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फसल बीमा का पैसा रोकने पर जुर्माना लगाने का प्रावधान किया जाए : चढ़ूनी
Fri, 29 Aug 2025 01:48 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Fri, 29 Aug 2025 01:48 AM IST
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जाट धर्मशाला में कार्यकर्ताओं की बैठक लेते किसाना नेता गुरनाम सिंह चढूनी। स्रोत : स्वयं
भिवानी। जाट धर्मशाला में वीरवार को भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) की प्रदेशस्तरीय बैठक का आयोजन किया गया। इस दौरान भाकियू के राष्ट्रीय अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि कहा कि बीमा कंपनिया तीन-तीन साल तक बीमा के पैसे अटकाए रखती है तथा उन पर करोड़ों रुपयों का मुनाफा कमाती है।
ऐसे में खराब फसल के लिए एक माह में बीमा क्लेम देने का कानून बनाया जाए तथा प्रतिदिन के हिसाब से बीमा कंपनियों को फसल बीमा का पैसा रोकने पर जुर्माना लगाने का प्रावधान किया जाए।
चढूनी ने मांग उठाई कि प्रदेश में जलभराव वाले क्षेत्रों का सर्वे करवाकर उचित मुआवजा दिया जाए। डीएपी व यूरिया को पोर्टल के माध्यम से न बांटकर खुले में बांटा जाए। उन्होंने कहा कि आज देश के किसान 6 गुणा तक पेस्ट्रीसाइड डालते है। इससे उनके खर्चे भी 6 गुना तक बढ़े हैं तथा अधिकतर खाद-बीज की दुकानों पर मिलने वाली दवाइयों में से 60 प्रतिशत दवाइया नॉट रिकमेंडेड (बिना अनुशंसा की) होती है। उन्होंने कहा कि इन सबके लिए सरकार का कृषि विभाग जिम्मेवार है। कृषि विभाग के मात्र 25 प्रतिशत कर्मचारी कार्य कर रहे है।
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प्राइवेट कंपनियों के लोग किसानों के बीच जाकर गैर जरूरी दवाइयों का प्रचार करके किसानों को अत्याधिक पेस्ट्रीसाइड व खाद डालने के लिए तैयार कर लेते है। इसके लिए उन्होंने कृषि विभाग के अधिकारियों व कंपनियों की मिलीभगत होने का आरोप लगाया।
चढूनी ने पेट्रोल कंपनियों की ओर से 20 प्रतिशत एथेनॉल मिलाए जाने की शुरुआत किए जाने के सवाल पर कहा कि इस पर किसानों को कोई एतराज नहीं है। एथेनॉल का उत्पादन कृषि उत्पादों से ही होता है। इस नियम का किसानों को आने वाले समय में कोई नुकसान नहीं होगा।
यूनियन के जिला अध्यक्ष राकेश आर्य ने कहा कि कपास पर लगाए गए 11 प्रतिशत आयात शुल्क से किसानों को सीधे रूप से नुकसान होगा तथा पहले से आर्थिक मार झेल रहा किसान और भी बर्बादी की कगार पर पहुंचेगा।
इस दाैरान प्रदेश कार्यकारी प्रधान कर्म सिंह मथाना, प्रेस प्रवक्ता राकेश बैंस, संगठन सचिव हरपाल सुढल, युवा प्रदेश अध्यक्ष विक्रम कसाना माैजूद रहे।
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ऐसे में खराब फसल के लिए एक माह में बीमा क्लेम देने का कानून बनाया जाए तथा प्रतिदिन के हिसाब से बीमा कंपनियों को फसल बीमा का पैसा रोकने पर जुर्माना लगाने का प्रावधान किया जाए।
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चढूनी ने मांग उठाई कि प्रदेश में जलभराव वाले क्षेत्रों का सर्वे करवाकर उचित मुआवजा दिया जाए। डीएपी व यूरिया को पोर्टल के माध्यम से न बांटकर खुले में बांटा जाए। उन्होंने कहा कि आज देश के किसान 6 गुणा तक पेस्ट्रीसाइड डालते है। इससे उनके खर्चे भी 6 गुना तक बढ़े हैं तथा अधिकतर खाद-बीज की दुकानों पर मिलने वाली दवाइयों में से 60 प्रतिशत दवाइया नॉट रिकमेंडेड (बिना अनुशंसा की) होती है। उन्होंने कहा कि इन सबके लिए सरकार का कृषि विभाग जिम्मेवार है। कृषि विभाग के मात्र 25 प्रतिशत कर्मचारी कार्य कर रहे है।
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प्राइवेट कंपनियों के लोग किसानों के बीच जाकर गैर जरूरी दवाइयों का प्रचार करके किसानों को अत्याधिक पेस्ट्रीसाइड व खाद डालने के लिए तैयार कर लेते है। इसके लिए उन्होंने कृषि विभाग के अधिकारियों व कंपनियों की मिलीभगत होने का आरोप लगाया।
चढूनी ने पेट्रोल कंपनियों की ओर से 20 प्रतिशत एथेनॉल मिलाए जाने की शुरुआत किए जाने के सवाल पर कहा कि इस पर किसानों को कोई एतराज नहीं है। एथेनॉल का उत्पादन कृषि उत्पादों से ही होता है। इस नियम का किसानों को आने वाले समय में कोई नुकसान नहीं होगा।
यूनियन के जिला अध्यक्ष राकेश आर्य ने कहा कि कपास पर लगाए गए 11 प्रतिशत आयात शुल्क से किसानों को सीधे रूप से नुकसान होगा तथा पहले से आर्थिक मार झेल रहा किसान और भी बर्बादी की कगार पर पहुंचेगा।
इस दाैरान प्रदेश कार्यकारी प्रधान कर्म सिंह मथाना, प्रेस प्रवक्ता राकेश बैंस, संगठन सचिव हरपाल सुढल, युवा प्रदेश अध्यक्ष विक्रम कसाना माैजूद रहे।