापना का विशेष महत्व होता है। शुभ मुहूर्त में घट स्थापना करनी चाहिए। 22 सितंबर सोमवार को घट स्थापना का मुहूर्त स्थानीय समयानुसार सूर्योदय सुबह 6:15 से 7:45 तक और अभिजीत मुहूर्त 11:54 से दोपहर 12:42 तक है। प्रात: स्नान आदि से निवृत होकर सर्वप्रथम शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना करें। कलश पर कलावा बांधकर इसमें गंगाजल, अक्षत, सुपारी, सिक्का डालें और आम के पत्तों के साथ नारियल को लाल कपड़े में लपेटकर कलश के ऊपर रखें। फिर संकल्पपूर्वक मां दुर्गा की षोडशोपचार पूजा करें।
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